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ओवरटेक करने के चक् कर में बेकाबू हुई कार, चार की मौत
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर-आजमगढ़ मुख्य मार्ग पर मंगलवार सुबह डंपर को ओवरटेक करने में अनियंत्रित हुई तेज रफ्तार कार सड़क किनारे अवैध ढंग से लगे एक भट्ठे के ईंटों के टीले से जा टकराई। इससे कार चालक समेत उसमें सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे में जान गंवाने वाले सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन लक्ष्मीकांत उपाध्याय अपनी पत्नी का इलाज कराने राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर जा रहे थे। कार में उनका एक रिश्तेदार भी था, जो हादसे का शिकार हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई।
कार में मौजूद सभी चार लोग मौके पर ही दम तोड़ चुके थे, फिर भी कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कार से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
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जानकारी के अनुसार सम्मनपुर थाना क्षेत्र के बड़ेपुर निवासी सेवानिवृत्त सैन्य कैप्टन लक्ष्मीकांत उपाध्याय (70) मंगलवार को पत्नी कांती देवी (62) का इलाज कराने राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर कार से जा रहे थे। कार ग्राम पंचायत के ही डिहवा पुरवे के निवासी रामराज (56) चला रहा था, जबकि कांती के भाई का लड़का अरविंद (35) निवासी खुटहन जनपद जौनपुर भी कार में मौजूद था।
बताया जाता है कि तेज रफ्तार कार जब अकबरपुर-आजमगढ़ मार्ग पर सम्मनपुर थाना क्षेत्र के पलई रामनगर के निकट खपुरा पहुंची थी कि तभी आगे जा रहे एक डंपर को ओवरटेक करने के दौरान कार अनियंत्रित हो गई। इसके बाद कार सड़क के ठीक किनारे अवैध ढंग से एक भट्ठे द्वारा लगाए गए ईंट के टीले से जा टकराई।
कार की रफ्तार इतनी तेज थी उसके परखच्चे उड़ गए। कार चालक समेत उसमें बैठे सभी लोग बेसुध हो गए। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। आननफानन में स्थानीय लोग एकत्र हुए। किसी तरह कार में पीछे मौजूद महिला को तो निकाल लिया गया, लेकिन अन्य तीनों लोग कार में फंसे रहे।
बड़ी तादाद में एकत्र लोगों ने कार का शीशा तोड़ने के साथ ही बेलचक व अन्य औजारों की मदद से कार का गेट आदि तोड़कर अन्य तीनों को भी बाहर निकाला। हालांकि कार सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसी बीच सम्मनपुर थाना प्रभारी प्रदीप सिंह के अलावा अकबरपुर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। चारों कार सवारों को जिला अस्पताल भिजवाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
बाद में चालक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला। हृदय विदारक इस घटना को देख हर कोई द्रवित हो उठा। स्थानीय लोगों, भट्ठे के मजदूरों तथा राहगीरों व अन्य यात्रियों तक ने हादसे के बाद कार में फंसे बेसुध लोगों को बाहर निकालने में मदद की।
जल्द से जल्द बेसुध हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए चीख पुकार का माहौल दिखा। चूंकि कार सवार लोगों के परिवार के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसलिए जिला अस्पताल भेजे जाने के बाद कई स्थानीय लोग भी जिला अस्पताल तक गए।
हादसे से पहले बाइक को मारी थी टक्कर
ईंट के टीले में टकराने से पहले कार ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। इससे वह घायल हो गया। बताया जाता है कि सम्मनपुर थाना क्षेत्र के ही कहरा सुलेमपुर का रहने वाला अभिषेक (24) पुत्र श्यामलाल मंगलवार सुबह बाइक से गांव जा रहा था। इसी बीच अकबरपुर की तरफ जा रही एक कार ने उसे टक्कर मार दी।
इसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी के बाद चालक ने कार की स्पीड बढ़ा दी। लगभग एक किलोमीटर आगे आने के बाद वह भट्ठे के निकट हादसे का शिकार हो गया। घायल युवक ने बताया कि उसे टक्कर मारने के बाद कार आगे जाकर दुर्घटना ग्रस्त हुई है। हालांकि युवक ने इस बारे में कोई केस दर्ज नहीं कराया है।
काश भट्ठा संचालक ने हटा ली होती ईंट
अकबरपुर-आजमगढ़ मार्ग पर पलई कल्यानपुर के निकट सड़क हादसे में चार लोगों की जान बचाई जा सकती थी, यदि लोक निर्माण विभाग की नोटिस के बाद भट्ठा संचालक ने मौके से ईंटों का चट्टा हटा लिया होता तो। दरअसल पलई कल्यानपुर के निकट आदीपुर स्थित भट्ठे के पास सड़क थोड़ी घुमावदार है। यहां पलई- कल्यानपुर निवासी रामनेवल वर्मा ने भट्ठा लगा रखा है।
इसे लेकर बीते दिनों लोक निर्माण विभाग ने उसे नोटिस जारी कर ईंटों का अवैध ढंग से लगाया गया चट्टा हटाने का निर्देश दिया था। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियन्ता ने बीते 22 अप्रैल को नोटिस जारी की थी। इसमें कहा गया था कि मौखिक निर्देश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। ऐसे में नोटिस दी जा रही है।
अवैध चट्टे से पहले भी जा चुकी जान
सड़क के ठीक किनारे लोक निर्माण विभाग की भूमि पर ईंटों का अवैध ढंग से चट्टा लगवाने के चलते पहले भी यहां अलग-अलग हादसों में दो लोगों की जान जा चुकी है। पूर्व में हुए दोनों हादसे सर्दी में हुए थेे। उस समय भी ईंट भट्ठा संचालक की मनमानी रोकने को लेकर आवाज उठी थी, लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया था। लोक निर्माण विभाग भी इसे लेकर कभी गंभीर नहीं हुआ। नोटिस देकर खानापूर्ति के अलावा कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया, जिससे अतिक्रमण हट सके।
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हादसे में जान गंवाने वाले सेना के सेवानिवृत्त कैप्टन लक्ष्मीकांत उपाध्याय अपनी पत्नी का इलाज कराने राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर जा रहे थे। कार में उनका एक रिश्तेदार भी था, जो हादसे का शिकार हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई।
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कार में मौजूद सभी चार लोग मौके पर ही दम तोड़ चुके थे, फिर भी कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कार से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।
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जानकारी के अनुसार सम्मनपुर थाना क्षेत्र के बड़ेपुर निवासी सेवानिवृत्त सैन्य कैप्टन लक्ष्मीकांत उपाध्याय (70) मंगलवार को पत्नी कांती देवी (62) का इलाज कराने राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर कार से जा रहे थे। कार ग्राम पंचायत के ही डिहवा पुरवे के निवासी रामराज (56) चला रहा था, जबकि कांती के भाई का लड़का अरविंद (35) निवासी खुटहन जनपद जौनपुर भी कार में मौजूद था।
बताया जाता है कि तेज रफ्तार कार जब अकबरपुर-आजमगढ़ मार्ग पर सम्मनपुर थाना क्षेत्र के पलई रामनगर के निकट खपुरा पहुंची थी कि तभी आगे जा रहे एक डंपर को ओवरटेक करने के दौरान कार अनियंत्रित हो गई। इसके बाद कार सड़क के ठीक किनारे अवैध ढंग से एक भट्ठे द्वारा लगाए गए ईंट के टीले से जा टकराई।
कार की रफ्तार इतनी तेज थी उसके परखच्चे उड़ गए। कार चालक समेत उसमें बैठे सभी लोग बेसुध हो गए। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। आननफानन में स्थानीय लोग एकत्र हुए। किसी तरह कार में पीछे मौजूद महिला को तो निकाल लिया गया, लेकिन अन्य तीनों लोग कार में फंसे रहे।
बड़ी तादाद में एकत्र लोगों ने कार का शीशा तोड़ने के साथ ही बेलचक व अन्य औजारों की मदद से कार का गेट आदि तोड़कर अन्य तीनों को भी बाहर निकाला। हालांकि कार सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसी बीच सम्मनपुर थाना प्रभारी प्रदीप सिंह के अलावा अकबरपुर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। चारों कार सवारों को जिला अस्पताल भिजवाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
बाद में चालक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी का माहौल देखने को मिला। हृदय विदारक इस घटना को देख हर कोई द्रवित हो उठा। स्थानीय लोगों, भट्ठे के मजदूरों तथा राहगीरों व अन्य यात्रियों तक ने हादसे के बाद कार में फंसे बेसुध लोगों को बाहर निकालने में मदद की।
जल्द से जल्द बेसुध हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए चीख पुकार का माहौल दिखा। चूंकि कार सवार लोगों के परिवार के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। इसलिए जिला अस्पताल भेजे जाने के बाद कई स्थानीय लोग भी जिला अस्पताल तक गए।
हादसे से पहले बाइक को मारी थी टक्कर
ईंट के टीले में टकराने से पहले कार ने एक बाइक सवार को टक्कर मार दी। इससे वह घायल हो गया। बताया जाता है कि सम्मनपुर थाना क्षेत्र के ही कहरा सुलेमपुर का रहने वाला अभिषेक (24) पुत्र श्यामलाल मंगलवार सुबह बाइक से गांव जा रहा था। इसी बीच अकबरपुर की तरफ जा रही एक कार ने उसे टक्कर मार दी।
इसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी के बाद चालक ने कार की स्पीड बढ़ा दी। लगभग एक किलोमीटर आगे आने के बाद वह भट्ठे के निकट हादसे का शिकार हो गया। घायल युवक ने बताया कि उसे टक्कर मारने के बाद कार आगे जाकर दुर्घटना ग्रस्त हुई है। हालांकि युवक ने इस बारे में कोई केस दर्ज नहीं कराया है।
काश भट्ठा संचालक ने हटा ली होती ईंट
अकबरपुर-आजमगढ़ मार्ग पर पलई कल्यानपुर के निकट सड़क हादसे में चार लोगों की जान बचाई जा सकती थी, यदि लोक निर्माण विभाग की नोटिस के बाद भट्ठा संचालक ने मौके से ईंटों का चट्टा हटा लिया होता तो। दरअसल पलई कल्यानपुर के निकट आदीपुर स्थित भट्ठे के पास सड़क थोड़ी घुमावदार है। यहां पलई- कल्यानपुर निवासी रामनेवल वर्मा ने भट्ठा लगा रखा है।
इसे लेकर बीते दिनों लोक निर्माण विभाग ने उसे नोटिस जारी कर ईंटों का अवैध ढंग से लगाया गया चट्टा हटाने का निर्देश दिया था। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियन्ता ने बीते 22 अप्रैल को नोटिस जारी की थी। इसमें कहा गया था कि मौखिक निर्देश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। ऐसे में नोटिस दी जा रही है।
अवैध चट्टे से पहले भी जा चुकी जान
सड़क के ठीक किनारे लोक निर्माण विभाग की भूमि पर ईंटों का अवैध ढंग से चट्टा लगवाने के चलते पहले भी यहां अलग-अलग हादसों में दो लोगों की जान जा चुकी है। पूर्व में हुए दोनों हादसे सर्दी में हुए थेे। उस समय भी ईंट भट्ठा संचालक की मनमानी रोकने को लेकर आवाज उठी थी, लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया था। लोक निर्माण विभाग भी इसे लेकर कभी गंभीर नहीं हुआ। नोटिस देकर खानापूर्ति के अलावा कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया, जिससे अतिक्रमण हट सके।