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कपालभाति और बाह्रा प्राणायाम करने के तरीके और फायदे
Mon, 25 May 2020 03:30 PM IST
विनोद शुक्ला
पंडित उमेश भट्ट
पंडित उमेश भट्ट
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 25 May 2020 03:30 PM IST
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प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है- प्राण और आयम। प्राण का अर्थ है जीवन रूपी ऊर्जा और आयम शब्द का अर्थ है नियंत्रण।
प्राणायाम
योग में प्राणायाम सांस को नियंत्रित करने की कला को कहते हैं। प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है- प्राण और आयम। प्राण का अर्थ है जीवन रूपी ऊर्जा और आयम शब्द का अर्थ है नियंत्रण। प्राणायाम सांसों के जरिए सकारात्मक ऊर्जा को शरीर के सभी नाड़ियों तक पहुंचाना कहलाता है। प्राणायाम का मतलब प्राण का विस्तार करना है। वैसे तो प्राणायाम कई तरह के होते है लेकिन आज हम आपको कपालभाति प्राणायाम के फायदे और इसके तरीके के बारे में बताएंगे।
पेट से जुड़ी समस्याओं में रामबाण हैं ये योगासन, नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया भी रहती है दुरुस्त
कपालभाति प्राणायाम
कपाल कहते है मस्तिष्क के अग्र भाग को जबकि भाति का अर्थ है ज्योति से। कपालभाति प्राणायाम लगातार करने से चेहरे का तेज बढ़ता है। कपालभाति प्राणायाम धरती की संजीवनी कहलाता है। कपालभाति प्राणायाम करते समय मूलाधार चक्र पर ध्यान केन्द्रित करना होता है। इससे मूलाधार चक्र जाग्रत होकर कुन्डलिनी शक्ति जाग्रत होने में मदद होती है। कपालभाति प्राणायाम करते समय ऐसा सोचना है कि हमारे शरीर के सारे नकारात्मक तत्व शरीर से बाहर जा रहे हैं।
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21 मिनट पैदल चलने के बाद प्राणायाम में सबसे पहले भस्त्रिका प्राणायाम फिर उसके बाद कपालभाति प्राणायाम करना चाहिए। पहले 7 दिन 3 मिनट और फिर प्रतिदिन 5 मिनट सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें और सांस को बाहर करते समय पेट को अन्दर की तरफ धक्का देना है, इसमें सिर्फ सांस को छोड़ते रहना है। दो सांसों के बीच अपने आप सांस अन्दर चली जायेगी। जान-बूझ कर सांस को अन्दर नहीं लेना है। रोज कम से कम 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करना ही है, यह दृढ़ संकल्प अवश्य करें।
बाह्य प्राणायाम
पहले तीन दिनों तक लगातार 3 मिनट करना है और फिर हर रोज 5 मिनट तक सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें। सांस को पूरी तरह बाहर निकालने के बाद सांस बाहर ही रोके रखने के बाद तीन बन्ध लगाते हैं।
1-जालंधर बन्ध :- गले को पूरा सिकोड़ कर ठोडी को छाती से सटा कर रखना है।
2- उड़ड्यान बन्ध :- पेट को पूरी तरह अन्दर पीठ की तरफ खींचना है।
3- मूल बन्ध :- हमारी मल विसर्जन करने की जगह को पूरी तरह ऊपर की तरफ खींचना है।
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योग में प्राणायाम सांस को नियंत्रित करने की कला को कहते हैं। प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है- प्राण और आयम। प्राण का अर्थ है जीवन रूपी ऊर्जा और आयम शब्द का अर्थ है नियंत्रण। प्राणायाम सांसों के जरिए सकारात्मक ऊर्जा को शरीर के सभी नाड़ियों तक पहुंचाना कहलाता है। प्राणायाम का मतलब प्राण का विस्तार करना है। वैसे तो प्राणायाम कई तरह के होते है लेकिन आज हम आपको कपालभाति प्राणायाम के फायदे और इसके तरीके के बारे में बताएंगे।
पेट से जुड़ी समस्याओं में रामबाण हैं ये योगासन, नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया भी रहती है दुरुस्त
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कपालभाति प्राणायाम
कपाल कहते है मस्तिष्क के अग्र भाग को जबकि भाति का अर्थ है ज्योति से। कपालभाति प्राणायाम लगातार करने से चेहरे का तेज बढ़ता है। कपालभाति प्राणायाम धरती की संजीवनी कहलाता है। कपालभाति प्राणायाम करते समय मूलाधार चक्र पर ध्यान केन्द्रित करना होता है। इससे मूलाधार चक्र जाग्रत होकर कुन्डलिनी शक्ति जाग्रत होने में मदद होती है। कपालभाति प्राणायाम करते समय ऐसा सोचना है कि हमारे शरीर के सारे नकारात्मक तत्व शरीर से बाहर जा रहे हैं।
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21 मिनट पैदल चलने के बाद प्राणायाम में सबसे पहले भस्त्रिका प्राणायाम फिर उसके बाद कपालभाति प्राणायाम करना चाहिए। पहले 7 दिन 3 मिनट और फिर प्रतिदिन 5 मिनट सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें और सांस को बाहर करते समय पेट को अन्दर की तरफ धक्का देना है, इसमें सिर्फ सांस को छोड़ते रहना है। दो सांसों के बीच अपने आप सांस अन्दर चली जायेगी। जान-बूझ कर सांस को अन्दर नहीं लेना है। रोज कम से कम 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करना ही है, यह दृढ़ संकल्प अवश्य करें।
बाह्य प्राणायाम
पहले तीन दिनों तक लगातार 3 मिनट करना है और फिर हर रोज 5 मिनट तक सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें। सांस को पूरी तरह बाहर निकालने के बाद सांस बाहर ही रोके रखने के बाद तीन बन्ध लगाते हैं।
1-जालंधर बन्ध :- गले को पूरा सिकोड़ कर ठोडी को छाती से सटा कर रखना है।
2- उड़ड्यान बन्ध :- पेट को पूरी तरह अन्दर पीठ की तरफ खींचना है।
3- मूल बन्ध :- हमारी मल विसर्जन करने की जगह को पूरी तरह ऊपर की तरफ खींचना है।