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क्या करें... अगर मिल जाए बेटे की उम्र का बॉस
एलिजाबेथ गारोन/ बीबीसी
Updated Fri, 08 Jul 2016 02:13 PM IST
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- फोटो : gettyimages
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हम में से ज्यादातर लोग जहां भी काम कर रहे हैं, वहां बॉस उम्र में बड़े होते हैं। मगर, दुनिया तेजी से बदल रही है। अब कम उम्र के लोग भी मैनेजर, टीम लीडर बनाए जा रहे हैं।
क्या बेहतर है - अपने से कम उम्र के बॉस के साथ काम करना या फिर उम्रदराज बॉस के साथ काम करना?
भारत में हुए एक सर्वे में 80 फीसदी लोगों ने कहा कि वो खुद से ज्यादा उम्र के बॉस के साथ काम करना पसंद करेंगे। और अमरीका में 45 फीसद लोगों को ऐसा लगता है कि युवा टीम लीडर के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल है।
मगर ये राय हमेशा सही हो, ऐसा नहीं है। कई बार युवा बॉस के साथ काम करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। अमरीका की हॉली पावलिका की ही मिसाल लीजिए। वो कई ऐसे मैनेजरों के साथ काम कर चुकी हैं, जो उम्र में उनसे छोटे थे। लेकिन उन्हें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।
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हॉली कहती हैं, "युवा बॉस के साथ काम करने से आप भी जवां महसूस करते हैं। शर्त बस एक है कि आप उसका सम्मान करें। और, वो भी आपका लिहाज करे। फिर उम्र कम हो या ज्यादा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको अपने पेशे में खुद को सबसे आगे रखने की फिक्र करनी है। बॉस की उम्र का इससे कोई वास्ता नहीं।"
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क्या बेहतर है - अपने से कम उम्र के बॉस के साथ काम करना या फिर उम्रदराज बॉस के साथ काम करना?
भारत में हुए एक सर्वे में 80 फीसदी लोगों ने कहा कि वो खुद से ज्यादा उम्र के बॉस के साथ काम करना पसंद करेंगे। और अमरीका में 45 फीसद लोगों को ऐसा लगता है कि युवा टीम लीडर के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल है।
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मगर ये राय हमेशा सही हो, ऐसा नहीं है। कई बार युवा बॉस के साथ काम करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। अमरीका की हॉली पावलिका की ही मिसाल लीजिए। वो कई ऐसे मैनेजरों के साथ काम कर चुकी हैं, जो उम्र में उनसे छोटे थे। लेकिन उन्हें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा।
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हॉली कहती हैं, "युवा बॉस के साथ काम करने से आप भी जवां महसूस करते हैं। शर्त बस एक है कि आप उसका सम्मान करें। और, वो भी आपका लिहाज करे। फिर उम्र कम हो या ज्यादा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको अपने पेशे में खुद को सबसे आगे रखने की फिक्र करनी है। बॉस की उम्र का इससे कोई वास्ता नहीं।"
युवा मैनेजर को भी थोड़ी परेशानी होती है, मातहतों के खुद से ज्यादा उम्र का होने पर
अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते लोगों की औसत उम्र ज्यादा हो रही है। लोग लंबी उम्र तक काम कर रहे हैं। ऐसे में कई बार उन्हें अपने से कम उम्र के टीम लीडर के नीचे भी काम करना होगा।
कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आपका मैनेजर आपके बेटे या बेटी की उम्र का हो।
ऐसे में पहली बात तो ये याद रखिए कि इससे सिर्फ आपको अजीब नहीं महसूस होता। युवा मैनेजर को भी थोड़ी परेशानी होती है, मातहतों के खुद से ज्यादा उम्र का होने पर। जानकार सलाह देते हैं कि ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने युवा मैनेजर से बात करें। इसमें कोई शिकायत का भाव नहीं होना चाहिए कि आपको कम उम्र से परेशानी है।
बल्कि बात कुछ यूं रखी जानी चाहिए जिससे ये लगे कि आपको टीम के परफॉर्मेंस की फिक्र है। तो आप अपनी बात कुछ यूं रख सकते हैं, "मुझे लगता है कि ये हम दोनों के लिए अजीब है। मगर, इस हालात से कैसे बेहतर नतीजे निकाले जा सकते हैं?"
कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आपका मैनेजर आपके बेटे या बेटी की उम्र का हो।
ऐसे में पहली बात तो ये याद रखिए कि इससे सिर्फ आपको अजीब नहीं महसूस होता। युवा मैनेजर को भी थोड़ी परेशानी होती है, मातहतों के खुद से ज्यादा उम्र का होने पर। जानकार सलाह देते हैं कि ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने युवा मैनेजर से बात करें। इसमें कोई शिकायत का भाव नहीं होना चाहिए कि आपको कम उम्र से परेशानी है।
बल्कि बात कुछ यूं रखी जानी चाहिए जिससे ये लगे कि आपको टीम के परफॉर्मेंस की फिक्र है। तो आप अपनी बात कुछ यूं रख सकते हैं, "मुझे लगता है कि ये हम दोनों के लिए अजीब है। मगर, इस हालात से कैसे बेहतर नतीजे निकाले जा सकते हैं?"
पहले के दौर में आमने-सामने बात हो जाया करती थी
आपके बात करने का लहजा बिल्कुल भी ऐसा न हो कि नया बॉस आपके लिए परेशानी का सबब है। बल्कि उसे ये जाहिर कीजिए कि आप इस स्थिति को अपने लिए एक सुनहरा मौका मान रहे हैं। कुछ नया करने और सीखने के लिए। बल्कि सुझाव मांगने के अंदाज में आप पूछ सकते हैं कि, "हम दोनों इस हालात में कैसे बेहतर काम कर सकते हैं?"
