फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Travel ›   Vat Savitri Vrat 2024 Ancient And Famous Vat Trees Of India Bargad ki Puja Kab Hai

Vat Savitri Vrat 2024: इन शहरों में हैं भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध वटवृक्ष

Thu, 06 Jun 2024 09:17 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Thu, 06 Jun 2024 09:17 AM IST
सार

वैसे तो भारत में कई वटवृक्ष हैं, जहां इस पर्व के मौके पर महिलाएं पूजा करते नजर आ जाती हैं, लेकिन यहां देश के ऐसे प्राचीन और विशाल वटवृक्ष के बारे में बताया जा रहा है, जो काफी प्रसिद्ध हैं।

विज्ञापन
Vat Savitri Vrat 2024 Ancient And Famous Vat Trees Of India Bargad ki Puja Kab Hai
Vat Savitri Vrat - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Vat Savitri Vrat 2024: इस वर्ष 6 जून को वट सावित्री व्रत की पूजा की जा रही है। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं का त्योहार है, जिसमें वह उपवास करती हैं और फिर वट वृक्ष की पूजा करके सदा सौभाग्यवती का आशीर्वाद मांगती हैं। इस व्रत को लेकर मान्यता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन के लिए यमराज की पूजा बरगद पेड़ के नीचे की थी। तब से सुहागिन अपने पति की लंबी आयु की कामना से बरगद यानी वटवृक्ष के नीचे पूजा करती हैं। वैसे तो भारत में कई वटवृक्ष हैं, जहां इस पर्व के मौके पर महिलाएं पूजा करते नजर आ जाती हैं, लेकिन यहां देश के ऐसे प्राचीन और विशाल वटवृक्ष के बारे में बताया जा रहा है, जो काफी प्रसिद्ध हैं।

विज्ञापन


गया का वट वृक्ष

बिहार के गया में प्राचीन, पवित्र पुनीत वट वृक्ष है, जिसे अक्षयवट कहा जाता है। यह अक्षयवट गया-बोधगया मार्ग पर स्थित माऊनपुर मोड़ से आधा किमी दूर है। इस स्थान पर एक तरफ गदालाल वेदी और दूसरी ओर माता मंगला गौरी का प्रसिद्ध मंदिर व भव्य कूट पर्वत है। कहा जाता है कि गया के अक्षयवट का उद्धार भगवान ब्रह्मा ने किया था और माता सीता ने इस वृक्ष को अक्षय होने का वरदान दिया था।
विज्ञापन


वृंदावन का वट वृक्ष

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना किनारे दर्जन स्थित मध्य वंशीवट घाट है, जहां पर महान तरु के दर्शन हो सकते हैं। इस स्थान पर भी प्राचीन वटवृक्ष है। यहां पर श्रीमाधव का शास्त्रोमुक्त स्थान है। मान्यता है कि यहां वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु ने दर्शन किए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रयागराज का वट वृक्ष

संगम नगरी प्रयागराज में त्रिवेणी संगम से थोड़ी दूरी पर अकबर-कालीन विशाल किले के अंदर विशाल वट वृक्ष है, जिसे मनोरथ वट कहा जाता है। उत्तरकालीन पुराणों में प्रयाग के इस मनोरथ वट का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि पहले किले की पातालपुरी गुफा में एक सूखी डाली गाड़कर उसमें कपड़ा लपेट के अक्षयवट के रूप में पूजा होती थी, लेकिन बाद में यमुना किनारे इस की मूल स्थिति का ज्ञान हुआ। महापुण्यकारी इस वट वृक्ष के दर्शन चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी किया था।

पुरी का वटवृक्ष

जगन्नाथ पुरी में प्राचीन काल में नीलांचल पर्वत पर सबकी इच्छा पूर्ण करने वाला कल्पतरु है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दौरान कुछ समय के लिए यहां रहे थे। इस कारण इस स्थान को वनस्थली भी कहा जाता है।


पंचवटी

पंचवटी वह स्थान होता है, जहां पीपल, बेल, वट, हड़ और अशोक ये पांच वृक्ष लगे होते हैं। छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में भी एक पंचवटी स्थित है, जो जगदलपुर से 62 किमी दूरी पर है। यहां स्थित वटवृक्ष भी काफी प्राचीन और प्रसिद्ध है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed