{"_id":"0981aeca7d0f70c561d50874d1e0b248","slug":"techniques-that-check-fitness-during-sleep","type":"story","status":"publish","title_hn":"नींद के दौरान भी आप होंगे इनकी नजर में","category":{"title":"Healthy Food ","title_hn":"हेल्दी फूड","slug":"healthy-food"}}
नींद के दौरान भी आप होंगे इनकी नजर में
Updated Mon, 24 Feb 2014 11:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरीका में इन दिनों ऐसे फ़िटनेस उपकरणों का चलन लगातार बढ़ रहा है जिसका इस्तेमाल आप पहनकर करते हैं।
विज्ञापन
मोटे तौर पर अनुमान है कि देश में ऐसे उपकरणों का कारोबार करीब 3 अरब डॉलर (करीब 186 अरब रुपये) तक पहुंच चुका है।
पढ़ें - रातों में नींद नहीं आती हैं तो मददगार है यह उपाय
इन उपकरणों में शामिल है कलाई में बांधने वाला रिस्ट बैंड और स्मार्ट फ़ोन। इसके ज़रिए लोग अपनी शारीरिक कसरत, कैलोरी सेवन और हृदय गति के बारे में जानकारी तो हासिल करते ही थे, अब नींद के दौरान भी इन उपकरणों के ज़रिए शरीर में हो रहे बदलावों पर नजर रखना संभव हो पाया है।
विज्ञापन
पढ़ें - खर्राटे से परेशान रहते हैं तो जरूर पढ़ें यह खबर
विज्ञापन
हाल के कुछ शोध अध्ययनों में भी यह बताया है कि इन उपकरणों की मदद से एथलीट के प्रदर्शन में सुधार हो सकता है। इसके बाद तो देश के ज़्यादातर खिलाड़ियों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया है।
एथलीट ट्रायफम एंडरसन बताते हैं, "रिस्ट बेंड की मदद से मुझे पता चल जाता है कि रात में मुझे कैसे नींद आई और मुझे किस तरह से शरीर का ख़्याल रखना है।"
उपकरण पर सवाल
अमरीका के जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की बॉस्केटबॉल टीम काफी मशहूर है। अगले सीज़न में टीम के बॉस्केटबॉल खिलाड़ियों को वियरेबल तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
क्योंकि टीम के कोच इस बहाने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर करना चाहते हैं। टीम के कोच मैथ्यू जॉनसन कहते हैं, "रिस्ट बेंड से शरीर की गति का पता चलता है और इससे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने में मदद मिलती है।"
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक इन उपकरणों की एक सीमा होती है और इससे सटीक आंकड़ों को हासिल करना मुश्किल है।
स्लीप एक्सपर्ट डॉ. विवेक जैन कहते हैं, "सोने के दौरान हाथ इधर उधर मुड़ता है तो ऐसी स्थिति में आंकड़े तो प्रभावित होते हैं। सटीक आंकड़े के लिए मस्तिष्क की तरंगों का अध्ययन जरूरी होता है।"
ये उपकरण कितने प्रभावी हैं, इसको लेकर संदेह बना हुआ है लेकिन अमरीका के एथलीट इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।