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दवा खाने से पहले ऐसे परखें दवा की सेहत

Tue, 10 Sep 2013 12:55 PM IST
हिना खन्ना
हिना खन्ना Updated Tue, 10 Sep 2013 12:55 PM IST
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facts about drug expiry

मरीज की सेहत के लिए दवा जरूरी है और दवा की सेहत के लिए? यह सवाल थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जो लोग नियमित रूप से दवा का सेवन करते हैं या जिन लोगों को छोटे बच्चों और बुजुर्गों की वजह से कई तरह की दवा घर में रखनी होती हैं, उनके लिए यह सवाल और भी अहम है।

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दरअसल दवा का ठीक तरह से रख-रखाव न होना, जिंदगी बचाने वाली दवा को जहर में भी तब्दील कर सकता है। खासतौर पर बच्चों के लिए यह काफी नुकसानदायक हो सकता है।
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सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के अनुसार दुनिया भर में 60,000 बच्चे हर साल दवाओं के रख-रखाव में लापरवाही के कारण आपातकालीन समस्या का शिकार होते हैं।
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यह है सही तरीका
बहुत से लोग अपनी मेडिसिन बाथरूम में रखते हैं, लेकिन यह जगह मेडिसिन रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे खराब जगहों में से एक है। बाथरूम केबिनेट उमस और नमी भरे होते हैं, ऐसे वातावरण में किसी भी तरह की दवा का ब्रेकडाउन प्रोसेस शुरू हो जाता है।

गर्मी और नमी में आने की वजह से मेडिसिन एक्सपायरी डेट से पहले ही खराब हो जाती हैं। उदाहरण के लिए ज्यादा तापमान में एस्पीरिन टैबलेट एसिटिक एसिड और सेलिसाइलिक एसिड में बदल ती है, यह दोनों ही पेट के लिए काफी नुकसानदायक हो सकते हैं। इस तरह के खतरों से बचने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

दवाओं के पैकेट पर लिखा होता है 'स्टोर इन ए कूल एंड ड्राइ प्लेस'। सबसे पहले तो इसी निर्देश का सही तरीके से पालन करें। दवाइयों को हमेशा सूखे और ठंडे स्थान पर रखें।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि महंगी होने या उपलब्ध न होने की वजह से कई लोगों को सही समय पर दवा नहीं मिल पाती है। ऐसे में बची हुई दवाओं को जरूरतमंद तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है। सरकारी डिस्पेंसरियों के अलावा कई हेल्थ सेंटर्स और एनजीओ भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। उनके बारे में जानकारी जुटा कर भी दवाओं को सही जगह पहुंचाया जा सकता है। बची हुई दवाइयां फार्मासिस्ट को भी लौटाई जा सकती हैं।

वह आगे कहते हैं कि इनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग नियम के अनुसार फार्मासिस्ट को एक्पायर हो चुकी दवाइयों को उचित तरह से नष्ट करना होता है। बची हुई दवाओं को उसे भी दिया जा सकता है ताकि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का निर्वाह हो सके।

साथ ही ऐसी जगह रखा जाना चाहिए, जहां बच्चे न पहुंच सके। इसके लिए आप टाइट जार या दराज का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी वजह से यदि बाथरूम या किचन में ही दवा स्टोर करनी है तो उसके लिए दवा वाले डिब्बे को टाइट बंद करके ऐसे स्थान पर रखें, जहां ज्यादा तापमान और नमी न हो, क्योंकि दवाओं पर गर्मी, उमस और सूरज की रोशनी का उलटा असर पड़ता है।

नई दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के डॉ.ए.के.पाठक के अनुसार, ''डायबिटिज में इस्तेमाल होने वाले इंसुलिन के इंजेक्शन को फ्रिज में रखने की जरूरत होती है। यह ध्यान रखना चाहिए कि दवाओं को ऐसे स्थान पर न रखा जाए, जहां सीधे सूरज की रोशनी आती हो। एक्सपायरी डेट देखकर ही दवा खाएं,  जहां तक कफ सिरप्स की बात है तो उनकी एक्सपायरी डेट 2-3 साल तक होती है। इसलिए उन्हें इस्तेमाल करने के बाद अच्छे से बंद करके फ्रिज में रखना चाहिए, ताकि आगे भी इस्तेमाल कर सकें।''


जब बच जाए दवा

बीमारी से निजात मिलने के बाद अक्सर लोग बची हुई दवा पर ध्यान ही नहीं देते, जो सही नहीं है। दवा का सही रख-रखाव जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है बची हुई दवा का सही प्रबंधन।

यदि दवा इस्तेमाल नहीं की जानी है या उसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी है तो उसे सही तरह से फेंकें, ताकि गलती से भी कोई दूसरा उनका इस्तेमाल न कर सके।

इस बारे में नजदीकी फार्मासिस्ट से भी सलाह ले सकते हैं। जिन दवाओं की एक्सपायरी डेट नहीं निकली है उन्हें नजदीकी डिस्पेंसरी में भी दिया जा सकता है।

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