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चिकन खाते हैं तो भूलकर भी न करें यह चूक

Wed, 18 Jun 2014 12:25 PM IST
Updated Wed, 18 Jun 2014 12:25 PM IST
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washing raw chicken could be harmful

शोधकर्ता उपभोक्ताओं को सलाह दे रहे हैं कि वो कच्चे चिकन को न धोएं क्योंकि इससे फूड पॉइजनिंग के ख़तरे को बढाता है।

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ब्रिटेन की संस्था फूड स्टैंडर्ड्स एजेंसी या एफ़एसए ने करीब 4,500 युवाओं पर एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया। इसमें पाया गया कि 44 फ़ीसदी लोगों ने चिकन को पकाने से पहले धोया था।

चिकन धोने के ख़तरे

washing raw chicken could be harmful

लेकिन संस्था चेताती है कि इससे हाथों, काम करने वाली जगह और कपड़ों पर कैंपीलोबैक्टर बैक्टीरिया फैलता है।

ब्रिटेन में हर साल करीब दो लाख अस्सी हज़ार लोग कैंपीलोबैक्टर बैक्टीरिया से प्रभावित होते हैं। लेकिन सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से सिर्फ़ 28 फ़ीसदी लोगों ने इसके बारे में सुना था।

हालांकि 90 फ़ीसदी लोगों ने सैलमोनेला और ई कोली के बारे में सुन रखा था।

चिकन धोने के लिए आमतौर पर बताई जाने वाली वजहों में गंदगी और कीटाणु को साफ़ करना, या फिर वो हमेशा ऐसा ही करते आए हैं जैसी वजहें थीं।

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अच्छी तरह पकाएं

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ब्रिटेन में फूड पॉइज़निंग की सबसे आम वजह कैंपीलोबैक्टर है। और इसकी वजह अधिकतर प्रदूषित मुर्गे मुर्गियां होते हैं।

इसके प्रमुख लक्षणों में डायरिया, पेट दर्द और मरोड़, बुखार और अच्छा न महसूस करना है।

लंबे समय में इसका प्रभाव इरिटिबल बोल सिंड्रोम, ग्युलिन-बर्रे सिंड्रोम और तंत्रिका पर हो सकता है।

यह जानलेवा भी हो सकता है। पाँच साल से कम उम्र के बच्चों और बड़ों को इससे ज़्यादा ख़तरा होता है।

एफ़एसए की मुख्य कार्यकारी कैथरीन ब्राउन ने कहा, "हालांकि लोग मुर्गी पालन से जुड़े कामों के दौरान मुर्गे मुर्गियों को छूने के बाद हाथ धोना और यह सुनिश्चित करना कि ये अच्छी तरह पकाया गया है जैसी सावधानी बरतते हैं। हमारे शोध में यह सामने आया है कि कच्चे चिकन को धोना भी सामान्य बात है।"

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'एक गंभीर मसला'

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वो कहती हैं, "इसीलिए हम लोगों से कच्चा चिकन न धोने की बात कह रहे हैं और लोगों को प्रदूषण के कारण होने फैलने वाले कैंपीलोबैक्टर के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं।"

कैथरीन के अनुसार, "कैंपीलोबैक्टर एक गंभीर मसला है। केवल इस कारण नहीं कि इससे गंभीर बीमारी और मौत हो सकती है, बल्कि इसलिए भी कि क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) पर हर साल सैकड़ों लाख पाउण्ड का भार पड़ता है।

उन्होंने कहा कि एफ़एसए किसानों और उत्पादकों के साथ भी काम कर रहा है ताकि कैंपीलोबैक्टर की दर को कम किया जा सके।

इसके लिए बड़े पैमाने पर चिकन बनाने वालों, बूचड़खानों और इसे प्रासेस करने वाले लोगों के साथ काम किया जा रहा है।

चिकन की तैयारी से जुड़ी सलाह

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- कच्चे चिकन को ढककर रखें।
- इसे फ्रिज में सबसे नीचे रखें।
- कच्चे चिकन को न धोएं।
- तैयारी वाले सामानों को साफ़ कर लें।
- चिकन को अच्छी तरह पकाएं।
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