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नवरात्रि में क्यों होती है मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा? जानें नवदुर्गा का धार्मिक महत्व

Sun, 11 Oct 2026 10:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 11 Oct 2026 10:18 AM IST
सार

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक, हर रूप शक्ति, साहस, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। जानें नवदुर्गा के नौ रूपों की महिमा और नवरात्रि में उनकी पूजा का धार्मिक महत्व।

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Shardiya Navratri 2026 From Shailputri to Siddhidatri Know the Significance of the Nine Forms of Goddess Durga
Shardiya Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवदुर्गा के प्रत्येक रूप की अपनी अलग महिमा है। कोई शक्ति और साहस का प्रतीक है, तो कोई तपस्या, ज्ञान, करुणा और सिद्धि का संदेश देता है। नवरात्रि के नौ दिन केवल देवी की उपासना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें आत्मबल बढ़ाने, मन को संयमित करने और जीवन में सकारात्मकता अपनाने का अवसर भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे शक्तिशाली असुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। मां की इस विजय को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि नवरात्रि में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करके भक्त उनसे सुख, समृद्धि, साहस और कल्याण की कामना करते हैं।

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Shardiya Navratri 2026 From Shailputri to Siddhidatri Know the Significance of the Nine Forms of Goddess Durga
Shardiya Navratri Pujan - फोटो : adobe stock

नवरात्रि में नौ दिनों तक क्यों होती है नवदुर्गा की पूजा?
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि देवी के प्रत्येक स्वरूप की आराधना से भक्तों को अलग-अलग आध्यात्मिक गुणों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। ये नौ रूप जीवन में दृढ़ता, तपस्या, साहस, ऊर्जा, ममता, निर्भयता, पवित्रता और ज्ञान जैसे गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। नवरात्रि के दौरान भक्त व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। इस समय सात्विक जीवनशैली अपनाने, मन को शांत रखने और अच्छे विचारों को महत्व देने की परंपरा भी है। शारदीय नवरात्रि का पर्व वर्षा ऋतु के बाद शरद ऋतु के आगमन के समय आता है। ऐसे में यह त्योहार धार्मिक आस्था के साथ-साथ नई शुरुआत और उत्साह का संदेश भी देता है।

Shardiya Navratri 2026 From Shailputri to Siddhidatri Know the Significance of the Nine Forms of Goddess Durga
मां शैलपुत्री को स्थिरता, शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। - फोटो : Amar Ujala

मां शैलपुत्री: शक्ति और दृढ़ विश्वास की प्रतीक 
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैल का अर्थ पर्वत होता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी को शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित होता है। धार्मिक मान्यताओं में मां शैलपुत्री को स्थिरता, शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से भक्तों को जीवन की चुनौतियों का सामना धैर्य और विश्वास के साथ करने की प्रेरणा मिलती है।

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Shardiya Navratri 2026 From Shailputri to Siddhidatri Know the Significance of the Nine Forms of Goddess Durga
मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी: तपस्या और संयम का संदेश
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप तप, त्याग, साधना और संयम का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से भक्तों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोने की प्रेरणा मिलती है। उनका स्वरूप बताता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।

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Shardiya Navratri 2026 From Shailputri to Siddhidatri Know the Significance of the Nine Forms of Goddess Durga
मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय और संकटों से लड़ने का साहस प्रदान करती हैं। - फोटो : Amar Ujala

मां चंद्रघंटा: साहस और निर्भयता की देवी
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी का यह स्वरूप साहस, वीरता और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय और संकटों से लड़ने का साहस प्रदान करती हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

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