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हर बच्चा है अभिमन्यु, पेट में सुन लेता है मां की कहानी
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 19 Jun 2013 01:28 PM IST
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आपने अर्जुन पुत्र अभिमन्यु का किस्सा तो सुना होगा। अभिमन्यु ने सुभद्रा के गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने का राज जान लिया था। यह किस्सा भले ही आपको कल्पित लगे लेकिन वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसा होता जरूर है।
बच्चा सबसे पहले अगर किसी की आवाज पहचानता है तो वह उसकी मां ही है। शायद इसीलिए मां और बच्चे की बातचीत का यह सिलसिला मां के गर्भ में ही शुरू हो जाता है।
जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अध्ययन के मुताबिक, मां की आवाज का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है और वह आवाज पर अपनी प्रतिक्रिया भी देता है। इतना ही नहीं, अगर मां गर्भ में पल रहे अपने शिशु को कहानी सुनाना चाहे तो वह कहानियां भी सुनता है।
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शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान 74 महिलाओं का परीक्षण किया जो 36 हफ्तों की गर्भवती थीं। उन्हें दो मिनट तक कहानियां सुनाने को कहा गया और इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कनों और हरकतों का परीक्षण किया गया।
उन्होंने पाया कि मां जब कहानी सुनाती है तो बच्चे की धड़कन की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और वह मूवमेंट कम कर देता है। शोधकर्ता क्रिस्टिन वोहलाइन के अनुसार, 'यह बहुत आश्चर्यजनक है कि बच्चा मां की आवाज जन्म के पहले से ही सुनने और पहचानने लगता है। यही वजह है कि जन्मजात शिशु अपनी मां की आवाज पहचान लेता है।'
उन्होंने यह भी माना कि गर्भ में शिशु जिस तरह बड़ा होता है, उसके सुनने और आवाज पहचानने की क्षमता भी बढ़ती जाती है। यह शोध 'इन्फैंट बिहेवियर जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।
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बच्चा सबसे पहले अगर किसी की आवाज पहचानता है तो वह उसकी मां ही है। शायद इसीलिए मां और बच्चे की बातचीत का यह सिलसिला मां के गर्भ में ही शुरू हो जाता है।
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जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के अध्ययन के मुताबिक, मां की आवाज का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है और वह आवाज पर अपनी प्रतिक्रिया भी देता है। इतना ही नहीं, अगर मां गर्भ में पल रहे अपने शिशु को कहानी सुनाना चाहे तो वह कहानियां भी सुनता है।
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शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान 74 महिलाओं का परीक्षण किया जो 36 हफ्तों की गर्भवती थीं। उन्हें दो मिनट तक कहानियां सुनाने को कहा गया और इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कनों और हरकतों का परीक्षण किया गया।
उन्होंने पाया कि मां जब कहानी सुनाती है तो बच्चे की धड़कन की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और वह मूवमेंट कम कर देता है। शोधकर्ता क्रिस्टिन वोहलाइन के अनुसार, 'यह बहुत आश्चर्यजनक है कि बच्चा मां की आवाज जन्म के पहले से ही सुनने और पहचानने लगता है। यही वजह है कि जन्मजात शिशु अपनी मां की आवाज पहचान लेता है।'
उन्होंने यह भी माना कि गर्भ में शिशु जिस तरह बड़ा होता है, उसके सुनने और आवाज पहचानने की क्षमता भी बढ़ती जाती है। यह शोध 'इन्फैंट बिहेवियर जर्नल' में प्रकाशित हुआ है।