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सिर्फ 100 दिनों की थी जिंदगी पर हौसले की हुई जीत

Fri, 02 Jan 2015 11:51 AM IST
Updated Fri, 02 Jan 2015 11:51 AM IST
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paralytic girl wins over life struggle

मुस्कान को महज़ 13 साल की उम्र में ‘प्राइड ऑफ़ न्यूज़ीलैंड’ (न्यूज़ीलैंड की शान) के लिए नामांकित किया गया था।

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साल 2104 में ‘वर्ल्ड डिसएबिलिटी डे’ के दिन उन्हें मिला 'बेस्ट एटिट्यूड अवॉर्ड।'

फ़िलहाल न्यूज़ीलैंड में रह रही 15 वर्षीय मुस्कान अब अपने मां, पिता और भाई की मुस्कुराहटों का कारण हैं। लेकिन इस मुस्कुराहट के पीछे है छिपी है एक मुश्किल संघर्ष की कहानी।

जब नन्ही सी मुस्कान देवता इस दुनिया में आईं तो डॉक्टर ने उनकी मां जेमिनी देवता और पिता अरुण देवता से कहा कि शायद मुस्कान 100 घंटे ही जीवित रह सकें।

मुस्कान एक प्री-मैच्यूर बेबी थीं, उनके फ़ेफड़े कमज़ोर थे, उन्हें पार्शियल हेमिप्लीज़िया (परॉलिसिस) था। जन्म के समय उनकी आंखें कमज़ोर थीं।

अब मुस्कान स्कूल जाती हैं और पूरी दुनिया को अपने उस सफ़र के बारे में बताती हैं, जिससे दूसरों को प्रेरणा मिलती है।

उनकी मां जैमिनी बताती हैं कि मुस्कान के जन्म के बाद के सौ घंटे उनके जीवन के सबसे मुश्किल लम्हे थे।

मुस्कान की मां कहती हैं, "हम बस उस वक़्त दुआ कर रहे थे। किसी से बात नहीं कर रहे थे। मुस्कान की तबीयत सही नहीं थी लेकिन उसकी आंखों मे एक चमक थी।"

मुस्कान के सिवा कुछ नहीं सोचा

मुस्कान की माँ ने बताया कि कुछ साल बाद उनका परिवार अहमदाबाद से न्यूज़ीलैंड आ गया।

वो कहती हैं, "अगले दस साल हमनें मुस्कान के अलावा कुछ नहीं सोचा।"

मुस्कान जब स्कूल पढ़ने गईं तो उन्हें अकेलेपन का सामना करना पड़ा। मुस्कान बताती हैं कि जब वो स्कूल जाती थीं तो उन्हें चलने में दिक्कत होती थी। वो पैरों मे ब्रेसेज़ पहनती थी और सबसे अलग दिखती थीं। उनके कोई दोस्त नहीं थे और सारा वक़्त वो लाइब्रेरी में बिताती थीं।
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जब उनका भाई पैदा हुआ तो बहुत कुछ बदल गया। मुस्कान कहती हैं, "जब मैंने अपने भाई अमन को गोद में लिया और जब मम्मी ने कहा तुझे अब इसे संभालना होगा तो मुझे पहली बार ज़िम्मेदारी का अहसास हुआ। वो मेरा पहला दोस्त था। उसने मुझे वैसे ही अपनाया जैसी मैं थी। मेरे अंदर धीरे-धीरे एक नया आत्मविश्वास आ रहा था।"
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ख़ुद से की शुरुआत
मुस्कान कहती हैं, "मुझे मेरे माता-पिता, मेरे भाई और मेरे परिवार ने बहुत सहारा दिया है। मुझे अहसास हुआ कि मुझे पहले अपने आप को अपनाना होगा। उसके बाद मैंने वो सारे काम करने शुरू किए जो मैंने पहले कभी नहीं किए थे। मैं क्लास कैप्टन बनीं और एक रेडियो चैनल के लिए शो पेश करना शुरू किया।"

उन्होंने आगे बताया, "टेड एक्स के लिए मैंने 2500 लोगों के सामने मोटिवेशनल स्पीच दी। मेरे पैर की सर्जरी के बाद मैंने अपनी आत्मकथा लिखी ‘आइ ड्रीम’ ताकि मेरी तरह किसी को अकेलेपन का सामना ना करना पड़े। आज मेरी कहानी मेरे स्कूल के पाठ्यक्रम में है।"

लड़ने की ताकत
मुस्कान कहती हैं, "अगर मेरे पास अपनी कमज़ोरियों से लड़ने की ताक़त नहीं है तो मुझे ताक़त अपने भाई से मिली अपनी मां बाप से मिली। मुझे ये पता लग गया था कि भगवान अगर मुश्किलें देता है तो उससे लड़ने की ताक़त भी देता है।"


मुस्कान हाल ही में भारत आई थीं। उन्हें हिन्दी फ़िल्में बहुत पसंद हैं। उनके फ़ेवरेट हीरो वरुण धवन हैं। खाली वक़्त में किताबें पढ़ना या गाना सुनना भी उन्हें भाता है।

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