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सीने में जलन का हो सकता है पेट से कनेक्शन
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2013 06:20 PM IST
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सीने या गले में जलन और दर्द। खट्टी डकार आना। उल्टी का मन करना। पेट भारी-भारी लगना। यह सब हर्टबर्न के लक्षण हैं। मेडिकल साइंस में इसे गेस्ट्रोइसोफिजेल रिफ्लक्स डिसीज (जीईआरडी) कहा जाता है। हर्टबर्न का हृदय से संबंध नहीं होता बल्कि यह समस्या पेट में बनने वाले एसिड की वजह से पैदा होती है।
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एक अध्ययन की मानें तो दुनिया भर में 60 अरब से ज्यादा लोगों को एक महीने में एक बार सीने में दर्द या जलन की शिकायत होती है।
एंटीएसिड मेडिसिन से इस समस्या का उपचार किया जा सकता है। कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। लेकिन ऐसी नौबत न आए, इसके लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करना जरूरी है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के सीनियर डॉक्टर डॉ. जुगल किशोर से जानिए इससे जुड़े अहम पहलू।
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एक बार नहीं, बार-बार खाएं
जीईआरडी की समस्या मुख्य रूप से व्यक्ति के खान-पान से जुड़ी है। अगर आप एक ही बार में जरूरत से ज्यादा भोजन करते हैं तो पेट और इसोफिजेस के बीच में एक वाल्व (द्वार) बन जाता है।
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यह वाल्व पेट में बनने वाले एसिड को इसोफिजेस की तरफ धकेलता है। इससे सीने में दर्द और जलन महसूस होने लगती है। इससे बचने के लिए एक बार में ढेर सारा खाने की बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं।
इन्हें तो कहना ही पड़ेगा ‘नो’
हमारी दिनचर्या में शामिल कुछ पेय और भोज्य पदार्थ ऐसे हैं, जिनसे जीईआरडी की समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है। इसमें शामिल हैं चाय, कॉफी, तेल, मक्खन, मसालेदार भोजन, चॉकलेट इत्यादि। जब तक इस समस्या से पूरी तरह राहत नहीं मिल जाती, इन सभी चीजों से दूर ही रहें।
सिगरेट और शराब यहां भी हैं खराब
जीईआरडी से पीड़ित लोगों के लिए अल्कोहल का सेवन काफी नुकसानदायक हो सकता है। खासतौर पर तब जबकि आपको यह समस्या बार-बार होती है।
अल्कोहल की वजह से इसोफिजेल की निचली संकोचक पेशी सुस्त हो जाती है और पेट में बनने वाला एसिड सीधे इसोफिजेस में प्रवेश कर जाता है।
1999 में अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च में भी बताया गया था कि जीईआरडी से पीड़ित लोगों में ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो हर रोज अल्कोहल का सेवन करते हैं। अल्कोहल की ही तरह निकोटिन भी जीईआरडी की समस्या को बढ़ाता है, इसलिए धूम्रपान छोड़ने में ही समझदारी है।
बढ़ता वजन न बढ़ा दे परेशानी
मोटापा वैसे भी सेहत का दुश्मन है, लेकिन जीईआरडी के मामले में यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
2003 में 10 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमोलॉजी के एक अध्ययन में जीईआरडी और बॉडी मास इंडेक्स में आपसी संबंध सामने आया था। इस अध्ययन के मुताबिक मोटे लोगों में सामान्य वजन वाले लोगों की अपेक्षा जीईआरडी की आशंका तीन गुना ज्यादा होती है।
टाइट कपड़े न पहनें
टाइट फिटिंग वाले कपड़ों का ट्रेंड 12 महीने चलता है, लेकिन इसे तब तक न अपनाएं जब तक आप इस समस्या से पीड़ित हैं।
पेट के मध्य भाग पर पैंट या जींस की पट्टी के दबाव की वजह से पेट में बनने वाला एसिड इसोफिजेस जा सकता है। इसी से सीने में दर्द और जलन की शिकायत होने लगती है।
कुछ लोग हर्टबर्न के लक्षणों को हृदय रोग समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह पेट से जुड़ी समस्या है। ज्यादा खाना खाने, ज्यादा देर भूखे रहने या तला-भूना और मसालेदार खाने की वजह से पेट में एसिड बन जाता है।
जब यह एसिड इसोफिजेस(गले और पेट के बीच की नली) में दाखिल हो जाता है तो दर्द और जलन की शिकायत होने लगती है। अगर ऐसी तकलीफ सप्ताह से में दो-तीन बार से ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ज्यादा बढ़ने पर यह समस्या अल्सर या कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में भी बदल सकती है।