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धूप न चुरा ले आंखों की सेहत
अमरनाथ प्रसाद
Updated Mon, 15 Apr 2013 05:21 PM IST
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चुभती-जलती गर्मी से बचने के लिए सूती कपड़े, कोल्ड ड्रिंक्स और ताजे फल-सब्जियों का इस्तेमाल तो आपने शुरू कर दिया होगा। अब बारी आ चुकी है आंखों को इस चुभन और जलन से बचाने की।
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आंखें, शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। तेज धूप की वजह से आंखों पर पड़ने वाली अल्ट्रा वायलेट (यूवी) रेडिएशन, इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। इससे बचने के लिए जरूरी है अच्छे सनग्लासेस यानी धूप के चश्मे का इस्तेमाल। सर्दियों की तुलना में गर्मी में यूवी रेडिएशन तीन गुना ज्यादा होता है।
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रेडिएशन की परावर्तित किरणें आंखों के लिए बेहद घातक साबित होती हैं। इससे मोतियाबिंद हो सकते हैं। आंखों का पानी सूख सकता है। यहां तक कि कैंसर होने की भी आशंका रहती है।
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बच्चों के लिए तो ये किरणें और भी ज्यादा नुकसानदायक होती हैं। इन सब परेशानियों से बचाव के लिए अच्छी क्वालिटी के सनग्लासेस काफी मददगार हो सकते हैं। इन्हें पहनकर सिर्फ आंखों की शीतलता ही नहीं मिलती बल्कि आपको एक स्मार्ट लुक भी मिलता है। इनके इस्तेमाल से धूप ही नहीं धूल और प्रदूषण से भी आंखों का बचाव होता है।
ऑप्टोमेट्रिस्ट के पास स्पेक्ट्रोमीटर्स होते हैं, जिससे यह पता लगा सकते हैं कि सनग्लासेस कितनी मात्रा में और किस स्तर तक अल्ट्रा वॉयलेट रेडिएशन से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ संजय तेवतिया के अनुसार, 'तेज धूप में निकलने पर सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से आंखों के ऊपर बनी टीयर सेल यानी आंसूओं की परत टूटने या क्षतिग्रस्त होने लगती है। यह सिलसिला कार्निया और कंजंक्टाइवा के लिए हानिकारक हो सकता है। लंबे समय तक तेज धूप लेने से मोतियाबिंद और आयु संबंधी मैकुला ह्रास होने की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है।'
सनग्लासेस टीयर सेल को सूखने से बचाते हैं। इसलिए इन दिनों सनग्लासेज का इस्तेमाल जरूरी है। धूप के चश्मे लेते समय दो बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना जरूरी है। एक तो चश्मे का साइज बड़ा हो और दूसरा उसकी क्वालिटी अच्छी हो। जब तक शीशे में स्क्रैच या धुंधलापन न आए तब तक उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
जिनकी आंखों में पहले से पावरयुक्त चश्मे लगे हैं, वे भी अपने पावर नंबर के मुताबिक फोटोक्रोमेटिक या ब्लैक धूप चश्मे का इस्तेमाल कर सकते हैं।