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Mothers day special: मां से जुड़ी 6 कहानियां, जब उनकी एक सीख ने बदल दी जिंदगी

Fri, 11 May 2018 06:52 PM IST
नीलम शुक्ला/ नेहा सजवाण
नीलम शुक्ला/ नेहा सजवाण Updated Fri, 11 May 2018 06:52 PM IST
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many mothers stories on mothers day
mothers day

जिंदगी की पाठशाला में सीख की जितनी कहानियां होती हैं, उनमें से ज्यादातर मां से ही शुरू होती हैं। मां ने एक सीख दी और बदल गई जिंदगी। इस बार कुछ ऐसी ही कहानियां हैं, जहां हम सबके लिए कोई न कोई सीख जरूर है, क्योंकि मां तो मां होती है।

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1-रामायण के दो पन्ने
पद्मश्री शोभा दीपक सिंह, विख्यात संस्कृतिकर्मी


मेरी मां, सुमित्रा चरत राम पहली बार वर्ष 1969 में मुझे श्रीराम भारतीय कला केंद्र में लेकर आई थीं। तब से अब तक यह कला केंद्र मेरी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है। मैं जो जीवन में करना चाहती थी, वही मैंने किया। मेरी मां ने मुझे कभी कुछ करने से रोका नहीं। हर काम में उन्होंने मेरा साथ दिया। उनके इसी भरोसे की वजह से आज मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं। मेरी मां हमेशा कहती थी कि सभी को अपने लिए चुनने की आजादी मिलनी चाहिए, वही आजादी मुझे भी मिली। कोरियोग्राफी, फोटोग्राफी, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग जैसी कई चीजों में मैंने अपनी रूचि दिखाई और मेरी मां ने भी मेरा हौसला बढ़ाया। मुझे आज भी याद है, जब मैंने एक प्रोडक्शन तैयार किया था। उसमें बताया गया था कि न ही सारे कौरव खराब थे और न ही सारे पांडव अच्छे थे। इस रचना को सभी ने काफी पसंद किया, लेकिन मेरी मां को यह पसंद नहीं आई। यह बातें सिर्फ मेरी मां की राय तक ही सीमित रहीं, उन्होंने इसे कभी मुझ पर थोपने की कोशिश नहीं की। उनसे मिली रामायण की शिक्षा मेरे अंदर अभी तक बनी हुई है। यह उसी शिक्षा का असर है कि आज भी मैं प्रतिदिन रामायण के दो पन्नों का पाठ करती हूं। 
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2-रोज का गुनगुनाना
अर्पणा कौर, प्रसिद्ध चित्रकार


मां तो मेरी जिंदगी में एक गीत की तरह है। रोज की प्रार्थना। रोज का गुनगुनाना। आज भी गाती हूं। रही बात जिंदगी में सीख की, तो मां से ही तो सब कुछ सीखा है। हम सब तो सांस लेना भी मां से ही सीखते हैं। रूठना सीखते हैं। हंसना सीखते हैं। लेकिन एक सीख जो मैंने, अपनी मां से सीखी, वह है संघर्ष। मेरी मां आज भले ही मशहूर साहित्यकार हों, लेकिन इसके पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। आगे बढ़ने के लिए उन्होंने जिस ईमानदारी से संघर्ष किया, वह मेरी जिंदगी के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ की तरह हो गया। रात-रात भर जागकर वह अनुवाद करती रहती थीं, कहानी लिखती रहती थीं। चित्रकला की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए मैंने भी यही रास्ता चुना। ईमानदारी से मेहनत और संघर्ष। मेरी मां हमेशा एक और बात कहती थी, वह थी समय की पाबंदी। वह कहती थीं, 'मेहनत तभी खिलकर दिखेगी, अगर आप समय की पाबंद हैं।' इस सीख पर ही मेरी चित्रकला की दुनिया बनी और बसी हुई है। आज भी मां मेरे साथ हैं और आज भी मैं उनसे बहुत कुछ सीख रही हूं।
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3-खाना मत पकाती रह जाना!
मैत्रेयी पुष्पा, प्रसिद्ध लेखिका


मेरी मां की शादी 17 साल की उम्र में हो गई थी। घर-गृहस्थी के चलते वह खुद नहीं पढ़ सकीं, तो उन्होंने मुझे पढ़ाने की ठानी। मुझे पढ़ने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन मेरी मां हमेशा मुझे पढ़ाई को लेकर डांटा करती थीं। मेरी मां कहती थी कि शादी एक बंधन है, जो मैंने अपनी किताब 'कस्तूरी कुंडल बसै' में लिखा है। मैं शादी नहीं करना चाहती थी, पर कॉलेज में कुछ सहेलियों के कहने पर मैं अपनी मां से शादी की जिद करने लगी। ऐसी बातों पर अक्सर औरों की मां खुश होती हैं, पर मेरी मां ने मुझे बहुत डांटा। उन्होंने कहा, तुम क्यों अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही हो? पढ़ने की उम्र है, पढ़ो और आगे बढ़ो। पर मैं भी अपनी जिद पर अड़ी रही। आखिरकार मेरी मां को मेरी बात माननी पड़ी और मेरी शादी हो गई। मां की एक बात मुझे आज भी याद है, जो मेरी शादी के दौरान उन्होंने मुझसे कही थी। 'ससुराल में जाकर किताबें पढ़ना, सिर्फ खाना मत पकाती रह जाना।' उनकी इस बात को मैंने अपने जीवन में अपनाया।

