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World Contraception Day 2025: कब और क्यों मनाया जाता है विश्व गर्भनिरोधक दिवस? जानिए इतिहास और महत्व
Thu, 25 Sep 2025 01:05 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Thu, 25 Sep 2025 01:05 PM IST
सार
World Contraception Day 2025: विश्व गर्भनिरोधक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि परिवार नियोजन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं विश्व गर्भनिरोधक दिवस का इतिहास, महत्व और इस वर्ष की थीम क्या है।
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गर्भनिरोधक दिवस
- फोटो : adobe
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विस्तार
World Contraception Day 2025: गर्भावस्था जरूरत या मजबूरी नहीं है। भारतीय समाज में जब एक स्त्री गर्भवती होती है तो इसे ईश्वर की इच्छा, उपहार, किस्मत आदि कई शब्दों के साथ जोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि कई बार परिवार में एक के बाद एक कई बच्चे जन्म लेते हैं, क्योंकि लोग "ईश्वरीय इच्छा" को नकारना नहीं चाहते। हालांकि अधिक बच्चे न सिर्फ परिवार पर बोझ बनते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी बाधक होते हैं। उनकी खुद की ग्रोथ कम हो पाती है। वह अच्छा रहन-सहन, खानपान या शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
ऐसे में कपल्स को गर्भनिरोधक उपायों के बारे में पता होना चाहिए। साल 2007 से हर साल विश्व गर्भनिरोधक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को गर्भनिरोधक उपायों के बारे में सही जानकारी देना, मिथकों को तोड़ना और प्रजनन स्वास्थ्य को व्यक्ति की स्वतंत्र पसंद से जोड़ना है। भारत जैसे देश में, जहां परंपराएँ गहरी हैं लेकिन युवाओं की आकांक्षाएं उससे कहीं आगे बढ़ चुकी हैं, यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
वर्तमान में भारत का विकास, जनसंख्या और सामाजिक संतुलन सीधे गर्भनिरोधक जागरूकता से जुड़े हैं। विश्व गर्भनिरोधक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि परिवार नियोजन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं विश्व गर्भनिरोधक दिवस का इतिहास, महत्व और इस वर्ष की थीम क्या है।
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गर्भनिरोधक दिवस का इतिहास
विश्व गर्भनिरोधक दिवस की शुरुआत 2007 में 10 परिवार नियोजन अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने की। इसका नारा है “A world where every pregnancy is wanted” यानी ऐसी दुनिया, जहाँ हर बच्चा सोची-समझी योजना के बाद जन्म ले। हर साल इसकी थीम बदलती है ताकि युवाओं, महिलाओं और समाज की बदलती जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। हर साल गर्भनिरोधक दिवस 26 सितंबर को मनाया जाता है।
भारत में गर्भनिरोधक की हकीकत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। हालांकि पिछले दशकों में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में गिरावट आई है और अब यह 2.0 के आसपास है, फिर भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। साल 2019 की लेंसेट रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 10 में से तीन गर्भधारणाएं अनचाही होती हैं। वहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, 24 फीसदी महिलाएं गर्भनिरोधक चाहती हैं लेकिन उन्हें पहुंच नहीं मिल पाती है। गर्भनिरोधक उपयोग की कमी भी इसका एक कारण है। भारत में परिवार नियोजन की ज़िम्मेदारी लगभग पूरी तरह महिलाओं पर है और पुरुषों की भागीदारी न्यूनतम है। नसबंदी कैंपों में महिलाओं की लंबी कतारें दिखती हैं, जबकि पुरुष नसबंदी नगण्य है। हाल के कुछ वर्षों में शहरों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में जानकारी और साधनों की भारी कमी भी गर्भनिरोधक में बाधा है।
गर्भनिरोधक दिवस का महत्व
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ऐसे में कपल्स को गर्भनिरोधक उपायों के बारे में पता होना चाहिए। साल 2007 से हर साल विश्व गर्भनिरोधक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को गर्भनिरोधक उपायों के बारे में सही जानकारी देना, मिथकों को तोड़ना और प्रजनन स्वास्थ्य को व्यक्ति की स्वतंत्र पसंद से जोड़ना है। भारत जैसे देश में, जहां परंपराएँ गहरी हैं लेकिन युवाओं की आकांक्षाएं उससे कहीं आगे बढ़ चुकी हैं, यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
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वर्तमान में भारत का विकास, जनसंख्या और सामाजिक संतुलन सीधे गर्भनिरोधक जागरूकता से जुड़े हैं। विश्व गर्भनिरोधक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि परिवार नियोजन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं विश्व गर्भनिरोधक दिवस का इतिहास, महत्व और इस वर्ष की थीम क्या है।
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गर्भनिरोधक दिवस का इतिहास
विश्व गर्भनिरोधक दिवस की शुरुआत 2007 में 10 परिवार नियोजन अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने की। इसका नारा है “A world where every pregnancy is wanted” यानी ऐसी दुनिया, जहाँ हर बच्चा सोची-समझी योजना के बाद जन्म ले। हर साल इसकी थीम बदलती है ताकि युवाओं, महिलाओं और समाज की बदलती जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। हर साल गर्भनिरोधक दिवस 26 सितंबर को मनाया जाता है।
भारत में गर्भनिरोधक की हकीकत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। हालांकि पिछले दशकों में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में गिरावट आई है और अब यह 2.0 के आसपास है, फिर भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। साल 2019 की लेंसेट रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 10 में से तीन गर्भधारणाएं अनचाही होती हैं। वहीं नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, 24 फीसदी महिलाएं गर्भनिरोधक चाहती हैं लेकिन उन्हें पहुंच नहीं मिल पाती है। गर्भनिरोधक उपयोग की कमी भी इसका एक कारण है। भारत में परिवार नियोजन की ज़िम्मेदारी लगभग पूरी तरह महिलाओं पर है और पुरुषों की भागीदारी न्यूनतम है। नसबंदी कैंपों में महिलाओं की लंबी कतारें दिखती हैं, जबकि पुरुष नसबंदी नगण्य है। हाल के कुछ वर्षों में शहरों में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में जानकारी और साधनों की भारी कमी भी गर्भनिरोधक में बाधा है।
गर्भनिरोधक दिवस का महत्व
- महिला सशक्तिकरण- गर्भनिरोधक से महिलाएँ अपनी शिक्षा और करियर की योजना बना सकती हैं।
- जनसंख्या संतुलन- नियंत्रित जन्म दर से स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों पर दबाव कम होता है।
- स्वास्थ्य सुरक्षा- अनचाहे गर्भपात और मातृ मृत्यु दर घटती है।
- लैंगिक समानता- पुरुषों की बराबर भागीदारी से स्त्री-पुरुष संबंध संतुलित होते हैं।
- युवा पीढ़ी के लिए शिक्षा- मिथकों और टाबू को तोड़ने के लिए सही जानकारी बेहद आवश्यक है।