{"_id":"5ad23bbb4f1c1b9b098b4908","slug":"191523727291-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब जिला अस्पताल में ही होगी डेंगू व चिकनगुनिया की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब जिला अस्पताल में ही होगी डेंगू व चिकनगुनिया की जांच
Updated Sat, 14 Apr 2018 11:04 PM IST
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फैजाबाद। जिले की 29 लाख आबादी को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में एक और ठोस पहल की जा रही है। डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए जिला अस्पताल में 24 लाख की लागत से सेंटीनल लैब की स्थापना की जा रही है। जल्द ही इसका शुभारंभ हो जाएगा। इसके बाद डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए जिले के मरीजों को लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
मौसम के लगातार शुष्क होते ही डेंगू, चिकनगुनिया व जेई सहित अनेक संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ने लगा है, जिससे मजबूती से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। अब डेंगू, चिकनगुनिया व जापानी बुखार से पीड़ित मरीजों को जांच के नाम पर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। डेंगू व चिकनगुनिया की जांच के लिए करीब 24 लाख की लागत से जिला अस्पताल के निदान केंद्र में सेंटीनल लैब की स्थापना की जा रही है। शासन से हरी झंडी मिलते ही इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। बीते दिनों करीब सात लाख रुपये की लागत से मशीनें भी लग चुकी हैं। शीघ्र ही किट व जरूरी सामान के पहुंचते ही इसका शुभारंभ हो जाएगा।
अभी तक लखनऊ में होती थी जांच
अभी तक जिले में डेंगू, चिकनगुनिया की सिर्फ मामूली जांच ही होती थी। बीते सत्र में ही डेंगू से प्रभावित 750 मरीज, जेई के 110 व चिकनगुनिया के करीब सौ मरीज निदान केंद्र में जांच करा चुके हैं। इसके अलावा प्रति माह मलेरिया के करीब 550 मरीज आते हैं। इन मरीजों की कार्ड से सिर्फ पॉजीटिव या निगेटिव होने की जानकारी ही मिल पाती थी। डेंगू, चिकनगुनिया किस स्टेप पर है या मरीज इसकी चपेट में कितने प्रतिशत आ चुका है, इसकी सटीक जांच के लिए यहां कोई सुविधा नहीं थी। इसके लिए मरीज के रक्त का नमूना लेकर मेडिकल कॉलेज लखनऊ स्थित लैब में भेजना ही एकमात्र विकल्प होता था। वहां से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने में करीब एक सप्ताह लग जाता था। जिससे मरीज के इलाज में काफी देरी होती थी। इसी फेर में गंभीर मरीजों की स्थिति भी दयनीय हो जाती थी। वहीं निजी पैथोलॉजी व नर्सिंग होम में इसका मूल्य करीब पंद्रह सौ रुपये तक है। ऐसे में मरीजों को बड़ी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था।
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इस बार प्रकोप बढ़ने की संभावना
वर्ष 2016 में डेंगू और चिकनगुनिया के अधिक रोगी जिले में पाए गए थे। जबकि 2017 में इस पर प्रभावी नियंत्रण था और बहुत कम लोग ही इसकी चपेट में आए थे। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. नानक सरन ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप एक-एक वर्ष के अंतराल पर अधिक होता है। इसलिए माना जा रहा है कि मौजूदा सत्र में डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप फैलने की संभावना है। जिस पर अंकुश लगाने की सेंटीनल लैब की स्थापना विभाग की सराहनीय पहल है।
पांच लाख तक की लागत के सामानों की हुई खरीद
लैब टेकभनीशियन संदीप सिंह ने बताया कि सेंटीनल लैब की स्थापना के लिए शासन की ओर से करीब 24 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। इसके लिए ऐलाइजा किट, ऐलाइजा वाशर, माइक्रोस्कोप, इन्क्यूवेटर, वायोसेफ्टी केविनेट, डीप फ्रीजर सहित 14 सामानों का अलग-अलग अधिकतम मूल्य भी शासन की ओर से ही तय किया गया है। जिला अस्पताल प्रबंधन को सिर्फ पांच लाख तक के सामानों के क्रय करने की छूट दी गई थी। जिसके अनुपालन में 11 उपकरणों की खरीद हो चुकी है। अब करीब नौ लाख की लागत से डीप फ्रीजर, व 5 लाख 35 हजार की वायोसेफ्टी केविनेट और वाटर बॉथ आना शेष है। जिसके लिए शासन से दो बार पत्राचार किया जा चुका है। प्राप्त होते ही इसका संचालन हो जाएगा और मरीजों व कर्मचारियों को भी काफी सहूलियत मिलेगी।
