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Navratri 2026 Live: शारदीय नवरात्रि शुरू, 58 साल बाद बना महासंयोग, जानें पूजा से लेकर व्रत नियम तक सब कुछ
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Sun, 11 Oct 2026 10:39 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 11 Oct 2026 10:39 AM IST
खास बातें
Shardiya Navratri 2026 Live Ghatasthapana Muhurat in Hindi: हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल 11 अक्तूबर 2026 से नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नौ दिनों तक व्रत, मंत्र जाप और विधि-विधान से पूजा करने पर माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के पहले दिन का महत्व।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
लाइव अपडेट
11:01 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि में भोजन और व्रत के नियम
- सात्विक भोजन करें और अपनी परंपरा के अनुसार अनाज से परहेज करें।
- फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक का सेवन करें।
- दिनभर फलाहार करें और व्रत के नियमों के अनुसार भोजन करें।
- निर्जल उपवास रखने से बचें, खासकर जब स्वास्थ्य इसकी अनुमति न देता हो।
- मांसाहार, शराब और अन्य मादक पदार्थों से दूर रहें।
- धार्मिक परंपरा के अनुसार प्याज और लहसुन का सेवन न करें।
- क्रोध, आलस्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम के नियमों का पालन करें।
- घर और पूजा स्थल में स्वच्छता व सात्विक वातावरण बनाए रखें।
- व्रत के दौरान पर्याप्त पानी पिएं और सेहत का ध्यान रखें।
10:45 AM, 11-Oct-2026
नौ दिन में कई शुभ योग
नवरात्र के दौरान चार से पांच दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और दो दिन अमृत सिद्धि योग बनने का संयोग है। इसके अलावा महाष्टमी और महानवमी पर भी विशेष योग रहेंगे। शुभ मुहूर्त में भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी के साथ गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। इस बार शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाता है। हाथी को सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी।
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10:25 AM, 11-Oct-2026
नवरात्रि नौ दिन की पूजा के मंत्र
- मां शैलपुत्री का मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
- मां चन्द्रघण्टा का मंत्र- ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः
- देवी कूष्माण्डा का मंत्र - ॐ कूष्माण्डायै नमः
- देवी स्कंदमाता का मंत्र - ॐ स्कन्दमात्राय नमः
- देवी कात्यायनी का मंत्र - ॐ कात्यायनै नमः
- देवी कालरात्रि का मंत्र - ॐ कालरात्र्यै नमः
- देवी महागौरी का मंत्र - ॐ महागौर्यै नमः
- देवी सिद्धिदात्री का मंत्र- ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः
10:15 AM, 11-Oct-2026
घर पर ऐसे करें कलश स्थापना
- कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें।
- इसके बाद वहां मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- अब जिस स्थान पर जौ बोने हैं, वहां साफ मिट्टी से एक छोटा पात्र तैयार करें।
- इसमें जौ के बीज डालकर ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें।
- इसके बाद कलश तैयार करें।
- कलश के बाहर मौली बांधें और उस पर रोली से तिलक लगाएं।
- अब कलश में स्वच्छ जल और थोड़ा गंगाजल डालें।
- इसमें सुपारी और सिक्का भी रखा जा सकता है।
- इसके बाद कलश के मुंह पर आम या अशोक के पत्ते रखें।
- ऊपर जटा वाला नारियल स्थापित करें।
- नारियल को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर कलश पर रखा जाता है।
- कलश और जौ की स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और विधि-विधान से पूजा करें।
- नवरात्रि के दौरान जौ में नियमित रूप से आवश्यकता के अनुसार पानी का छिड़काव करते रहें।
10:00 AM, 11-Oct-2026
कलश स्थापना के लिए क्या-क्या चाहिए?
- तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
- स्वच्छ जल और गंगाजल
- आम या अशोक के पत्ते
- जटा वाला नारियल
- मौली या कलावा
- रोली और अक्षत
- सुपारी और सिक्का
- फूल और माला
- धूप, दीपक और कपूर
- लाल या पीला कपड़ा
- पूजा की थाली
- फल और मिठाई
- जौ के दाने
- मिट्टी का पात्र
- साफ और उपजाऊ मिट्टी
09:40 AM, 11-Oct-2026
Shardiya Navratri 2026:11 अक्तूबर को इस समय करें कलश स्थापना
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी 11 अक्तूबर, रविवार को सुबह कलश स्थापना की जा सकती है। दिए गए पंचांग के अनुसार, घटस्थापना के लिए सुबह 5:31 बजे से 9:26 बजे तक शुभ समय रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त सुबह 11:00 बजे से 11:47 बजे तक रहेगा। यानी सुबह घटस्थापना के लिए करीब 3 घंटे 55 मिनट का समय और अभिजित मुहूर्त में 47 मिनट का समय उपलब्ध रहेगा। पूजा के लिए संभव हो तो साफ-सफाई करके पहले से ही सारी सामग्री व्यवस्थित कर लें, ताकि शुभ मुहूर्त में बिना किसी परेशानी के कलश स्थापना की जा सके।
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09:20 AM, 11-Oct-2026
मां शैलपुत्री की जन्म कथा
माँ दुर्गा अपने पहले स्वरुप में 'शैलपुत्री' के नाम से पूजी जाती हैं।पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा ।अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं तब इनका नाम सती था।इनका विवाह भगवान शंकर जी से हुआ था।एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया जिसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया किन्तु शंकर जी को उन्होंने इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया,सती ने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं,तब वहां जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।अपनी यह इच्छा उन्होंने भगवान शिव को बताई।
09:00 AM, 11-Oct-2026
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से कलश स्थापना करें और मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
- इसके बाद मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
- मां को सफेद रंग के फूल और सफेद रंग की मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- इसके बाद मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें और श्रद्धापूर्वक दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
08:35 AM, 11-Oct-2026
मां शैलपुत्री की पूजा क्यों की जाती है?
मां शैलपुत्री को नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है। वे वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
08:15 AM, 11-Oct-2026