{"_id":"597576824f1c1b14668b4741","slug":"this-particular-yoga-can-make-the-bad-voice-sweet-like-sugar","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"'फटी' आवाज को सुरीला बनाता है ये खास योगासन, दिन में करें इतनी बार...","category":{"title":"Yoga and Health ","title_hn":"योग","slug":"yoga-and-health"}}
'फटी' आवाज को सुरीला बनाता है ये खास योगासन, दिन में करें इतनी बार...
amarujala.com- Presented by: मंजू ममगाईं
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:24 AM IST
विज्ञापन
singing
खूबसूरत होने के बावजूद अगर अपनी फटी हुई आवाज की वजह से आप लोगों से बात करने से हिचकिचाते हैं। आपको हर किसी से बात करने में शर्मिंदगी महसूस होती हैं तो अब इस खास योगासन को करके अपना खोया कॉन्फिडेंस वापस ला सकते हैं। इस योगासन को करने से आपकी आवाज बेहद सुरीली हो जाएगी।
Trending Videos
Bhramari Pranayama
भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर अर्थात भंवरे जैसी गुंजन होती है, इसी कारण इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। भ्रामरी प्राणायाम तनाव को दूर करने के साथ दिमाग को भी शांत रखता है। इतना ही नहीं इस प्राणायाम को करने से गले से सम्बंधित कई रोग दूर होते है। इस प्राणायाम का अभ्यास रोज करने से आपकी फटी हुई आवाज भी मधुर हो सकती है।
b
भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका
-सबसे पहले साफ और समतल जगह पर पद्मासन में बैठ जाएं।
-अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें।
-अब मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथों को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।
-इसके बाद अपने हाथों को कोहनियो से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाएं।
-दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों को बंद कर लें।
-इस प्राणायाम में नाक से सांस भरकर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ सांस को छोड़े।
-पहले नाक से सांस अंदर लें और फिर बाहर छोड़ें।
-इस बात का ध्यान रखें कि सांस बाहर छोड़ते समय कंठ से भवरे के समान आवाज करना हैं।
-इसके अभ्यास को 10 से 15 बार तक करें।
-सबसे पहले साफ और समतल जगह पर पद्मासन में बैठ जाएं।
-अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें।
-अब मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथों को बगल में अपने कंधो के समांतर फैलाए।
-इसके बाद अपने हाथों को कोहनियो से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाएं।
-दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों को बंद कर लें।
-इस प्राणायाम में नाक से सांस भरकर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ सांस को छोड़े।
-पहले नाक से सांस अंदर लें और फिर बाहर छोड़ें।
-इस बात का ध्यान रखें कि सांस बाहर छोड़ते समय कंठ से भवरे के समान आवाज करना हैं।
-इसके अभ्यास को 10 से 15 बार तक करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस प्राणायाम को करने से आवाज सुरीली होने के साथ हृदय और फेफड़े मजबूत बनते हैं। उच्च-रक्तचाप सामान्य होता है। हकलाहट तथा तुतलाहट भी इसके नियमित अभ्यास से दूर होती है।
विज्ञापन
b
भ्रामरी प्राणायाम लेटकर नहीं किया जाता है। नाक या कानों में किसी प्रकार का संक्रमण होने कि स्थिति में यह अभ्यास ना करें वरना संक्रमण बढ़ सकता है।