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कल से खुलेंगे स्कूल, तैयारियां कुछ भी नहीं
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:16 AM IST
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बहराइच। स्कूल जुलाई माह में खुल जाएंगे। लेकिन तैयारी शून्य है। स्कूलों के रास्ते बदहाल हैं। स्कूल भवन झाड़-झंखाड़ से घिरे हुए हैं। रंग-रोगन तो दूर, साफ-सफाई तक नहीं हुई। ऐसे में स्कूलों की क्लास झाड़ झंखाड़ में ही लगेगी। कई स्कूलों के रास्ते भी बदहाल हैं। इस ओर अब तक न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने ध्यान दिया है न ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार हाकिमों ने। ऐसे में स्कूलों की पढ़ाई भगवान भरोसे है।
जिले के 14 विकास खंडों में 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। इन स्कूलों में साढ़े चार लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू हुआ है, लेकिन ग्रीष्मावकाश के चलते 20 मई से स्कूल बंद हैं। एक जुलाई को रविवार का अवकाश है। ऐसे में विद्यालय दो जुलाई को खुलेंगे। लेकिन स्कूलों में तैयारियां शून्य हैं।
अब तक न तो प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों का रंग-रोगन हुआ है न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त की गई है। स्कूल झाड़ झंखाड़ में तब्दील नजर आ रहे हैं। कई स्कूलों के रास्तों पर कूड़ों के ढेर लगे हुए हैं। जलभराव की भी स्थित है। ऐसे में स्कूल के पहले दिन ही अव्यवस्थाओं के बीच पठन-पाठन शुरू होगा। अब तक इस दिशा में विभागीय अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की है। ऐसे में कान्वेंट की दौड़ में प्राथमिक और जूनियर विद्यालय कैसे शामिल हो सकेंगे, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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जिले के 14 विकास खंडों में 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय स्थापित हैं। इन स्कूलों में साढ़े चार लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू हुआ है, लेकिन ग्रीष्मावकाश के चलते 20 मई से स्कूल बंद हैं। एक जुलाई को रविवार का अवकाश है। ऐसे में विद्यालय दो जुलाई को खुलेंगे। लेकिन स्कूलों में तैयारियां शून्य हैं।
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अब तक न तो प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों का रंग-रोगन हुआ है न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त की गई है। स्कूल झाड़ झंखाड़ में तब्दील नजर आ रहे हैं। कई स्कूलों के रास्तों पर कूड़ों के ढेर लगे हुए हैं। जलभराव की भी स्थित है। ऐसे में स्कूल के पहले दिन ही अव्यवस्थाओं के बीच पठन-पाठन शुरू होगा। अब तक इस दिशा में विभागीय अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की है। ऐसे में कान्वेंट की दौड़ में प्राथमिक और जूनियर विद्यालय कैसे शामिल हो सकेंगे, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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