Sunita Williams: गीता का पाठ-समोसे का स्वाद, जानें सुनीता विलियम्स के बचपन के शौक और कहानी
आइए जानते हैं भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के बचपन, उनके भारत से जुड़ाव और उनके इस करियर को चुनने तक के सफर के बारे में।
विस्तार
Sunita Williams : भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स लगभग 9 महीने बाद स्पेस स्टेशन से सकुशल पृथ्वी पर लौट आई हैं। 5 जून 2024 को सुनीता साथी बैरी विल्मोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से आईएसएस पहुंची थीं। उनका आठ दिन लंबा मिशन 9 महीनों से ज्यादा समय के लिए खिंच गया। सुनीता विलियम्स इसके पहले दो बार अंतरिक्ष यात्रा कर चुकी हैं। खास बात ये है कि अंतरिक्ष पर सबसे ज्यादा समय तक स्पेस वाॅक करने वाली सुनीता विलियम्स ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। हालांकि चौंकाने वाली बात ये है कि वह शुरू से एस्ट्रोनॉट नहीं बनना चाहती थीं। बचपन में उन्होंने अपने करियर के लिए दूसरा क्षेत्र चुना था लेकिन नसीब को कुछ और ही मंजूर था। आइए जानते हैं भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के बचपन, उनके भारत से जुड़ाव और उनके इस करियर को चुनने तक के सफर के बारे में।
सुनीता विलियम्स का बचपन और भारतीय जुड़ाव
सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में 19 सितंबर 1965 को हुआ था। उनके पिता का नाम डा. दीपक पांड्या है जो कि भारतीय हैं। सुनीता के पिता का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के गांव झूलासन में हुआ था। अहमदाबाद से उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की और बाद में भाई के पास अमेरिका चले आए। वह पेशे से एक न्यूरोएनाटोमिस्ट हैं। अमेरिका में उन्होंने स्लोवेनियाई मूल की उर्सुलिन बोनी से विवाह किया और तीन बच्चे हुए, जिसमें से एक सुनीता हैं।
पिता से मिली परंपरा
हिंदू भारतीय पिता और कैथोलिक मां की परवरिश में सुनीता ने सभी धर्मों का सम्मान करना सीखा। डॉक्टर पंड्या हर रविवार को बच्चों को भगवत गीता का पाठ सुनाते और चर्च लेकर जाते। सुनीता ने बचपन से पिता द्वारा रामायण और महाभारत की कहानियां सुनी, जिससे उनमें भारतीय परंपरा से जुड़ाव विकसित हुआ। यही कारण है कि सुनीता अपने अंतरिक्ष मिशन के बाद 2007 और 2013 में दो बार पृतक स्थल झूलासन की यात्रा पर गईं। वहीं अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान गीता साथ लेकर गई थीं।
सुनीता विलियम्स का सपना
सुनीता को बचपन से व्यायाम और खेलकूद में रुचि थी। वह तैराकी करना बहुत पसंद करती थीं। भाई -बहन के साथ वह रोज सुबह शाम दो घंटे तैराकी करती। महज छह साल की उम्र में उन्होंने कई तैराकी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते। शुरुआत में सुनीता ने पशु लगाव के कारण पशु चिकित्सक बनने का सपना देखा। इसके लिए उन्होंने आवेदन भी किया हालांकि पसंदीदा कॉलेज में सीट नहीं मिल सकी।
अमेरिकी नौसेना में हुईं शामिल
बाद में भाई के सुझाव पर सुनीता ने 1983 में अमेरिकी नौसेना अकादमी में दाखिला लिया और 1987 में भौतिक विज्ञान में डिग्री हासिल की। अकादमी से ट्रेनिंग के बाद 1989 में प्रशिक्षु पायलट के रूप में नौसेना में शामिल हुईं। उन्होंने 30 से अधिक विभिन्न विमानों में 3000 से ज्यादा उड़ान घंटे दर्ज किए थे। पति माइकल विलियम्स से पहली मुलाकात भी नौसेना अकादमी में ही हुई, जहां दोनों को प्यार हुआ और बाद में शादी कर ली।
कैसे मिली अंतरिक्ष यात्री बनने की प्रेरणा
1993 में मैरीलैंड स्थित नौसेना परीक्षण पायलट स्कूल में प्रशिक्षण लेने के दौरान उन को जॉनसन स्पेस सेंटर जाने का मौका मिला और चंद्रमा पर उतर चुके अंतरिक्ष यात्री जॉन यंग संग काम करने का मौका मिला। उनसे प्रेरित होकर सुनीता ने अंतरिक्ष पर उड़ान भरने का सपना देखा।
अंतरिक्ष यात्रा के लिए नासा में आवेदन किया लेकिन नासा ने पहली बार में इसे अस्वीकार कर दिया। हालांकि सुनीता ने फिर से प्रयास करते हुए 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग प्रबंधन में मास्टर डिग्री प्राप्त की और 1997 में फिर आवेदन किया।इस बार नासा ने उनका आवेदन स्वीकार किया और 1998 में प्रशिक्षु अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना। आठ साल बाद 9 दिसंबर 2006 में पहली बार उन्हें अंतरिक्ष यात्रा का मौका मिला।
समोसा और गीता साथ लेकर गईं थीं अंतरिक्ष पर
सुनीता ने भारत दौरे के दौरान दिल्ली के नेशनल साइंस सेंटर में छात्रों से मुलाकात की और अपने अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव बांटे। सुनीता ने बताया कि जब वह पहली बार अंतरिक्ष यात्रा पर गईं तो काफी नर्वस थीं। वह अपने साथ समोसे (भारतीय स्नैक्स) और पढ़ने के लिए उपनिषद और गीता लेकर गई थीं।