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हर महीने मिल रहे सात एचआईवी संक्रमित
Updated Tue, 22 May 2018 10:48 PM IST
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बहराइच। परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण हो और लल्ला को ऊंची तालीम मिले, ये सोचकर घर से निकले थे। लेकिन बड़े शहरों की चकाचौंध व बेरोजगारी के तनाव ने इस कदर घेरा कि जाने-अनजाने में लाइलाज एचआईवी से संक्रमित हो गए। परदेश से कमाकर जनवरी से अब तक घर लौटे तराई के 87 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है।
दो फीसदी ऐसी गर्भवती महिलाएं भी है, जो अनजाने में एचआईवी संक्रमण के चंगुल आ गई हैं। इसका खुलासा जिला अस्पताल स्थित आईसीटीसी सेंटर की जांच से हुआ है। औसतन हर माह जिले में सात लोग एचआईवी संक्रमित मिल रहे हैं। तराई में एड्स से बढ़ रहे मामलों से जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग की तमाम प्रयासों के बावजूद तराई में एचआईवी पॉजिटिव रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीके टंडन कहते हैं कि इंटीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में प्रतिमाह औसतन 300-400 लोगों की जांच की जाती है।
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जिनमें औसतन सात लोग एचआईवी पॉजिटिव मिल रहे हैं। पिछले वर्ष यह आंकड़ा पांच था। जनवरी 2018 से मई तक 87 लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। आईसीटीसी सेंटर के सूत्र बताते हैं कि 3 से 4 सौ गर्भवती महिलाओं की जांच में 6 महिलाएं ऐसी मिली हैं जो एचआईवी पॉजिटिव पायी गई हैं।
14 ब्लॉकों के सौ गांव प्रभावित, छह डैंजर जोन में
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की तरफ से बहराइच के 14 ब्लॉकों के सौ गांवों को एचआईवी संक्रमण से प्रभावित माना गया है। इन गांवों की आबादी 3 लाख 52 हजार के करीब है, जिनमें से 41 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। कैसरगंज, जरवल, तेजवापुर, चित्तौरा, पयागपुर व विशेरगंज को डैंजर जोन में शामिल किया है।
हाई रिस्क ग्रुप पर विशेष नजर
सीएमएस ने बताया कि चिह्नित सौ गांवों में हाई रिस्क ग्रुप बनाया गया है, जिनमें सेक्स वर्करों को शामिल किया गया है। इन लोगों में एचआईवी संक्रमण फैलने की आशंका सबसे अधिक होती है, इसलिए इन पर खास ध्यान रखा जाता है। हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों को समय-समय पर एड्स के प्रति जागरूक करते हुए सावधानी बरतने के टिप्स सुझाए जाते हैं।
जिला अस्पताल में होती जांच
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टंडन बताते हैं कि वर्ष 2001 में जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर की स्थापना की गई थी। श्रावस्ती व बहराइच के संदिग्ध एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जांच की जाती है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संक्रमित व्यक्ति को नोडल कार्यालय डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ भेज दिया जाता है।
साल-दर-साल बढ़ रहे रोगी
वर्ष रोगी
2007 30
2008 41
2009 34
2010 82
2011 61
2012 67
2013 130
2014 170
2015 143
2016 126
2017 168
नोट : आंकड़े 21 मई 2018 तक के हैं।
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दो फीसदी ऐसी गर्भवती महिलाएं भी है, जो अनजाने में एचआईवी संक्रमण के चंगुल आ गई हैं। इसका खुलासा जिला अस्पताल स्थित आईसीटीसी सेंटर की जांच से हुआ है। औसतन हर माह जिले में सात लोग एचआईवी संक्रमित मिल रहे हैं। तराई में एड्स से बढ़ रहे मामलों से जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं।
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उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग की तमाम प्रयासों के बावजूद तराई में एचआईवी पॉजिटिव रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीके टंडन कहते हैं कि इंटीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में प्रतिमाह औसतन 300-400 लोगों की जांच की जाती है।
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जिनमें औसतन सात लोग एचआईवी पॉजिटिव मिल रहे हैं। पिछले वर्ष यह आंकड़ा पांच था। जनवरी 2018 से मई तक 87 लोग एचआईवी संक्रमित पाए गए हैं। आईसीटीसी सेंटर के सूत्र बताते हैं कि 3 से 4 सौ गर्भवती महिलाओं की जांच में 6 महिलाएं ऐसी मिली हैं जो एचआईवी पॉजिटिव पायी गई हैं।
14 ब्लॉकों के सौ गांव प्रभावित, छह डैंजर जोन में
उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की तरफ से बहराइच के 14 ब्लॉकों के सौ गांवों को एचआईवी संक्रमण से प्रभावित माना गया है। इन गांवों की आबादी 3 लाख 52 हजार के करीब है, जिनमें से 41 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। कैसरगंज, जरवल, तेजवापुर, चित्तौरा, पयागपुर व विशेरगंज को डैंजर जोन में शामिल किया है।
हाई रिस्क ग्रुप पर विशेष नजर
सीएमएस ने बताया कि चिह्नित सौ गांवों में हाई रिस्क ग्रुप बनाया गया है, जिनमें सेक्स वर्करों को शामिल किया गया है। इन लोगों में एचआईवी संक्रमण फैलने की आशंका सबसे अधिक होती है, इसलिए इन पर खास ध्यान रखा जाता है। हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों को समय-समय पर एड्स के प्रति जागरूक करते हुए सावधानी बरतने के टिप्स सुझाए जाते हैं।
जिला अस्पताल में होती जांच
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टंडन बताते हैं कि वर्ष 2001 में जिला अस्पताल में आईसीटीसी सेंटर की स्थापना की गई थी। श्रावस्ती व बहराइच के संदिग्ध एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जांच की जाती है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संक्रमित व्यक्ति को नोडल कार्यालय डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ भेज दिया जाता है।
साल-दर-साल बढ़ रहे रोगी
वर्ष रोगी
2007 30
2008 41
2009 34
2010 82
2011 61
2012 67
2013 130
2014 170
2015 143
2016 126
2017 168
नोट : आंकड़े 21 मई 2018 तक के हैं।