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मौसम ने अचानक बदली करवट, बढ़ी ठिठुरन
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:00 PM IST
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बहराइच। तराई में मौसम निरंतर बदल रहा है। रविवार का दिन भी सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी में बीता। पछुवा हवाएं भी चलीं। सुबह तेज धूप के बाद अचानक बदले मौसम से लोग सिहरने को मजबूर रहे। मौसमविदों की मानें तो बूंदाबांदी की संभावना है। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह प्रभावी न होने के चलते बरसात नहीं हो पा रही है।
तराई का मौसम सुधर नहीं रहा है। रविवार को सुबह मौसम बिल्कुल साफ था। 10 बजे तक तेज धूप निकली हुई थी। उसके बाद हल्का सूरज चमकने पर फिर बादलों के बीच छिप गया। अचानक बदले मौसम के कारण घर से बाहर निकले लोग काफी परेशान हुए। सबसे अधिक दिक्कत मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों को हुई। तेज हवाएं चलने के कारण मौसम में ठिठुरन का अहसास शुरू हो गया था। देखते ही देखते ठंड तेजी से बढ़ने लगी, जो देर शाम तक जारी रही। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि दो दिन से तराई में बादल छाए हुए हैं। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रहा। जिसके चलते मौसम में सुधार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति कुछ मजबूत हुई तो आगामी 24 से 36 घंटे में बूंदाबांदी हो सकती है। ऐसे में आलू और तिलहनी खेती करने वाले किसानों को सजग रहना होगा। उधर, आए दिन मौसम के बदलने से किसान भी परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि तेज बरसात हो गई तो फसलों को नुकसान होगा और उन्हें तगड़ी चपत लगेगी।
माहू का रोग भी कर सकता परेशान
दो दिन से तराई में बदली का मौसम है। ऐसे में तिलहन की फसल माहू की चपेट में आ सकती है। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने कहा कि सरसों के खेत पर किसानों को नजर रखने की जरूरत है। अगर माहू की स्थिति दिखे तो तत्काल कृषि वैज्ञानिक से संपर्क कर उपचार की व्यवस्था करें।
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तराई का मौसम सुधर नहीं रहा है। रविवार को सुबह मौसम बिल्कुल साफ था। 10 बजे तक तेज धूप निकली हुई थी। उसके बाद हल्का सूरज चमकने पर फिर बादलों के बीच छिप गया। अचानक बदले मौसम के कारण घर से बाहर निकले लोग काफी परेशान हुए। सबसे अधिक दिक्कत मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों को हुई। तेज हवाएं चलने के कारण मौसम में ठिठुरन का अहसास शुरू हो गया था। देखते ही देखते ठंड तेजी से बढ़ने लगी, जो देर शाम तक जारी रही। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि दो दिन से तराई में बादल छाए हुए हैं। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रहा। जिसके चलते मौसम में सुधार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति कुछ मजबूत हुई तो आगामी 24 से 36 घंटे में बूंदाबांदी हो सकती है। ऐसे में आलू और तिलहनी खेती करने वाले किसानों को सजग रहना होगा। उधर, आए दिन मौसम के बदलने से किसान भी परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि तेज बरसात हो गई तो फसलों को नुकसान होगा और उन्हें तगड़ी चपत लगेगी।
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माहू का रोग भी कर सकता परेशान
दो दिन से तराई में बदली का मौसम है। ऐसे में तिलहन की फसल माहू की चपेट में आ सकती है। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने कहा कि सरसों के खेत पर किसानों को नजर रखने की जरूरत है। अगर माहू की स्थिति दिखे तो तत्काल कृषि वैज्ञानिक से संपर्क कर उपचार की व्यवस्था करें।
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