4-छत से कूदो मगर...
पुनीता शर्मा, सुपरिचित कथक नृत्यांगना 


मेरे परिवार में कोई कथक से जुड़ा नहीं था, लेकिन मैं कथक को लेकर काफी जुनूनी थी। कई बार मेरे इस जुनून को लेकर मेरे परिवार वालों को कई बातें भी सुननी पड़ी। इस दौरान कई बार मेरे मन में भी कथक को छोड़ देने का विचार आया, लेकिन मेरी मां ने हमेशा मेरा साथ दिया। मेरी मां हमेशा मेरा सबसे बड़ा सहारा रही हैं। उन्होंने मुझे हमेशा अपने सपनों को पूरा करने और जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी। उनकी यह बात मैंने गांठ बांध ली और कथक सीखा। बचपन में मैं बहुत जिद्दी थी। मैं जिस चीज की मांग करती थी, उसे हर हाल में लेकर रहती थी। एक बार मैंने अपनी मां से कोई जिद की, लेकिन मेरी मां ने मेरी वह जिद पूरी नहीं की। मुझे बहुत गुस्सा आया। मैने अपनी मां से कहा कि आप अगर मेरी यह बात नहीं मानेंगी, तो मैं छत से कूद जाऊंगी। मेरी मां ने कहा, 'ठीक है छत से कूद जाओ, लेकिन ध्यान रखना किसी के ऊपर मत गिर जाना, कहीं दूसरे को चोट न लग जाए।' पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया कि वह मेरी मां है और उन्हें मेरे बजाए किसी और को चोट न लगे इसकी ज्यादा चिंता है। लेकिन आज जब मैं उस बात को याद करती हूं, तो मुझे अहसास होता है कि एक मां जानती है कि बच्चों के लिए क्या सही है और क्या गलत। जरूरी नहीं है कि अच्छे मां-बाप सिर्फ वही हैं, जो बच्चों की हर ख्वाहिश को पूरी करें। वे जानते हैं कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत। आपकी पहली गुरु आपकी मां ही होती है।  
 

5-पकाओ तो दिल से...
कनिका माहेश्वरी, लोकप्रिय टीवी कलाकार


मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरी मां सुधा माहेश्वरी हैं। मेरी नजर में मेरी मां सुपर वुमन हैं। वे बहुत अच्छी कुक हैं। एक बात जो मैंने खासतौर पर उनसे सीखी है, वह है खाना बनाने का हुनर। मां ने मुझे कई बातें सिखाई थी। यह बातें हैं, तो छोटी पर अगर सच में इनका पालन करो, आपका पूरा जीवन संवार सकती हैं। मुझे आज भी याद है, जब मां ने मुझे कहा था कि जब भी खाना पकाओ, तो दिल से पकाना न कि दिमाग से। क्योंकि वह खाना ही है, जिसके लिए दुनिया में हर कोई इतनी मेहनत करता है। अगर हम खाना अच्छे मन से बनाते हैं, तो वह तन पर लगता है। आज मैं काफी व्यस्त रहती हूं। घर पर बहुत ज्यादा काम नहीं कर पाती हूं, पर जब भी मैं खाना बनाती हूं, तो पूरे मन से बनाती हूं। ताकि मेरा बनाया खाना, जो भी खाए वह उसके तन और मन दोनों पर लगे। मेरी मां की बातें मेरे लिए हमेशा एक सीख की तरह रहीं हैं। उनकी सिखाई हर एक बात को मैं अपने जीवन में उतारने की कोशिश करती हूं। मैं उनके जैसी परफेक्ट तो नहीं बन सकती, लेकिन इस चीज की हमेशा कोशिश करती हूं कि मेरे किए हर काम पर मेरी मां को नाज हो। मैं अपनी मां को बहुत प्यार करती हूं और मदर्स डे के अवसर पर मैं उनको दिल से सलाम करती हूं।
 

6-दो जवाब और जरूर दो!
गुल्की जोशी, लोकप्रिय टीवी कलाकार


मेरी मां अर्चना शितरे जोशी मेरी सबसे बड़ी आलोचक हैं। मेरी मां थिएटर आर्टिस्ट और टीवी शो राइटर हैं। शायद इसी वजह से बचपन से ही अभिनय के प्रति मेरा स्वाभाविक रुझान रहा है। मां के कई गुण जन्मजात रूप से मुझे मिले हैं। मेरा व्यवहार और मैं दिखने में बिल्कुल मां की तरह हूं। मां से मैंने बहुत कुछ सीखा है कि कैसे पेशेवर और व्यक्तिगत जिंदगी को अलग रखकर जीवन को संवारा जा सकता है। मैं सेहत को लेकर बेहद जागरूक हूं, जो मम्मी ने सिखाया है। पर इन सबसे बड़ी सीख, जो उन्होंने मुझे दी है, वह है आत्मविश्वास। यह मम्मी की सही परवरिश का ही नतीजा है कि आज मैं इतनी आत्मविश्वासी हूं। यह उनके हौसले का ही नतीजा है कि बचपन में डरपोक रहने वाली गुल्की आज इस इंडस्ट्री में मजबूती के साथ खड़ी है। वह हमेशा मुझसे कहती थीं कि अगर कोई तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव करता है, तो तुम्हें उसी वक्त उसका करारा जवाब देना चाहिए।
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