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केजीएमयू में 16वां सफल लिवर प्रत्यारोपण
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केजीएमयू में लिवर प्रत्यारोपण के बाद शनिवार को 49 वर्षीय महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 11 जून को महिला को लिवर प्रत्यारोपित किया गया था। यह केजीएमयू का 16वां सफल प्रत्यारोपण है। संस्थान के सौ से अधिक डॉक्टर और स्टाफ की टीम इस प्रत्यारोपण में शामिल हुई। केजीएमयू कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने महिला से मिलकर उसे शुभकामनाएं दीं।
10 जून को रायबरेली रोड स्थित आश्रय कॉलोनी निवासी 49 वर्षीय प्रदीप कुमार विश्वकर्मा को ब्रेन डेड होने के बाद केजीएमयू लाया गया था। विभिन्न जांचों के बाद प्रत्यारोपण के लिए उनका लिवर नोएडा निवासी महिला से मैच कर गया था। डॉक्टरों ने केजीएमयू में तुरंत ही लिवर प्रत्यारोपित किया। इसकेबाद मरीज को ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद शनिवार को डॉक्टरों ने उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी। इस टीम में केजीएमयू से डॉ. बिपिन पुरी, डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. सुमित रुंगटा, डॉ. तुलिका चंद्रा आदि शामिल हुए थे।
देश में हर साल सिर्फ दो हजार लिवर प्रत्यारोपण
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि देश में इस समय करीब दो लाख लोग लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं। इसकी वजह शराब, डायबिटीज, वायरल इंफेक्शन या इम्यून डिस्ऑर्डर होता है। इनमें से काफी लोगों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन देश भर में सिर्फ दो हजार लोगों को ही प्रत्यारोपण की सुविधा मिल पाती है। अभी भी केवल 0.01 प्रतिशत लोग ही अंगदान करते हैं। वहीं अंगदान के 99 फीसदी मामले ब्रेन डेड मरीजों के होते हैं। लिवर प्रत्यारोपण के लिए निजी अस्पतालों की लागत करीब 30 से 35 लाख रुपये है। वहीं दूसरी ओर केजीएमयू में सरकारी मदद और अन्य योजनाओं की वजह से महज तीन से पांच लाख रुपये में ही प्रत्यारोपण हो जाता है। केजीएमयू में यह 16वां प्रत्यारोपण है। अब तक केजीएमयू में प्रत्यारोपण की सफलता का प्रतिशत 90 रहा है।
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10 जून को रायबरेली रोड स्थित आश्रय कॉलोनी निवासी 49 वर्षीय प्रदीप कुमार विश्वकर्मा को ब्रेन डेड होने के बाद केजीएमयू लाया गया था। विभिन्न जांचों के बाद प्रत्यारोपण के लिए उनका लिवर नोएडा निवासी महिला से मैच कर गया था। डॉक्टरों ने केजीएमयू में तुरंत ही लिवर प्रत्यारोपित किया। इसकेबाद मरीज को ऑब्जर्वेशन में रखा गया था। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद शनिवार को डॉक्टरों ने उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी। इस टीम में केजीएमयू से डॉ. बिपिन पुरी, डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. अविनाश अग्रवाल, डॉ. सुमित रुंगटा, डॉ. तुलिका चंद्रा आदि शामिल हुए थे।
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देश में हर साल सिर्फ दो हजार लिवर प्रत्यारोपण
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि देश में इस समय करीब दो लाख लोग लिवर सिरोसिस से पीड़ित हैं। इसकी वजह शराब, डायबिटीज, वायरल इंफेक्शन या इम्यून डिस्ऑर्डर होता है। इनमें से काफी लोगों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन देश भर में सिर्फ दो हजार लोगों को ही प्रत्यारोपण की सुविधा मिल पाती है। अभी भी केवल 0.01 प्रतिशत लोग ही अंगदान करते हैं। वहीं अंगदान के 99 फीसदी मामले ब्रेन डेड मरीजों के होते हैं। लिवर प्रत्यारोपण के लिए निजी अस्पतालों की लागत करीब 30 से 35 लाख रुपये है। वहीं दूसरी ओर केजीएमयू में सरकारी मदद और अन्य योजनाओं की वजह से महज तीन से पांच लाख रुपये में ही प्रत्यारोपण हो जाता है। केजीएमयू में यह 16वां प्रत्यारोपण है। अब तक केजीएमयू में प्रत्यारोपण की सफलता का प्रतिशत 90 रहा है।
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