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फैंसी जूते-चप्पलों से कहीं गंवानी न पड़ जाए नौकरी

Tue, 28 May 2013 11:37 AM IST
इलाहाबाद/अरविंद सिंह
इलाहाबाद/अरविंद सिंह Updated Tue, 28 May 2013 11:37 AM IST
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flat foot problem can take your job

रमेश कुमार (उम्र 22 वर्ष) निवासी मम्फोर्डगंज। दिल्ली पुलिस में चयनित हो गए लेकिन जब विभागीय चिकित्सकों ने मेडिकल चेक अप किया तो फ्लैट फुट की शिकायत पायी गई। नतीजतन वह चयनित नहीं हो पाए। अब फिजियोथेरेपिस्ट से इलाज करा रहे हैं।

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बच्चों के साथ-साथ युवा भी तेजी से फ्लैट फुट बीमारी के शिकार हो रहे हैं। नतीजा है कि युवाओं को कई नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है। सेना और पैरा मिलिट्री फोर्स के साथ कई नौकरियां हैं जिनसे फ्लैट फुट बीमारी से पीड़ित लोगों को बाहर रखा गया है। परेशानी बढ़ने के बाद अब बड़ी संख्या में बच्चे और युवा हड्डी रोग विशेषज्ञों या फिर फिजियोथेरेपी सेंटरों पर इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह गंभीर समस्या नहीं है बशर्ते ध्यान दिया जाए। तकलीफ शुरू होने के साथ ही इलाज कराया जाए तो बीमारी अपना असर छोड़ने से पहले ठीक हो सकती है। फैराडिक फुट बाथ (ठंडे पानी से तलुवों की सिकाई) जैसी तकनीकों का प्रयोग कर समस्या से निजात पायी जा सकती है।
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रमेश की तरह ही अंजली रायजादा (उम्र 20 वर्ष) निवासी- एलगिन रोड भी पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कालेज में चयनित हो गईं थी। सेना के चिकित्सकों की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया तो फ्लैट फुट की शिकायत पायी गई। जांच की गई तो पता चला कि यह समस्या जन्मजात थी। समय रहते इलाज किया जाता तो बीमारी को दूर किया जा सकता था।

क्या है फ्लैट फुट?

आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एके सिंह के मुताबिक फ्लैट फुट गंभीर बीमारी नहीं है। फ्लैट फुट का मतलब पैरों के तलुओं में घुमाव (आर्क) होने के बजाए पूरी तरह समतल होना। ऐसा होने से पैरों में भार वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। फ्लैट फुट तेज भाग नहीं सकते। दौड़ते समय उनके पैर आपस में लड़ते हैं। तलुओं के बीच में पाया जाने वाला घुमाव (आर्क) स्प्रिंग की तरह काम करता है, इसके न होने पर कमर दर्द की शिकायत भी आम हो जाती है।

क्या है बीमारी का कारण?
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश चंद्रा के मुताबिक तलुवों की मांसपेशियों का कमजोर होना, पांव की हड्डियों की रचनात्मक संरचना का असामान्य होना, गलत डिजाइन के फैँसी जूते और चप्पल का प्रयोग, नंगे पांव न चलना बीमारी के प्रमुख कारण हैं।

ये हैं लक्षण
तेज चलने और दौड़ने में परेशानी, पैर, घुटनों और कमर में अत्यधिक दर्द, तलुवों में तेज जलन, चढ़ने में परेशानी बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।

कैसे करें जांच
विशेषज्ञों के मुताबिक तलुवों में स्याही लगाकर एक चार्ट पेपर पर खड़े होकर या फिर समतल जमीन पर पैर रखकर निशान बना लें। यदि पेपर और मिट्टी में तलुवों की छाप पूरी आ जाए तो समझ लेना चाहिए कि फ्लैट फुट की समस्या है।

क्या है इलाज
आर्थोपेर्रडक सर्जन डॉ. एके सिंह और फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश चंद्रा के मुताबिक विशेष व्यायाम द्वारा पांव की मांसपेशियों को मजबूती देकर, जूतों में आर्क सपोर्ट देकर, बर्फ से सिकाई करके यह परेशानी दूर की जा सकती है। साथ ही लेजर थेरेपी से भी इलाज किया जा सकता है।


वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अशोक शुक्ला के अनुसार,‘फ्लैट फुट की समस्या से ग्रसित तमाम बच्चे और युवा इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्हें उचित सलाह देकर इलाज भी किया जा रहा है। बेहतर होगा कि बच्चे के जन्म के साथ ही परीक्षण कर लिया जाए।ऐसा करने से इलाज में आसानी होती है।’

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