Navratri 2024: आदिशक्ति की आराधना का पर्व प्रारंभ, सुख-समृद्धि के लिए नवरात्रि पर जरूर करें दुर्गा पाठ
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Thu, 03 Oct 2024 01:27 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 03 Oct 2024 01:27 PM IST
खास बातें
Shardiya Navratri 2024 Ghat Sthapana Muhurat And Wishes in Hindi: आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि लेकर नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि रहती है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा और अनुष्ठान आरंभ होते हैं। नवरात्रि के पहले दिन देवी मां पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है।
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शारदीय नवरात्रि 2024
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
01:21 PM, 03-Oct-2024
शारदीय नवरात्रि पर डोली पर आईं माता रानी
आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। इस बार माता का आगमन डोली पर हुआ है। गुरुवार से नवरात्रि के शुरू होने पर माता डोली पर सवार होकर आईं हैं। शास्त्रों में जब माता नवरात्रि पर डोली पर आती है इसको अच्छा नहीं माना जाता है। इससे देश-दुनिया में महामारी और प्राकृतिक आपदाएं आना का संकेत माना जाता है।12:21 PM, 03-Oct-2024
Shailputri Aarti Lyrics: मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
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12:10 PM, 03-Oct-2024
नवरात्रि पर ध्यान और मंत्रोच्चार का महत्व
नवरात्रि पर ध्यान और मंत्रोच्चार के लिए भी ईशान कोण सबसे उत्तम होता है। यह स्थान मानसिक शांति और ध्यान के लिए आदर्श माना गया है। यहां बैठकर मंत्र जप करने से मन शांत होता है और पूजा का फल तुरंत प्राप्त होता है।11:32 AM, 03-Oct-2024
नवरात्रि के पहले दिन की पूजा का महत्व
नवरात्रि का पहला दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की आराधना का महत्व होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री का पूजन करते हैं, उन्हें जीवन में स्थिरता और शांति मिलती है। शैलपुत्री मां की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य की भक्ति शक्ति में वृद्धि होती है।11:02 AM, 03-Oct-2024
Ghatasthapana Muhurat: कलश स्थापना के बाद की पूजा
कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। प्रतिदिन देवी के एक रूप की पूजा होती है और साधक नियमपूर्वक व्रत, ध्यान और आराधना करता है। नौ दिनों की पूजा के बाद दशमी के दिन 'विजयादशमी' के पर्व पर कलश विसर्जन किया जाता है।10:39 AM, 03-Oct-2024
Shardiya Navratri 2024 : नवरात्रि में क्यों बौया जाता है जौ
कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी होती है। जौ को प्रतीकात्मक रूप से सुख, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसे मिट्टी के पात्र में बोया जाता है और इसके बढ़ने को शुभ संकेत माना जाता है।Navratri Vrat Niyam: नवरात्रि व्रत में किन-किन नियमों का करना चाहिए पालन ? यहां जानें
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10:25 AM, 03-Oct-2024
नवरात्रि पर क्या नहीं करना चाहिए
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए।2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
09:57 AM, 03-Oct-2024
Happy Navratri 2024: नवरात्रि पर क्या करना चाहिए
- नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
- देवी मां को प्रतिदिन जल अर्पित करें
- नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
- नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
- नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
- ब्रह्राचर्य का पालन करें
09:39 AM, 03-Oct-2024
Durga Saptashati Path: नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व
नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण में दुर्गा सप्तशती उल्लेख किया गया है। मां शक्ति की उपासना के लिए दुर्गा सप्तशती श्रेष्ठ ग्रंथ माना है। इसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय है।
1. प्रथम अध्याय : इस अध्याय में मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु कैटभ का प्रसंग
2. द्वितीय अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय में देवताओं के तेज से देवी मॉं का प्रादुर्भाव और महिषासुर की सेना का वध
3. तृतीय अध्याय : इस अध्याय में मां दुर्गा द्वारा सेनापतियों सहित महिषासुर का वध
4. चतुर्थ अध्याय : इंद्र समेत सभी देवी- देवताओं द्वारा देवी मां की स्तुति
5. पंचम अध्याय : देवी की स्तुति और चण्ड-मुण्ड के मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना और फिर दूत का निराश लौटना
6. षष्ठम अध्याय : धूम्रलोचन- वध
7. सप्तम अध्याय : चण्ड-मुण्ड का वध
8. अष्टम अध्याय : रक्तबीज का वध का वर्णन
9. नवम अध्याय : विशुम्भ का वध
10. दशम अध्याय : शुम्भ का वध
11. एकादश अध्याय : सभी का वध करने के बाद देवताओं के द्वारा देवी की स्तुति और फिर देवी द्वारा देवताओं को वरदान देना
12. द्वादश अध्याय : देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्य
13. त्रयोदश अध्याय : सुरथ और वैश्य को देवी का वरदान
09:32 AM, 03-Oct-2024
Shardiya Navratri Ghatasthapana Puja Samagri: कलश स्थापना पूजा सामग्री
- 7 तरह के अनाज
- मिट्टी का बर्तन
- मिट्टी
- कलश
- गंगाजल या सादा जल
- आम,अशोक या पान के पत्ते
- सुपारी
- सूत
- मौली
- एक जटा वाला नारियल
- माता की चुनरी
- अक्षत
- केसर
- कुमकुम
- लाल रंग का साफ कपड़ा
- फूल- माला