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जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा

Sun, 10 Jun 2018 12:16 AM IST
Updated Sun, 10 Jun 2018 12:16 AM IST
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जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा
बहराइच। आदर्श जिला अस्पताल बहराइच में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा है। हालात ये हैं कि उल्टी व दस्त की दवा भी रोगियों को नहीं मिल पा रही हैं। रोगी कराहते हुए अस्पताल आते हैं और डॉक्टर से सलाह लेकर बिना दवा के लौट जाते हैं।
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मरीज बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीद रहे हैं। अधिकारी इंडेंट शासन को भेजने का दावा कर रहे हैं। लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे मरीजों की जान सांसत में है।
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बहराइच का जिला अस्पताल देवीपाटन मंडल का आदर्श अस्पताल है। 201 बेड के अस्पताल में बहराइच के अलावा श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर के साथ ही नेपाल राष्ट्र के रोगी भी इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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अस्पताल में स्वास्थ्य अधिकारी सभी सुविधाएं मुहैया होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाएं तक नहीं हैं। गर्मी का मौसम चल रहा है।

60 फीसदी रोगी डायरिया के अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन डायरिया नियंत्रित करने के लिए न तो पेरीनार्म है, न ही मेट्रोजिल टैबलेट या लिक्विड उपलब्ध है।

बुखार के रोगियों की भी तादाद बढ़ने लगी है। दिमागी बुखार का भी मौसम आ गया है। ऐसे में एईएस और जेई के नियंत्रण के लिए डायजीपॉम और इप्सोलिन इंजेक्शन का भी अभाव है।

एंटी बायोटिक डेक्सा, यह ऐसा इंजेक्शन है जो लगभग सभी रोगों में रोगियों पर प्रयोग किया जाता है। लेकिन इसकी भी जिला अस्पताल में कमी है।

वर्तमान इंडेंट पर नजर डालें तो डेक्सा इंजेक्शन के दो वॉयल ही उपलब्ध हैं। यही हाल अन्य दवाओं का भी है। मरीजों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल पहुंचने वाले मरीज ओपीडी में परीक्षण करवाकर दवा लिखवाते हैं, लेकिन उन्हें अस्पताल से दवाइयां मुहैया नहीं हो पा रही है।

स्टॉक में नहीं दवाएं
पेरीनार्म, मेट्रोजिल, इंजेक्शन डायजीपॉम, इप्सोलिन, गार्डिनाल स्टॉक में नहीं है। जबकि एंटी बायोटिक डेक्सा काफी कम मात्रा में उपलब्ध है।

वहीं, डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज जब औषधि वितरण कक्ष में पहुंचते हैं तो वहां उन्हें दवा नहीं होने की बात कही जाती है। सलाह दी जाती है कि बाहर से दवा ले लें।


दवा के लिए भटकती रही महिला
मिहींपुरवा विकासखंड के उर्रा गांव निवासी शांती देवी पेट दर्द व बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल पहुंची। उन्होंने चिकित्सक को दिखाया।

इसके बाद दवा लेने औषधि केंद्र पर पहुंची तो वहां मेट्रोजिल दवा नहीं मिली। इस पर महिला ने बाहर मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदी।

बाहर से करनी पड़ी खरीद
नवाबगंज के बख्शी गांव निवासी सकीना पत्नी अली अहमद को उल्टी के साथ पेट दर्द की शिकायत थी। वह पति के साथ जिला अस्पताल पहुंची।

चिकित्सकों ने दवा लिखी, लेकिन दवा वितरण केंद्र पर मेट्रोजिल व पेरीनार्म टेबलेट नहीं मिली। इस पर उन्हें मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी।

औषधि भंडार कक्ष में दवाएं कम जरूर हैं, लेकिन उनसे मरीजों को परेशानी नहीं हो रही है। दवा खरीद के लिए शासन को इंडेंट भेजा गया है। मरीजों को जिन दवाओं की जरूरत होती है, उपलब्ध न होने पर यूजर चार्जेज के मद से दवा खरीदकर मुहैया करायी जाती है।
-डॉ. ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्साधीक्षक
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