एसिड रिफ्लक्स से छुटकारा पाने के लिए नियमित रूप से करें ये आसन
योग से हर समस्या का इलाज होना संभव है। आजकल बदलते खान- पान और दिनचर्या के कारण एसिड रिफ्लक्स की समस्या से अधिकतर लोग परेशान होते हैं। ऐसे में कुछ आसनों का अभ्यास करके आसानी से इसे ठीक किया जा सकता है।
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विस्तार
डॉ जी प्रकाश
डिप्टी चीफ मेडिकल अफसर
जिंदल नेचरक्योर इंस्टिट्यूट
एसिड रिफ्लक्स के रूप में भी जाने जाने वाली एसिडिटी की बीमारी होना आम है। यह बीमारी तब होती है जब पेट बहुत ज्यादा एसिड उत्पन्न करने लगता है। एसिड द्वारा भोजन के टूटने की प्रक्रिया होती है, लेकिन कभी-कभी पेट में ज्यादा एसिड का उत्पादन ज्यादा होने लग जाता है, जिससे एसिड की अधिकता हो जाती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, योग करने से एसिड रिफ्लक्स जैसे पाचन डिसआर्डर से जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने और/या कम करने में मदद मिलती है।
पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन, या आगे झुकने का आसन पेट के अंगों के बेहतर कार्य करने में मदद करता है। इस आसन से कई सारे लाभ मिलते है। यह आसन एसिडिटी जैसे पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करता है। यह आसन पीरियड को नियमित करने और पेट की चर्बी को कम करने में भी मदद करता है।
हलासन
हलासन को हल मुद्रा के रूप में जाना जाता है क्योंकि "हला" वाक्यांश "हल" का संस्कृत रूप है, और "आसन" का अर्थ संस्कृत में "मुद्रा" होता है। इस आसन में लचीलेपन, ताकत और रीढ़ की मांसपेशियों को भी बढ़ाने की क्षमता होती है। यह कंधों और पीठ की मांसपेशियों में तनाव को दूर करने का एक प्रभावी तरीका होता है। इसके अतिरिक्त यह आसन पाचन में सुधार करती है और वजन घटाने के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हुई है।
वज्रासन
यह काफी आसान योग का आसन है। इस आसन को लंच या डिनर के बाद किया जा सकता है। यह आसन एसिडिटी की समस्या को कम करने के लिए बहुत उपयुक्त होते है क्योंकि यह आसन पाचन क्रिया में सुधार करता है, सूजन को कम करता है और पेट की परेशानी को कम करने में मदद करता है।
पवनमुक्तासन
यह एसिडिटी को कम करने के लिए एक और शक्तिशाली आसन है, और इस तरह यह कब्ज और गैस जैसे पाचन समस्याओं को ठीक करने के लिए काफी उपयोगी होता है। यह पेट में आंतों और अन्य अंगों की भी मालिश करता है और पीठ के निचले हिस्से और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके अन्य लाभ भी हैं, जैसे कूल्हे के जोड़ों में सर्कुलेशन में सुधार और पीठ के निचले हिस्से में तनाव को कम करना आदि।