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एकेटीयू : एक साल में 1288 शोध पत्र स्कोपस में प्रकाशित
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि (एकेटीयू) की ओर से पिछले वर्षों में शोध को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। विवि व संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों के इस साल 1288 शोध पत्र प्रतिष्ठित स्कोपस जर्नल में प्रकाशित हुए हैं, जो पिछले वर्ष से 300 फीसदी अधिक है। वर्ष 2015 में विवि व कॉलेजों के शिक्षकों की ओर से लगभग 392 शोध पत्र स्कोपस जर्नल्स में प्रकाशित किए गए थे। 2016 में 540, 2017 में 460, 2018 में 685, 2019 में 1151 शोध पत्र प्रकाशित किए गए। वहीं वर्ष 2020 में विवि की ओर से लगभग 1288 शोध पत्रों का प्रकाशन स्कोपस जर्नल्स में किया गया है।
विवि के डीन पीजीएसआर प्रो. एमके दत्ता ने कहा कि किसी भी विवि में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर का अंदाजा उसके शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के शोध एवं नवाचारों से लगाया जाता है। विवि में हो रहे शोध कार्यों की गुणवत्ता के स्तर का अंदाजा प्रकाशित हो रहे शोध पत्रों के जर्नल्स पर निर्भर करता है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बीते पांच वर्षों में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की है।
इसमें विश्वस्वरैया रिसर्च प्रोमोशन स्कीम, होमी भाभा टीचिंग असिस्टेंसशिप स्कीम, सेमीनार ग्रांट, ट्रेवेल ग्रांट एवं पं दीन दयाल उपाध्याय गुणवत्ता सुधार योजना जैसी अनुदान योजनाएं शामिल हैं।
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विवि के डीन पीजीएसआर प्रो. एमके दत्ता ने कहा कि किसी भी विवि में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर का अंदाजा उसके शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के शोध एवं नवाचारों से लगाया जाता है। विवि में हो रहे शोध कार्यों की गुणवत्ता के स्तर का अंदाजा प्रकाशित हो रहे शोध पत्रों के जर्नल्स पर निर्भर करता है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बीते पांच वर्षों में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की है।
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इसमें विश्वस्वरैया रिसर्च प्रोमोशन स्कीम, होमी भाभा टीचिंग असिस्टेंसशिप स्कीम, सेमीनार ग्रांट, ट्रेवेल ग्रांट एवं पं दीन दयाल उपाध्याय गुणवत्ता सुधार योजना जैसी अनुदान योजनाएं शामिल हैं।
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