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स्थानीय स्तर पर ही निपटाएं जनसूचना के मामले
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:02 AM IST
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बाराबंकी। जनसूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी सूचना अधिकार संबंधित अपना दायित्व पूरी जिम्मेदारी से निभाएं तथा स्थानीय स्तर पर ही अधिकांश मामले निस्तारित करें।
यह बातें बुधवार को राज्य सूचना आयुक्त स्वदेश कुमार ने डीआरडीए गांधी सभागार में जनसूचना अधिकारियों, प्रथम अपीलीय अधिकारियों को उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के प्राविधानों के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान कहीं। प्रशिक्षण में जिले के 103 व मंडल के 65 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान आयुक्त ने अधिकारियों को बताया कि सूचना अधिकार के अंतर्गत आवेदक का आपको हर हाल में सूचना देनी ही है, जो निश्चित अवधि में नियमानुसार होेनी चाहिए। सूचना देने का समय 30 दिन अथवा एक माह है। यदि सूचना किसी कारणवश उपलब्ध नहीं करायी जा सकती हो तो आवेदन की प्राप्ति से पांच दिवस के भीतर संबंधित नियम एवं कारण सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने प्रशिक्षण में बताया कि बीपीएल संबंधी प्रमाण पत्र लगाने पर बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को सूचना नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यदि सादे कागज पर भी कोई सुनिश्चित प्रारूप में आवेदन करता है तो आवेदक का नाम, पत्राचार का पता व हस्ताक्षर शामिल हो तो सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं को उपलब्ध कराने में जनसूचना अधिकारी जिम्मेदारी से अपना दायित्व निभाते हुए स्थानीय स्तर पर मामले को निस्तारित करें। यदि किसी प्रकार की कोई दिक्कत हो तो प्रथम अपीलीय अधिकारी भी आयोग की तरह प्रकरण को निस्तारित करें। प्रशिक्षण में बताया गया कि जिले में 421 मामले जनसूचना अधिकार के लंबित हैं। इस मौके पर डीएम अखिलेश तिवारी, सीडीओ अंजनी कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह, एडीएम अनिल सिंह, सीएमओ आदि मौजूद रहे।
आयोग में लंबित हैं प्रदेश की 40 हजार शिकायतें
प्रदेश की करीब 40 हजार जनसूचना की शिकायतें आयोग में लंबित पड़ी हैं। यह सभी शिकायतें एक वर्ष की है। हालांकि शिकायतों के निस्तारण के मामले में कमी भी आई है। यह बातें राज्य सूचना आयुक्त स्वेदश कुमार ने प्रशिक्षण के बाद हुई प्रेसवार्ता में पत्रकारों से कहीं। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय सीमा में अगर जनसूचना अधिकारी, अपीलीय अधिकारी प्रथम द्वारा सूचना नहीं दी जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई का भी प्राविधान है। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत आठ, नौ व 24तथा नियमावली 2015 के नियम चार को छोड़ किसी भी अन्य मामलों में सूचना देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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यह बातें बुधवार को राज्य सूचना आयुक्त स्वदेश कुमार ने डीआरडीए गांधी सभागार में जनसूचना अधिकारियों, प्रथम अपीलीय अधिकारियों को उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के प्राविधानों के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान कहीं। प्रशिक्षण में जिले के 103 व मंडल के 65 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान आयुक्त ने अधिकारियों को बताया कि सूचना अधिकार के अंतर्गत आवेदक का आपको हर हाल में सूचना देनी ही है, जो निश्चित अवधि में नियमानुसार होेनी चाहिए। सूचना देने का समय 30 दिन अथवा एक माह है। यदि सूचना किसी कारणवश उपलब्ध नहीं करायी जा सकती हो तो आवेदन की प्राप्ति से पांच दिवस के भीतर संबंधित नियम एवं कारण सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने प्रशिक्षण में बताया कि बीपीएल संबंधी प्रमाण पत्र लगाने पर बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को सूचना नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यदि सादे कागज पर भी कोई सुनिश्चित प्रारूप में आवेदन करता है तो आवेदक का नाम, पत्राचार का पता व हस्ताक्षर शामिल हो तो सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचनाओं को उपलब्ध कराने में जनसूचना अधिकारी जिम्मेदारी से अपना दायित्व निभाते हुए स्थानीय स्तर पर मामले को निस्तारित करें। यदि किसी प्रकार की कोई दिक्कत हो तो प्रथम अपीलीय अधिकारी भी आयोग की तरह प्रकरण को निस्तारित करें। प्रशिक्षण में बताया गया कि जिले में 421 मामले जनसूचना अधिकार के लंबित हैं। इस मौके पर डीएम अखिलेश तिवारी, सीडीओ अंजनी कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह, एडीएम अनिल सिंह, सीएमओ आदि मौजूद रहे।
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आयोग में लंबित हैं प्रदेश की 40 हजार शिकायतें
प्रदेश की करीब 40 हजार जनसूचना की शिकायतें आयोग में लंबित पड़ी हैं। यह सभी शिकायतें एक वर्ष की है। हालांकि शिकायतों के निस्तारण के मामले में कमी भी आई है। यह बातें राज्य सूचना आयुक्त स्वेदश कुमार ने प्रशिक्षण के बाद हुई प्रेसवार्ता में पत्रकारों से कहीं। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय सीमा में अगर जनसूचना अधिकारी, अपीलीय अधिकारी प्रथम द्वारा सूचना नहीं दी जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई का भी प्राविधान है। उन्होंने बताया कि एक्ट के तहत आठ, नौ व 24तथा नियमावली 2015 के नियम चार को छोड़ किसी भी अन्य मामलों में सूचना देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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