एक सेक्स वर्कर के प्यार और आजादी की कहानी...
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पश्चिम बंगाल के 24 परगना से लाई गई अनीता की ज़िंदगी कई पथरीले रास्तों से होकर गुजरी थी। वह बताती हैं, "मेरे घर में मां-बाप और एक छोटी बहन और भाई थे। घर में हमेशा पैसों की किल्लत रहती थी। ऐसे में कमाने वाले एक और हाथ की जरूरत थी। इसलिए मैंने सोचा कि मैं भी कमा लूं, तो घर में कुछ मदद हो जाएगी।' तब गांव के ही एक आदमी ने मुझे शहर में नौकरी दिलाने की बात की। उसने मेरे मां-बाप से भी कहा था कि वो कोई काम दिला देगा और अच्छे पैसे मिलेंगे। करीब पांच साल पहले मैं उसके साथ आ गई। लेकिन, कुछ दिन टाल मटोल करने के बाद उसने मुझे कोठे पर बेच दिया।"
उस वक्त अनीता के लिए तो जैसे दुनिया ही पलट गई। कुछ दिन तो उसे समझ ही नहीं आया कि उसके साथ हुआ क्या है। वो उन लोगों से जाने देने की मिन्नतें करती रही लेकिन उसके लिए किसी का दिल नहीं पसीजा। नौकरी करने आई अनीता के लिए यौन कर्मी बनना, मौत को गले लगाने जैसा था। शुरुआत में अनीता ने इसका बहुत विरोध किया। उनके साथ मारपीट तक हुई। जान से मारने, चेहरा खराब करने की धमकियां दी गईं। अनीता कहती हैं, "मेरे पास कोई और रास्ता नहीं था। एक तो मैं उस जगह के लिए नई थी। वो जगह मेरे लिये जेल बन गई थी। मेरे साथ जबर्दस्ती भी की गई। ताकि ग्राहकों के लिए मैं तैयार हो जाऊं। अब मरने या हां बोलने के सिवा मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। मैं टूट गई और इस धंधे में खुद को सौंप दिया।"
लेकिन, अनीता की जिंदगी में तब बदलाव आया जब उनकी मुलाकात मनीष (बदला हुआ नाम) से हुई। वो कहती हैं कि कब मनीष और उनके बीच एक खास रिश्ता बन गया दोनों में से किसी को पता ही नहीं चला। मनीष आए दिन मुझसे मिलने आने लगे। वो मुझसे बातें किया करता था और मुझे अच्छा लगता था। फिर एक दिन अचानक अपने दिल की बात मनीष ने अनीता के सामने रख दी। अनीता को कोठे के नर्क से छुटकारा चाहिए था। मनीष में उसे सहारा दिखा। लेकिन, मनीष पर आसानी से भरोसा भी नहीं हो पा रहा था। अनीता पहले के धोखे से थोड़ा संभल गई थी। इसलिए संभल कर अनीता ने मनीष से कोठे से निकलने की अपनी इच्छा जाहिर कर दी। कोठे के लोगों को मनीष के बार-बार आने के बारे में पता था।
लेकिन, उनके लिए ऐसा होना बहुत अजीब नहीं था क्योंकि कई बार ऐसे ग्राहक आते हैं जिन्हें कोई खास लड़की पसंद आ जाती है। तब मनीष ने एक एनजीओ से संपर्क किया। ये संस्था मेरठ में ही काम करती है और वेश्यावृत्ति में फंसी लड़कियों को छुड़ाने और पुनर्वास में मदद करती है। अक्सर कोठे पर जाने वाले ग्राहक ही उनके मुखबिर होते हैं।
एनजीओ के संचालक अतुल शर्मा ने बताया, "मनीष मेरे पास आया था। उसने बताया कि वह कोठे पर एक लड़की से प्यार करता है और उसे निकालना चाहता है। मैंने उससे पूछा कि कोठे से लाने के बाद क्या होगा। मनीष ने कहा कि वह अनीता से शादी करना चाहता है।'' अतुल कहती हैं कि उनके लिए पहली बार में भरोसा करना थोड़ा मुश्किल था। उन्होंने कुछ दिनों बाद आने के लिए कहा ताकि देख सकें कि उसके इरादे कितने पक्के हैं। मनीष दो दिन बाद फिर आया और उसने वही बात कही। अब अतुल शर्मा को कुछ यकीन हुआ।