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चार में से तीन शिशुओं को नहीं मिल रहा जन्म के पहले घंटे में मां का दूध, व्यापक विकास पर पड़ रहा असर
Thu, 01 Aug 2019 11:15 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 01 Aug 2019 11:15 AM IST
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प्रदेश में 25.2 प्रतिशत शिशुओं को ही जन्म के पहले घंटे में मां का दूध मिल रहा है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 41.6 फीसदी है। जन्म लेने वाले हर चार में से तीन नवजातों को पहले घंटे में मां का दूध नहीं मिलने से उन पर मृत्यु का खतरा अधिक होता है। यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कार्यालय में अपर मिशन निदेशक श्रुति ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि केजीएमयू में मदर मिल्क बैंक भी शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य इकाइयों में सिर्फ 65 फीसदी ही प्रसव हो रहे हैं। जन्म के तुरंत बाद शिशु को स्तनपान कराने से उसे मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलस्ट्रम) मिलता है। सरकार ने नवजातों को मां का स्तनपान कराने के लिए चिकित्सकों और स्टाफ नर्स को निर्देश दिए हैं।
साथ ही एनएचएम ने सभी जिलों के सामुदायिक और चिकित्सीय इकाई पर स्तनपान के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए ‘मां का पूरा प्यार (एमएए-मदर एब्सल्यूट एफेक्शन)’ कार्यक्रम चलाया है। महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि मां का दूध बच्चे के व्यापक शारीरिक-मानसिक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया व कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी है। मां का पहला दूध बच्चे के लिए पहले टीकाकरण की तरह है।
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उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य इकाइयों में सिर्फ 65 फीसदी ही प्रसव हो रहे हैं। जन्म के तुरंत बाद शिशु को स्तनपान कराने से उसे मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलस्ट्रम) मिलता है। सरकार ने नवजातों को मां का स्तनपान कराने के लिए चिकित्सकों और स्टाफ नर्स को निर्देश दिए हैं।
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साथ ही एनएचएम ने सभी जिलों के सामुदायिक और चिकित्सीय इकाई पर स्तनपान के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए ‘मां का पूरा प्यार (एमएए-मदर एब्सल्यूट एफेक्शन)’ कार्यक्रम चलाया है। महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि मां का दूध बच्चे के व्यापक शारीरिक-मानसिक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया व कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी है। मां का पहला दूध बच्चे के लिए पहले टीकाकरण की तरह है।
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जिलों की स्थिति
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) के अनुसार शिशुओं को स्तनपान शुरू कराने में प्रदेश में गोंडा में 13, मेरठ में 14.3, बिजनौर में 14.7, हाथरस में 15.3, शाहजहांपुर में 15.8, बरेली 16.7, श्रावस्ती 18, आगरा में 18.6 और सिद्धार्थ नगर 19 फीसदी के साथ सबसे खराब स्थिति में है। वही, महोबा 42.1, बांदा 41 और ललितपुर 40.2 के साथ सबसे अच्छी स्थिति में हैं।
मां के लिए जरूरी बातें
मां स्वस्थ है तो बच्चे को पिलाने के लिए पर्याप्त दूध बनता है, स्तन के आकार का कोई फर्क नहीं पड़ता, नियमित स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा काफी कमहो जाता है। तबीयत खराब होने पर भी बच्चे को स्तनपान कराया जा सकता है।
मां के लिए जरूरी बातें
मां स्वस्थ है तो बच्चे को पिलाने के लिए पर्याप्त दूध बनता है, स्तन के आकार का कोई फर्क नहीं पड़ता, नियमित स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा काफी कमहो जाता है। तबीयत खराब होने पर भी बच्चे को स्तनपान कराया जा सकता है।