वकीलों के उपद्रव की वजह से चली गई दो की जान
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वकील निखिलेंद्र गुप्ता की हत्या के विरोध में बृहस्पतिवार को सड़क पर उतरे वकीलों ने राजधानी की रफ्तार थामी तो दो मरीजों की सांस भी हमेशा के लिए थम गई। एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर ले जाए जा रहे फैजाबाद के रमई और उन्नाव की पूनम समय रहते अस्पताल नहीं पहुंच सके, जिससे उनकी मौत हो गई। स्थिति यह रही कि मरीज से लेकर आम लोग भूखे-प्यासे पांच घंटे से ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहे।
फैजाबाद के राधे अपने पिता रमई (65) को एंबुलेंस से लेकर बृहस्पतिवार को राजधानी पहुंचे तो दोपहर 12 बजे नेशनल कॉलेज के सामने जाम में फंस गए। सांस की दिक्कत के चलते केजीएमयू में उनका इलाज चल रहा था। एंबुलेंस में ऑक्सीजन के सहारे उनकी सांस चल रही थी। डेढ़ बजे किसी तरह ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें ब्रॉट डेड घोषित कर दिया।
रोते हुए राधे ने कहा कि समय से ट्रॉमा पहुंच जाते तो पिता की जान बच जाती। वहीं, उन्नाव की पूनम (45) को सीने में तेज दर्द हुआ तो घरवाले निजी एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर के लिए निकले, लेकिन दोपहर एक बजे हजरतगंज चौराहे पर जाम में फंस गए।
इस बीच, पूनम की हालत बिगड़ती गई और वो बेहोश हो गईं। दो घंटे तक जाम से जूझते हुए ट्रॉमा पहुंचे तो नाक से खून बहने लगा। डॉक्टरों की टीम ने एंबुलेंस में ही इलाज शुरू किया लेकिन बचा नहीं सके।
रास्ते में फंसे, कार में ही प्रसव
वकीलों के बवाल के चलते सीतापुर के रहने वाले अशोक कुमार की पत्नी रानी की जान पर बन आई। वह एक कार से प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही थीं। जाम की वजह से उनकी कार समय से अस्तपाल नहीं पहुंच पाई। प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिवारजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए। हालत और गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें क्वीन मैरी अस्तपाल में रेफर किया। उनके परिवारजन उन्हें कार से क्वीन मैरी अस्पताल के लिए निकले।
वह गोमती नगर से निकले लेकिन डालीगंज पुल तक पहुंचते-पहुंचते उन्हें 2 घंटे से अधिक लग गए। इस बीच रानी की प्रसव पीड़ा बढ गई। आखिरकार करीब ढाई बजे रानी ने डालीगंज पुल के पास कार में ही बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद जाम खुला और परिवारजन रानी को लेकर करीब तीन बजे मैरी क्वीन अस्पताल पहुंचे। गनीमत यह रही कि मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं।