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'मैं विकलांग हूं, वो नहीं, हम लिव-इन रिलेशनशिप में रहे'

Fri, 11 Jan 2019 02:28 PM IST
मंजू ममगाईं लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला Published by: मंजू ममगाईं Updated Fri, 11 Jan 2019 02:28 PM IST
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When disabled girl decided to stay in live in relationship
- फोटो : file photo

कभी-कभी वो यह भी भूल जाता था कि मेरे पास एक हाथ नहीं है।अगर आपने खुद को वैसे ही स्वीकार किया है जैसे आप हैं तो आपके आस-पास के लोग भी आपको आसानी से स्वीकार कर लेते हैं।वो एक सशक्त आदमी थे, एक संपूर्ण व्यक्ति, उन्हें कोई भी लड़की मिल सकती थी लेकिन वो मेरे साथ थे। हम एक साथ एक ही घर में बिना शादी रहना शुरू कर चुके थे लेकिन शादी किए बिना एक साथ रहने का फैसला आसान नहीं था।इसकी शुरुआत तब हुई जब मैंने मां की मेरी शादी की इच्छा को पूरा करने के लिए एक वैवाहिक वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई।

मैं 26 साल की हो गई थी और मेरी मां को लगा कि यह शादी का सही समय है।बचपन में एक दुर्घटना के दौरान मेरा एक हाथ कट गया था, इसलिए मैं अपनी शादी को लेकर उसकी चिंता को समझ सकती थी।एक दिन, मुझे वैवाहिक साइट पर एक प्रस्ताव मिला। यह आदमी पेशे से इंजीनियर और मेरी ही तरह एक बंगाली भी था हालांकि वो किसी दूसरे शहर का रहने वाला था।

मुझे दो बुरे रिश्तों का अनुभव था और ये मुझे अच्छे से पता था

When disabled girl decided to stay in live in relationship
- फोटो : file photo

मुलाकात का फैसला

लेकिन मैं कुछ भी तय कर पाने में असमर्थ थी इसलिए मैंने लिखा, अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूं। इसके बावजूद उसका जबाव आया, 'फिर भी, हम बात कर सकते हैं।'मैं एक फ्लैट में दो दोस्तों के साथ रहती थी। उन्होंने मुझसे कहा कि वो व्यक्ति धोखेबाज हो सकता है, जो मेरा इस्तेमाल करने के बाद मुझे छोड़ सकता है।

मुझे दो बुरे रिश्तों का अनुभव था और ये मुझे अच्छे से पता था कि अगली बार मुझे क्या नहीं करना है।वास्तव में मैं नए रिश्ते के लिए तैयार भी नहीं थी, लेकिन मैं अपने जीवन को अकेले भी नहीं जीना चाहती थी। यही कारण है कि मैंने उनसे बातचीत शुरू कर दी और उनका नाम मेरे मोबाइल में 'टाइमपास' के नाम से सेव किया। फिर एक दिन, हमने मुलाकात का फैसला किया। मैंने उनसे पहले ही बता रखा था कि मेरा एक हाथ नहीं है।फिर भी मेरे मन में उनकी प्रतिक्रिया को लेकर डर था। वो फरवरी का महीना था। मैं अपने ऑफिस के कपड़ों में थी। मैंने केवल लिपिस्टिक और आइलाइनर लगा रखे थे।

When disabled girl decided to stay in live in relationship

हम सड़क के किनारे घूमते हुए बतियाते रहे और इस दौरान एक-दूसरे में कई चीजें समान पाईं। धीरे-धीरे, हम दोस्त बन गए।वो शांत व्यक्ति थे और अपने तरीके से मेरा ख्याल रखा करते थे। वो यह निश्चित करते थे कि मैं सुरक्षित अपने घर लौटूं।कभी-कभी तो वो देर होने के बावजूद मुझे घर छोड़ते थे। अगर कोई और उपाय नहीं होता और मुझे अकेले जाना पड़ता तो वो कहते कि रात 10 बजे से पहले घर पहुंच जाऊं।मुझे नहीं पता था कि मैं एक अच्छी पत्नी बनूंगी या नहीं, लेकिन उनमें एक अच्छे पति के सभी गुण मौजूद थे।

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लिव-इन रिलेशनशिप

मुझे यह नहीं पता था हमारा यह रिश्ता किस ओर बढ़ रहा था, लेकिन हम दोनों को एक-दूसरे का साथ पसंद आने लगा था।एक बार जब मैं बीमार पड़ी तो वे दवाएं लेकर आए और अपने हाथों से खिलाया। वो पहला मौका था जब उन्होंने अपनी बाहों में मुझे लिया था। वो एक अद्भुत दिन था।उसके बाद, जब हम टहलने जाते, एक-दूसरे का हाथ थामते थे- मेरा दाहिना हाथ। कुछ महीनों के बाद, फ्लैट में साथ रहने वाली मेरी साथी की शादी हो गई।मेरे लिए समूचे फ्लैट का अकेले किराया दे पाना मुश्किल था। उसी दौरान, मेरे वैवाहिक साइट के मित्र के फ्लैट के साथ वाला कमरा खाली हुआ। मैं वहां चली गई।

 

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When disabled girl decided to stay in live in relationship

वास्तव में, यह दिखावा मात्र था कि हम साथ नहीं रह रहे, जबकि हम ऐसा ही कर रहे थे लेकिन जब मेरी मां वहां मुझसे मिलने आईं तो उन्हें शायद ये समझ आ गया कि हम दोनों एक साथ रह रहे हैं।अब हम एक दूसरे को और भी करीब से जानने लगे।इस दौरान मेरी विकलांगता से जुड़े मेरे सभी डर गायब हो गए, जब उन्होंने देखा कि मैं घर के सभी काम आसानी से कर लेती हूं।फिर हमने जॉब बदला और घर भी।इस बार हम तैयार थे।हम जानते थे कि एक लिव-इन रिलेशन केवल यौन इच्छाओं को पूरा करने को लेकर नहीं है।इसका मतलब है कि पूरे जीवन को अच्छी तरह एक-दूसरे से साझा करना। यह एक दूसरे का साथ और स्वीकृति का वादा है।शायद यही कारण है कि हमारी अदालत ने भी इसे मान्यता दी है।उन्हें खाना पकाना नहीं आता था, और ना ही मुझे।लेकिन, धीरे-धीरे मैंने सबकुछ सीख लिया।

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