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Kati Bihu 2022: आज है काटी बिहू पर्व, जानें इस त्योहार का महत्व और मनाने का तरीका
Tue, 18 Oct 2022 04:08 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Tue, 18 Oct 2022 04:08 PM IST
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काटी बिहू
- फोटो : Istock
Kati Bihu 2022: दिवाली का पर्व आने वाला है। इसके पहले असल में काटी बिहू का त्योहार मनाया जा रहा है। आज काटी बिहू का पर्व है। काटी बिहू असम का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। असमिया कैलेंडर के मुताबिक, हर साल काटी मास में बिहू का पर्व मनाया जाता है। ये कोंगाली बिहू के नाम से भी मशहूर है। काटी बिहू के पर्व को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। ये पर्व किसान मनाते हैं, जो फसल की अच्छी पैदावार की कामना से मनाया जाता है। इस पर्व पर माता लक्ष्मी की विशेष पूजा होती है।असम में इस पर्व को लोग अलग ही उत्साह होता है। चलिए जानते हैं क्यों और कैसे मनाते हैं काटी बिहू का पर्व, जानिए काटी बिहू का महत्व और मनाने का तरीका।
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कब मनाते हैं काटी बिहू
इस साल काटी बिहू पर्व 18 अक्तूबर को मनाया जा रहा है। असम प्रदेश में तीन बार बिहू का पर्व मनाया जाता है। पहला भोगाली यानी जनवरी माह में मनाया जाता है। दूसरा बिहू पर्व रोंगाली या बोहाग यानी अप्रैल मास में मनाया जाता है। वहीं तीसरा बिहू पर्व कोंगाली अक्टूबर में मनाया जाता है।
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कोंगाली बिहू को मनाने का कारण
काटी मास यानी अक्तूबर में कोंगाली बिहू को मनाने के पीछे की वजह है कि इस समय खेतों में अनाज का उत्पादन होता है। काटी बिहू पर्व के मौके पर गोदामों में अनाज खत्म होने लगता है। अन्न के अभाव की स्थिति पैदा होने पर यह पर्व मनाकर अनाज के पैदावार की कामना करते हैं। कोंगाली का मतलब गरीबी होता है, जिसे दूर करने और फसल की अच्छी पैदावार के लिए यह पर्व मनाते हैं।
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कैसे मनाते हैं काटी बिहू
काटी बिहू का पर्व असम में किसानों के बीच देखने को मिलता है। किसान अपने खेतों में पूजा करते हैं। रात के समय तुलसी माता की पूजा की जाती है। खेत, बगीचा और तुलसी के आसपास दीपक जलाया जाता है। माता लक्ष्मी की पूजा का विधान भी है।