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Gujarat To Maharashtra: सीमाओं से परे दादी की रसोई, गुजरात में बनाती हैं खाना और महाराष्ट्र में खाती हैं

Wed, 27 Aug 2025 04:42 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 27 Aug 2025 04:42 PM IST
सार

Gujarat To Maharashtra: ये कहानी 70 वर्षीय मगनीबेन की है। लगभग 20 साल पहले पति के निधन के बाद से वह यहां अकेली रह रही हैं। उनका जीवन बड़ा ही दिलचस्प है, वह घर के गुजरात वाले हिस्से में खाना पकाती हैं और फिर महाराष्ट्र वाले हिस्से में बैठकर खाती हैं। यही उनकी दिनचर्या है। 

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70 Year Old Grandma Cooks in Gujarat and Door in Maharashtra Know Viral Story Explained in Hindi
गुजरात महाराष्ट्र सीमा पर रहने वाली महिला की कहानी - फोटो : AI Image

विस्तार

Gujarat To Maharashtra: भारत की मिट्टी में सबसे बड़ी खूबसूरती है यहां की विविधता। हर गांव, हर शहर अपनी अलग संस्कृति, परंपरा और कहानियां समेटे हुए है। इन्हीं कहानियों में से एक है गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर रहने वाली 70 साल की दादी की। इनकी जिंदगी इतनी अनोखी है कि सुनकर लगता है जैसे किसी फिल्म की कहानी हो। दादी का घर ऐसा है जहां रसोई गुजरात में है और आंगन महाराष्ट्र में। यानी वे खाना पकाती हैं गुजरात की तरफ खड़े होकर और महाराष्ट्र में बैठकर खाती हैं। यह न सिर्फ एक अनोखा किस्सा है, बल्कि दो राज्यों की संस्कृति, स्वाद और अपनापन को जोड़ने वाली मिसाल भी है।

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कौन हैं दो राज्यों के बीच बसी 70 वर्षीय दादी

ये कहानी 70 वर्षीय मगनीबेन की है। लगभग 20 साल पहले पति के निधन के बाद से वह यहां अकेली रह रही हैं। उनका जीवन बड़ा ही दिलचस्प है, वह घर के गुजरात वाले हिस्से में खाना पकाती हैं और फिर महाराष्ट्र वाले हिस्से में बैठकर खाती हैं। यही उनकी दिनचर्या है। दोनों ओर के गांव वाले उन्हें अपना पड़ोसी नहीं, बल्कि परिवार का ही हिस्सा समझते हैं। हालांकि उनका नाम गुजरात मतदाता सूची में दर्ज है।
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गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर पर बसा अनोखा घर

दादी का घर सीमा पर ऐसा बना है कि एक दीवार गुजरात की ओर और दूसरी महाराष्ट्र की ओर है। रसोईघर गुजरात वाले हिस्से में आता है, जबकि बैठक और आंगन महाराष्ट्र की तरफ है। इसीलिए हर दिन उनके हाथों से खाना पकाने की शुरुआत गुजरात से होती है और भोजन का आनंद महाराष्ट्र में बैठकर लिया जाता है।
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दो संस्कृतियों का संगम

उनके जीवन में दोनों राज्यों की परंपराएं, भाषाएं और त्योहार सहज रूप से घुल-मिल गए हैं। वह महाराष्ट्र और गुजरात, दोनों की संस्कृति को बराबर सम्मान देती हैं। यही वजह है कि वह गांव के लिए एक आदर्श नागरिक बन गई हैं। इस घर की बनावट भी बहुत खास है। इसमें गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों की पारंपरिक वास्तुकला की झलक मिलती है। यही कारण है कि यह घर देखने के लिए कई लोग दूर-दूर से आते हैं। पर्यटक यहां आकर मगनीबेन से मिलते हैं और इस अनोखे अनुभव को साझा करते हैं।


मगनीबेन का घर यह साबित करता है कि सीमाएँ केवल नक्शों पर होती हैं, इंसानों के दिलों में नहीं। यह घर और उनकी जीवनशैली सचमुच एकता और सौहार्द का जीवंत प्रतीक है।

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