अब तक सेंटीनल लैब के अभाव में डेंगू और चिकनगुनिया व जेई की जांच में काफी दिक्कतें आती थीं। लेकिन शासन के निर्देश पर 24 लाख की लागत से लैब स्थापित की जा रही है। कुछ जरूरी उपकरण प्राप्त होते ही इसका शुभारंभ हो जाएगा।
- डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल फैजाबाद
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मौसम के लगातार शुष्क होते ही डेंगू, चिकनगुनिया व जेई सहित अनेक संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ने लगा है, जिससे मजबूती से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। अब डेंगू, चिकनगुनिया व जापानी बुखार से पीड़ित मरीजों को जांच के नाम पर लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। डेंगू व चिकनगुनिया की जांच के लिए करीब 24 लाख की लागत से जिला अस्पताल के निदान केंद्र में सेंटीनल लैब की स्थापना की जा रही है। शासन से हरी झंडी मिलते ही इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। बीते दिनों करीब सात लाख रुपये की लागत से मशीनें भी लग चुकी हैं। शीघ्र ही किट व जरूरी सामान के पहुंचते ही इसका शुभारंभ हो जाएगा।
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अभी तक लखनऊ में होती थी जांच
अभी तक जिले में डेंगू, चिकनगुनिया की सिर्फ मामूली जांच ही होती थी। बीते सत्र में ही डेंगू से प्रभावित 750 मरीज, जेई के 110 व चिकनगुनिया के करीब सौ मरीज निदान केंद्र में जांच करा चुके हैं। इसके अलावा प्रति माह मलेरिया के करीब 550 मरीज आते हैं। इन मरीजों की कार्ड से सिर्फ पॉजीटिव या निगेटिव होने की जानकारी ही मिल पाती थी। डेंगू, चिकनगुनिया किस स्टेप पर है या मरीज इसकी चपेट में कितने प्रतिशत आ चुका है, इसकी सटीक जांच के लिए यहां कोई सुविधा नहीं थी। इसके लिए मरीज के रक्त का नमूना लेकर मेडिकल कॉलेज लखनऊ स्थित लैब में भेजना ही एकमात्र विकल्प होता था। वहां से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने में करीब एक सप्ताह लग जाता था। जिससे मरीज के इलाज में काफी देरी होती थी। इसी फेर में गंभीर मरीजों की स्थिति भी दयनीय हो जाती थी। वहीं निजी पैथोलॉजी व नर्सिंग होम में इसका मूल्य करीब पंद्रह सौ रुपये तक है। ऐसे में मरीजों को बड़ी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता था।
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इस बार प्रकोप बढ़ने की संभावना
वर्ष 2016 में डेंगू और चिकनगुनिया के अधिक रोगी जिले में पाए गए थे। जबकि 2017 में इस पर प्रभावी नियंत्रण था और बहुत कम लोग ही इसकी चपेट में आए थे। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. नानक सरन ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप एक-एक वर्ष के अंतराल पर अधिक होता है। इसलिए माना जा रहा है कि मौजूदा सत्र में डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप फैलने की संभावना है। जिस पर अंकुश लगाने की सेंटीनल लैब की स्थापना विभाग की सराहनीय पहल है।
पांच लाख तक की लागत के सामानों की हुई खरीद
लैब टेकभनीशियन संदीप सिंह ने बताया कि सेंटीनल लैब की स्थापना के लिए शासन की ओर से करीब 24 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। इसके लिए ऐलाइजा किट, ऐलाइजा वाशर, माइक्रोस्कोप, इन्क्यूवेटर, वायोसेफ्टी केविनेट, डीप फ्रीजर सहित 14 सामानों का अलग-अलग अधिकतम मूल्य भी शासन की ओर से ही तय किया गया है। जिला अस्पताल प्रबंधन को सिर्फ पांच लाख तक के सामानों के क्रय करने की छूट दी गई थी। जिसके अनुपालन में 11 उपकरणों की खरीद हो चुकी है। अब करीब नौ लाख की लागत से डीप फ्रीजर, व 5 लाख 35 हजार की वायोसेफ्टी केविनेट और वाटर बॉथ आना शेष है। जिसके लिए शासन से दो बार पत्राचार किया जा चुका है। प्राप्त होते ही इसका संचालन हो जाएगा और मरीजों व कर्मचारियों को भी काफी सहूलियत मिलेगी।
अब तक सेंटीनल लैब के अभाव में डेंगू और चिकनगुनिया व जेई की जांच में काफी दिक्कतें आती थीं। लेकिन शासन के निर्देश पर 24 लाख की लागत से लैब स्थापित की जा रही है। कुछ जरूरी उपकरण प्राप्त होते ही इसका शुभारंभ हो जाएगा।
- डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल फैजाबाद