ये हमेशा याद रखिए कि युवा पीढ़ी से सीखने को बहुत कुछ मिल सकता है। वो तकनीक के साथ ही पैदा हुए हैं। उन्हें एक साथ कई काम करने की आदत होती है। तो नई नई तकनीक का इस्तेमाल पुरानी पीढ़ी उनसे सीख सकती है। मल्टीटास्किंग का गुण उनसे सीखा जा सकता है। युवा मैनेजर, पुराने लोगों की तरह बात भी नहीं करते।
पहले के दौर में आमने-सामने बात हो जाया करती थी। या टीम लीडर अपने मातहतों से फोन पर बात कर लेते थे। मगर, आज व्हाट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी बॉस अपना संदेश आप तक पहुंचा सकते हैं।
तो संचार के और संवाद के नए जरियों के प्रति आपको हिचक नहीं होनी चाहिए। बल्कि युवा टीम लीडर से ये नई चीजें सीखनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि आपके युवा मैनेजर आपके काम से खुश नहीं, तो खुलकर बात कीजिए। उनसे अपनी कमी पूछिए और उसे दूर करने की कोशिश कीजिए।
ये हमेशा याद रखिए कि युवा पीढ़ी से सीखने को बहुत कुछ मिल सकता है। वो तकनीक के साथ ही पैदा हुए हैं। उन्हें एक साथ कई काम करने की आदत होती है। तो नई नई तकनीक का इस्तेमाल पुरानी पीढ़ी उनसे सीख सकती है। मल्टीटास्किंग का गुण उनसे सीखा जा सकता है। युवा मैनेजर, पुराने लोगों की तरह बात भी नहीं करते।
पहले के दौर में आमने-सामने बात हो जाया करती थी। या टीम लीडर अपने मातहतों से फोन पर बात कर लेते थे। मगर, आज व्हाट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी बॉस अपना संदेश आप तक पहुंचा सकते हैं।
तो संचार के और संवाद के नए जरियों के प्रति आपको हिचक नहीं होनी चाहिए। बल्कि युवा टीम लीडर से ये नई चीजें सीखनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि आपके युवा मैनेजर आपके काम से खुश नहीं, तो खुलकर बात कीजिए। उनसे अपनी कमी पूछिए और उसे दूर करने की कोशिश कीजिए।
काम से ये जाहिर करें कि आप टीम के लिए कितने जरूरी हैं
रोजाना नए तजुर्बे करने से तो बिल्कुल मत हिचकिचाइए। युवा पीढ़ी अक्सर नए तजुर्बे करती है. पसंद आया तो कुछ देर उस पर टिके, वरना आगे बढ़ लिए। तो आपको भी नई-नई चीजें, नए तरीके, नई तकनीक आजमाने में हिचकना नहीं चाहिए।
ये तो बिल्कुल नहीं कहना चाहिए कि मुझे ये पसंद नहीं। मैं ये नहीं कर सकता या सकती हूं। सबसे बड़ी बात ये है कि उम्र पर ध्यान देने से ज्यादा इस बात पर जोर दीजिए कि टीम को आपकी जरूरत महसूस हो। आपकी कमी लगे। आप अपने काम से ये जाहिर करें कि आप टीम के लिए कितने जरूरी हैं।
हॉली पालविका कहती हैं कि ये मसला उम्र का नहीं, आपके आगे बढ़ने का है। अक्सर युवा मैनेजर अपने से ज्यादा उम्र के मातहतों के बारे में ये कहते हैं कि वो पुराने जमाने में अटके हैं। आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी है कि आप उन्हें गलत साबित करें। नए नुस्खे आजमाने में उनसे भी आगे रहें। खूब पढ़ें, नई चीजों, बदलावों के बारे में जानकारी रखें। युवा पीढ़ी से जुड़ें। कुछ भी नया आजमाने से डरें नहीं।
और हां, अपने तजुर्बे बांटने में भी पीछे न रहें। लेकिन अंदाज ऐसा हो कि आप अपने बॉस को सिखा नहीं रहे, बल्कि आप तो टीम की बेहतरी के लिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। आखिर आपने अपने बाल धूप में तो सफेद किए नहीं!
ये तो बिल्कुल नहीं कहना चाहिए कि मुझे ये पसंद नहीं। मैं ये नहीं कर सकता या सकती हूं। सबसे बड़ी बात ये है कि उम्र पर ध्यान देने से ज्यादा इस बात पर जोर दीजिए कि टीम को आपकी जरूरत महसूस हो। आपकी कमी लगे। आप अपने काम से ये जाहिर करें कि आप टीम के लिए कितने जरूरी हैं।
हॉली पालविका कहती हैं कि ये मसला उम्र का नहीं, आपके आगे बढ़ने का है। अक्सर युवा मैनेजर अपने से ज्यादा उम्र के मातहतों के बारे में ये कहते हैं कि वो पुराने जमाने में अटके हैं। आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी है कि आप उन्हें गलत साबित करें। नए नुस्खे आजमाने में उनसे भी आगे रहें। खूब पढ़ें, नई चीजों, बदलावों के बारे में जानकारी रखें। युवा पीढ़ी से जुड़ें। कुछ भी नया आजमाने से डरें नहीं।
और हां, अपने तजुर्बे बांटने में भी पीछे न रहें। लेकिन अंदाज ऐसा हो कि आप अपने बॉस को सिखा नहीं रहे, बल्कि आप तो टीम की बेहतरी के लिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। आखिर आपने अपने बाल धूप में तो सफेद किए नहीं!