याददाश्त कमजोर होने का ये एक कारण जानते हैं आप?
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आपको अपने परिवार वालों या दोस्तों में से कितनों का मोबाइल नंबर मुंहजबानी याद है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि हम दिन-ब-दिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर ऐसी बातों के लिए निर्भर होते जा रहे हैं।
लेकिन हाल ही में जब छात्रों को परीक्षा के दौरान सर्च इंजन इस्तेमाल करने की छूट का मुद्दा उठा तो इसे लेकर ' बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर' करने की आशंका व्यक्त की गई।
कुछ साल पहले कैलकुलेटर को लेकर भी कुछ इसी तरह की बहस छिड़ी थी। अभी भी कैलकुलेटर के इस्तेमाल को सीमित क्षेत्रों में मंजूरी मिली हुई है।
डिजिटल पहेली
विदेशी भाषा की परीक्षाओं में डिक्शनरी के इस्तेमाल को लेकर भी इस तरह की बहस होती रही है। 15 साल पहले डिक्शनरी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा हुआ था।
शोध में पता चला है कि इससे बहुत सारे प्रतिभा संपन्न छात्रों को फायदा पहुंचा है। हालांकि इस पर लोगों के विचार बंटे हुए हैं और इससे पता चलता है कि इस विवाद का समाधान निकलना बाकी है।
अलग-अलग तरीकों से ज्ञान, समझदारी और सूचनाओं के बीच दुविधा बनी हुई है। और सर्च इंजन के साथ तो यह मसला डिजिटल पहेली बनी हुई है।
दिमागी बदलाव
मान लिजिए कि छात्रों को सर्च इंजन की छूट दे दी जाती है तो उनके पास इतना वक्त नहीं होगा कि वे सूचनाओं के इतने बड़े संसार से जानकारी इकट्ठा करके उसे परीक्षा में इस्तेमाल कर सके।
उनकी उंगलियों में अकल्पनीय मात्रा में सूचनाओं का भंडार होगा।
दूसरी तरफ वैज्ञानिकों का मानना है कि याददाश्त के भरोसे सूचनाओं का इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग बेहतर तरीके से विकसित होता है।
टैक्सी ड्राइवरों के ऊपर हुए एक शोध से पता चला कि इससे दिमाग के अंदर बदलाव आते हैं और ग्रे मैटर( बिना काम की सूचनाओं) की तादाद बढ़ती है।
यह शोध लंदन में यूनिवर्सिटी कॉलेज के शोधकर्ताओं ने 2006 में किया था।