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सुई का दर्द नहीं, अब आंसुओं से होगी डायबिटीज की पहचान
Updated Mon, 20 Jan 2014 12:15 PM IST
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डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए अब रोज़ शरीर में सुई चुभोने जैसी दर्दनाक प्रक्रिया से छुटकारा मिल सकता है। गूगल ऐसा लेंस बना रही है, जो आंसू में मौजूद डायबिटीज़ के स्तर को मापेगा। इसका नाम है गूगल 'स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस'।
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स्मार्ट कॉंन्टेक्ट लेंस अपनी दो परतों के बीच लगी नन्हीं वायरलेस चिप और छोटे ग्लूकोज़ सेंसर की मदद से आंसुओं में मौजूद ग्लूकोज़ की मात्रा का पता लगाएगा। शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा से ही पता चलता है कि डायबिटीज़ का क्या स्तर है।
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गूगल इस लेंस में एक ऐसी एलईडी लाइट लगाने पर भी काम कर रहा है, जो ग्लूकोज़ की सीमा से ज्यादा होते ही जल उठेगी।
मगर कंपनी का यह भी मानना है कि रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए इस तकनीक के तैयार होने के पहले काफ़ी कुछ किया जाना बाकी है।
गूगल ने अपने ब्लॉग में लिखा है, "यह तकनीक आने में अभी देर है। मगर हमने इससे जुड़े अधिकतर शोध पूरे कर लिए हैं। हमें विश्वास है कि एक दिन यह तकनीक डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों के लिए राहत लेकर आएगी।"
उत्साहजनक तरक्की
दुनिया भर की कई कंपनियां पहने जाने वाले (वियरेबल) तकनीकी उत्पाद बाज़ार में अपने पांव जमाना चाहती हैं।
आने वाले सालों में उन्हें इस बाज़ार में काफ़ी संभावनाएं नज़र आती हैं।
अलग-अलग अनुमानों के आधार पर कहा जा सकता है कि वियरेबल तकनीक के क्षेत्र में अगले पांच साल में 10 अरब डॉलर से 50 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी की संभावना है।
इस क्षेत्र की कई कंपनियां आजकल विशेष रूप से सेहत से जुड़ी तकनीक पर काम कर रही हैं।
गूगल को उम्मीद है कि निकट भविष्य में स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस के उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने वाली है। इसलिए वह ज़ोर-शोर से इसे बनाने में जुटी है।
'अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज़ फ़ेडरेशन' के मुताबिक़ साल 2035 तक पूरी दुनिया में 10 में से एक इंसान को डायबिटीज़ होने की आशंका है।
ऐसे मरीज़ों को ग्लूकोज़ स्तर पर लगातार नज़र रखनी पड़ती है। ग्लूकोज़ की मात्रा में अचानक कमी या बढ़ोतरी सेहत के लिए गंभीर ख़तरे पैदा करती है। इसलिए नियमित जांच ज़रूरी है।
गूगल के मुताबिक़ अभी वह ग्लूकोज़ पर हर सेकेंड नज़र रखने वाले इन लेंसों के नमूनों की जांच कर रही है।
परामर्श कंपनी 'फ्रॉस्ट एंड सुलिवन' के प्रबंधक मनोज़ मेनन ने बीबीसी को बताया, "रोगनिरोधक स्वास्थ्य कंपनियों में हो रहा यह विकास उत्साहजनक है। उम्मीद है कि इस क्षेत्र में कई और नए अनुसंधान होंगे, जिनसे वियरेबल उत्पादों के ज़रिए सेहत से जुड़ी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकेगी।"
सेंसिबल ब्यॉय
'सेंसिबल बेबी' गैजेट सो रहे शिशु के शरीर के तापमान पर नज़र रखता है।
गूगल ने स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस बनाने के लिए अमरीकी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) की मदद ली है। इसके अलावा वह ऐसे कई और साझेदार भी तलाश रही है, जिन्हें ऐसे उत्पाद तैयार करने में विशेषज्ञता हासिल हो।
गूगल के अलावा ऐसी कई कंपनी हैं जो वियरेबल प्रोडक्ट के ज़रिए इसे पहनने वाले की सेहत पर नज़र रखती हैं।
इस महीने की शुरुआत में लास वेगास में हुए एक कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो के दौरान 'सेंसिबल बेबी' गैजेट लॉन्च किया गया।
यह उत्पाद शिशु की नाइट ड्रेस में लगाया जाता है। फिर इससे शिशु के शरीर के तापमान और उसकी स्थिति रिकॉर्ड की जाती है। किसी भी तरह का खतरा भांपते ही 'सेंसिबल बेबी' स्मार्टफ़ोन ऐप को संकेत भेजता है, जिसके बाद उसका अलार्म बजने लगता है।
इसी तरह ऐसी कई स्मार्टवॉच भी लॉन्च की गई हैं जो दिल की धड़कनों और तापमान पर नज़र रखती हैं। पिछले साल जापानी कंपनी सोनी एक स्मार्टविग लेकर आई थी।
सोनी का दावा है कि यह विग अपने सेंसर के ज़रिए शरीर के तापमान, स्पंदन और रक्त दाब पर एक साथ नज़र रखता है।