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मासूम समझता है कब गोद में लेगी मां

Sat, 29 Jun 2013 11:37 AM IST
लंदन/एजेंसी
लंदन/एजेंसी Updated Sat, 29 Jun 2013 11:37 AM IST
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baby understands when mother is about to hug

जैसे कोई मां बिना कुछ बोले अपने मासूम बच्चे की जरूरतों को समझ जाती है, वैसे ही बच्चा भी अपनी मां के हाव भाव को परख बहुत कुछ जान जाता है। उसे पता होता है कि कब उसकी मां उसे गोद में उठा कर प्यार करने वाली है। दो से चार माह के बच्चों पर किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है।

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इसलिए अपने शरीर को कर लेते हैं सख्त

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वासु रेड्डी के नेतृत्व में यह शोध किया गया है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रोफेसर रेड्डी ने पाया कि दो से चार माह के बच्चे अच्छी तरह से समझते हैं कि वे गोद में जाने वाले हैं, जब उनकी मां अपनी बांहों को फैलाकर उनकी ओर बढ़ती हैं। इसीलिए वे पहले ही अपने शरीर को थोड़ा सख्त कर लेते हैं, ताकि उनकी मां को गोद में उठाने में आसानी हो।
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शोध के तरीके पर विचार की जरूरत
प्रमुख शोधकर्ता वासु रेड्डी के अनुसार, 'नतीजे सुझाव देते हैं कि हमें शिशु के विकास को लेकर अध्ययन के तरीके पर फिर से विचार करने की जरूरत है, क्योंकि ऐसा लगता है कि वे पूर्व की मान्यताओं की तुलना में पहले खुद को लेकर और फिर दूसरों की प्रतिक्रियाओं को ज्यादा समझने के योग्य होते हैं।'
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ऑटिज्म की पहचान में मदद
शोध से सामने आए तथ्यों को ऑटिज्म समेत विकसित होने वाली कुछ समस्याओं के शुरुआती संकेत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। वर्ष 1943 में शोधकर्ताओं ने बताया था कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे गोद में उठाए जाने को लेकर खुद को तैयार करते या प्रतिक्रिया देते नजर नहीं आते हैं।

ऐसे किया शोध
प्रॉग स्थित चेक एकेडमी ऑफ साइंस के डॉ. ग्रैबिएल मार्कोवा और यूनिवर्सिटी ऑफ आरहूस के डॉ. सेबेस्टियन वालट समेत शोधकर्ताओं की एक टीम ने दो अध्ययन किए। एक तीन माह की उम्र के 18 बच्चों पर और दूसरा दो से चार माह के 10 बच्चों पर।

दोनों ही अध्ययनों में बच्चों को एक प्रेसर मैट पर रखा गया, जिससे तीन चरणों के दौरान उनकी शारीरिक मुद्रा के एडजस्टमेंट को मापा गया। पहले चरण में बच्चों की मां ने उनसे बातचीत की, दूसरे चरण में उनकी मां ने उन्हें गोद में उठाने के लिए अपनी बांहों को फैलाया और तीसरे चरण में उनकी मां ने उन्हें गोद में उठा लिया।

ये रहे नतीजे
अध्ययनों में पाया गया कि दो माह के बच्चों में उस वक्त खास तौर से एडजस्टमेंट देखने को मिला, जब उनकी मां ने उन्हें गोद में उठाने के लिए अपनी बांहों को फैलाया।


इनमें उनका अपने पैरों को फैलाना और सख्त करना शामिल हैं, ताकि उनकी मां को गोद में उठाने में आसानी हो। वहीं दो से तीन माह के बच्चों की मां जैसे ही उन्हें गोद में लेने के लिए उनकी ओर बढ़ीं, वे कभी उनके चेहरे को तो कभी उनके हाथ को गौर से देख रहे थे। यह शोध जर्नल ‘पीएलओएस वन’ में प्रकाशित हुआ है।

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