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एक नेता के वरदहस्त से राजनीति में चमका राजा यादव
Updated Wed, 28 Jun 2017 11:35 PM IST
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एक नेता के वरदहस्त से राजनीति में चमका राजा यादव
मां को चुनाव जिताने के साथ राजनीति कद कर रहा था मजबूत
नेता के शह पर ही पुलिस मामले को दबाने की करती रही कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पांच लोगों के मर्डर का मुख्य आरोपी बताया जा रहा विजय कुमार उर्फ राजा यादव दूसरे दल से आए भाजपा के एक कद्दावर नेता का खासमखास माना जाता है। इसी नेता का वरदहस्त होने से राजा यादव की न सिर्फ राजनीति चमकी, बल्कि अपना राजनीतिक कद क्षेत्र में मजबूत कर रहा था। मृतक रोहित शुक्ला अपने भाई की जिस ससुराल की जमीन पर मकान बनवा रहा था, उस पर भी राजा निर्माण कार्य में अड़ंगा लगा रहा था, ताकि मृतक यहां पर न बस सके और क्षेत्र में उसकी जलवा कायम रहे। यह भी इतनी बड़ी वारदात की वजह बनी।
पहली बार मुख्य हत्या आरोपी राजा यादव की मां रामश्री गांव की प्रधान बनी थी। प्रधानी चुनाव के दौरान राजा यादव सपा का सपोर्टर था, लेकिन विस चुनाव में उसने भाजपा के लिए वोट मांगा था। ऐसा करने पर राजा यादव के सिर पर दूसरे दल से आए भाजपा के एक कद्दावर नेता का हाथ हो गया था। नेता का हाथ होने के चलते राजा जो चाहता, वह कर रहा था। कहा जाता है कि नेता की ताकत के सहारे उसने मामूली बात को लेकर अन्य साथियों के साथ मिलकर बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। नेता की वजह से पुलिस पहले मामले को दबाने की कोशिश करती रही। पीएम रिपोर्ट आई तो खुलासा हुआ कि कितनी बेदर्दी से पांच लोगों की हत्या की गई।
इनसेट
खाकी की सुरक्षा पर लगा सवालिया निशान
अप्टा गांव में जिस तरह एक के बाद एक पांच लोगों की निर्मम हत्या की गई, उसने खाकी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। वर्ष 2017 के मई और जून के आपराधिक आंकड़ों पर नजर डालें तो हत्याओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। 26 दिन में 12 मर्डर की वारदातें हुई हैं। एसपी की सख्ती के बावजूद पुलिसिंग व्यवस्था बेपटरी है। थानेदार हो या फिर जिले में गठित सर्विलांस टीम अपराधियों पर नकेल कसने में कारगर साबित नहीं हो रही है।
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मां को चुनाव जिताने के साथ राजनीति कद कर रहा था मजबूत
नेता के शह पर ही पुलिस मामले को दबाने की करती रही कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पांच लोगों के मर्डर का मुख्य आरोपी बताया जा रहा विजय कुमार उर्फ राजा यादव दूसरे दल से आए भाजपा के एक कद्दावर नेता का खासमखास माना जाता है। इसी नेता का वरदहस्त होने से राजा यादव की न सिर्फ राजनीति चमकी, बल्कि अपना राजनीतिक कद क्षेत्र में मजबूत कर रहा था। मृतक रोहित शुक्ला अपने भाई की जिस ससुराल की जमीन पर मकान बनवा रहा था, उस पर भी राजा निर्माण कार्य में अड़ंगा लगा रहा था, ताकि मृतक यहां पर न बस सके और क्षेत्र में उसकी जलवा कायम रहे। यह भी इतनी बड़ी वारदात की वजह बनी।
पहली बार मुख्य हत्या आरोपी राजा यादव की मां रामश्री गांव की प्रधान बनी थी। प्रधानी चुनाव के दौरान राजा यादव सपा का सपोर्टर था, लेकिन विस चुनाव में उसने भाजपा के लिए वोट मांगा था। ऐसा करने पर राजा यादव के सिर पर दूसरे दल से आए भाजपा के एक कद्दावर नेता का हाथ हो गया था। नेता का हाथ होने के चलते राजा जो चाहता, वह कर रहा था। कहा जाता है कि नेता की ताकत के सहारे उसने मामूली बात को लेकर अन्य साथियों के साथ मिलकर बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। नेता की वजह से पुलिस पहले मामले को दबाने की कोशिश करती रही। पीएम रिपोर्ट आई तो खुलासा हुआ कि कितनी बेदर्दी से पांच लोगों की हत्या की गई।
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खाकी की सुरक्षा पर लगा सवालिया निशान
अप्टा गांव में जिस तरह एक के बाद एक पांच लोगों की निर्मम हत्या की गई, उसने खाकी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। वर्ष 2017 के मई और जून के आपराधिक आंकड़ों पर नजर डालें तो हत्याओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। 26 दिन में 12 मर्डर की वारदातें हुई हैं। एसपी की सख्ती के बावजूद पुलिसिंग व्यवस्था बेपटरी है। थानेदार हो या फिर जिले में गठित सर्विलांस टीम अपराधियों पर नकेल कसने में कारगर साबित नहीं हो रही है।
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