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कटान पीड़ित परिवारों को तटबंध खाली करने का नोटिस
Updated Wed, 17 Jan 2018 10:01 PM IST
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जरवलरोड (बहराइच)। आदमपुर रेवली तटबंध पर झोपड़ी बनाकर रह रहे 130 बाढ़ व कटान पीड़ित परिवारों को बाढ़ खंड गोंडा की ओर से नोटिस जारी हुआ है।
सभी को पखवारे भर में तटबंध खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में तटबंध न खाली करने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की चेतावनी दी गई है।
ग्रामीण बेबस हैं। सभी का कहना है कि आशियाना कहां बनाएंगे, जिला प्रशासन की ओर से पुनर्वास की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
जरवल विकासखंड अंतर्गत अहाता, नियामतपुर प्रथम व द्वितीय, आदमपुर आंशिक, खासेपुर, नासिरगंज, बहरामपुर समेत 10 गांव का अस्तित्व बीते आठ वर्षों में खत्म हो चुका है।
इसके बाद ग्रामीण पलायन कर गए। कुछ ने घाघरा नदी से दूर शरण ली तो कुछ अब भी आदमपुर रेवली तटबंध पर झोपड़ी बनाकर गुजर बसर कर रहे हैं। 12.5 किलोमीटर लंबे इस तटबंध पर इस समय लगभग 150 परिवारों की झोपड़ियां बनी हुई हैं।
इनमें से 130 परिवारों को बाढ़ खंड गोंडा की ओर से नोटिस जारी हुआ है। अधिशासी अभियंता की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि ग्रामीणों की झोपड़ी बने होने के कारण तटबंध जर्जर हो रहा है। उसकी सुरक्षा के लिए झोपड़ियां हटाना अनिवार्य है। इस मामले में सभी के घर नोटिस का तामीला करवाया गया है।
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पहले घाघरा मइया ने उजाड़ा, अब अधिकारी कर रहे परेशान
तटबंध पर झोपड़ी बनाकर रह रही 90 वर्षीय कलावती ने कहा कि दो दिन पूर्व अधिकारी आए थे। नोटिस दे गए हैं। 15 दिन में झोपड़ी हटाने को कहा है। घर में और कोई नहीं है। क्या करें, समझ नहीं पा रहे हैं।
80 वर्षीय काली व वृद्ध जगदीश का कहना है कि घाघरा मइया ने सब कुछ पहले ही छीन लिया है, अब तक अधिकारियों ने कोई सहायता नहीं की। अब बाढ़ विभाग की ओर से जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। कुंतलाल व मनोहर ने कहा कि आंदोलन का ही सहारा बचा है।
तटबंध पर रहने की अनुमति नहीं
तटबंध पर लोगों के रहने के कारण वह जर्जर हो गया है। इसके कारण बरसात में सीपेज की स्थिति बनती है। कई बार घाघरा की लहरों से तटबंध के कटने की नौबत उत्पन्न हो चुकी है।
इसी के कारण ग्रामीणों को झोपड़ी हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। झोपड़ी न हटाने पर सभी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
-बीएन शुक्ला, मुख्य अभियंता, बाढ़ खंड गोंडा
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सभी को पखवारे भर में तटबंध खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में तटबंध न खाली करने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की चेतावनी दी गई है।
ग्रामीण बेबस हैं। सभी का कहना है कि आशियाना कहां बनाएंगे, जिला प्रशासन की ओर से पुनर्वास की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
जरवल विकासखंड अंतर्गत अहाता, नियामतपुर प्रथम व द्वितीय, आदमपुर आंशिक, खासेपुर, नासिरगंज, बहरामपुर समेत 10 गांव का अस्तित्व बीते आठ वर्षों में खत्म हो चुका है।
इसके बाद ग्रामीण पलायन कर गए। कुछ ने घाघरा नदी से दूर शरण ली तो कुछ अब भी आदमपुर रेवली तटबंध पर झोपड़ी बनाकर गुजर बसर कर रहे हैं। 12.5 किलोमीटर लंबे इस तटबंध पर इस समय लगभग 150 परिवारों की झोपड़ियां बनी हुई हैं।
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इनमें से 130 परिवारों को बाढ़ खंड गोंडा की ओर से नोटिस जारी हुआ है। अधिशासी अभियंता की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि ग्रामीणों की झोपड़ी बने होने के कारण तटबंध जर्जर हो रहा है। उसकी सुरक्षा के लिए झोपड़ियां हटाना अनिवार्य है। इस मामले में सभी के घर नोटिस का तामीला करवाया गया है।
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पहले घाघरा मइया ने उजाड़ा, अब अधिकारी कर रहे परेशान
तटबंध पर झोपड़ी बनाकर रह रही 90 वर्षीय कलावती ने कहा कि दो दिन पूर्व अधिकारी आए थे। नोटिस दे गए हैं। 15 दिन में झोपड़ी हटाने को कहा है। घर में और कोई नहीं है। क्या करें, समझ नहीं पा रहे हैं।
80 वर्षीय काली व वृद्ध जगदीश का कहना है कि घाघरा मइया ने सब कुछ पहले ही छीन लिया है, अब तक अधिकारियों ने कोई सहायता नहीं की। अब बाढ़ विभाग की ओर से जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। कुंतलाल व मनोहर ने कहा कि आंदोलन का ही सहारा बचा है।
तटबंध पर रहने की अनुमति नहीं
तटबंध पर लोगों के रहने के कारण वह जर्जर हो गया है। इसके कारण बरसात में सीपेज की स्थिति बनती है। कई बार घाघरा की लहरों से तटबंध के कटने की नौबत उत्पन्न हो चुकी है।
इसी के कारण ग्रामीणों को झोपड़ी हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। झोपड़ी न हटाने पर सभी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
-बीएन शुक्ला, मुख्य अभियंता, बाढ़ खंड गोंडा