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मिट्टी की दीवार ढही मासूम बालक की मौत
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:31 PM IST
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त्रिवेदीगंज (बाराबंकी)। कच्ची मिट्टी से बनी दीवार ढ़हने पर झोपड़ी में सो रहे मासूम बालक की मौत हो गई है। जबकि मृतक के साथ में मौजूद उसकी मौसी व मौसेरे भाई को गंभीर चोट पहुंची है जिनको सीएचसी से गंभीर अवस्था में इलाज के लिए जिला चिकित्सालय रेफर किया गया है। बुधवार देर रात को लोनीकटरा थाना क्षेत्र के सोनिकपुर गांव में मिट्टी से बनी दीवाल बगल में रखी झोपड़ी पर गिर गई। झोपड़ी में सो रहे हैदरगढ़ कोतवाली के लाही गांव निवासी संजय (8) पुत्र रामनाथ इनकी मौसी रामप्यारी व मौसेरा भाई रामकरन (10) मलबे के नीचे दबे रहे और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों द्वारा गिरी हुई दीवाल का मलबा हटाने पर तीनों को बाहर निकाला जा सका जिसमें संजय की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। मासूम संजय अपनी मौसी के घर पर पढ़ाई करने के लिए रह रहा था। रामप्यारी व रामकरन को घायल अवस्था में इलाज के लिए सीएचसी ले जाया गया जहां से दोनों को गंभीर अवस्था जिला चिकित्सालय रेफर किया गया है। ग्रामीणों ने बताया राजपाल ने अपनी भूमि पर मिट्टी की काफी ऊंची बाउंड्री बना रखी थी जिस पर कोई छप्पर आदि नहीं होने से बारिश के पानी में भीग कर गिर गई। घटना की जानकारी होने पर पहुंची संजय की मां फराना व अन्य ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे जहां इकलौते पुत्र को मृत पाकर मां बेसुध होकर रोती रही। ग्रामीण मृतक संजय के शव को लेकर लाही गांव चले गए। मृतक के शव का पोस्ट मार्टम नहीं कराया गया है। एसडीएम पंकज कुमार ने बताया घटना प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में नहीं है परिवार को आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इकलौते बेटे की मौत से गम मेें परिवार
तीन बहनो के बाद इकलौते पुत्र को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए मां फराना ने कलेजे पर पत्थर रखकर सोनिकपुर अपनी बहन के घर भेजा था। संजय के पिता रामनाथ अपने साढू रामबरन के साथ गैर प्रांत में मजदेरी करते है। पिता के बाहर रहने पर बेहतर शिक्षा की चिंता में फराना ने पुत्र संजय को अपनी बहन रामप्यारी के घर भेज जहां व अपने से दो वर्ष बड़े रामकन के साथ स्कूूल जाता था। हादशे में मौत की खबर पर पर संजय की बहने लक्ष्मी, उर्मिला व ज्ञानवती भी अपनी मां के साथ फूट-फूट कर रोती रही।
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इकलौते बेटे की मौत से गम मेें परिवार
तीन बहनो के बाद इकलौते पुत्र को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए मां फराना ने कलेजे पर पत्थर रखकर सोनिकपुर अपनी बहन के घर भेजा था। संजय के पिता रामनाथ अपने साढू रामबरन के साथ गैर प्रांत में मजदेरी करते है। पिता के बाहर रहने पर बेहतर शिक्षा की चिंता में फराना ने पुत्र संजय को अपनी बहन रामप्यारी के घर भेज जहां व अपने से दो वर्ष बड़े रामकन के साथ स्कूूल जाता था। हादशे में मौत की खबर पर पर संजय की बहने लक्ष्मी, उर्मिला व ज्ञानवती भी अपनी मां के साथ फूट-फूट कर रोती रही।
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