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गठिया के मरीजों के लिए बड़ी है यह खबर
Updated Fri, 03 Jan 2014 11:44 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने डीएनए में 40 से अधिक क्षेत्रों की पहचान की है जो गठिया जैसे रोगों के ख़तरे को बढ़ाता है।
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यह शोध अब तक का सबसे बड़ा आनुवांशिक अध्ययन है।
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शोधकर्ताओं को यक़ीन है कि डीएनए के पहचाने गए क्षेत्रों से नई दवाओं के विकास में मदद मिलेगी और एक दिन क्लिक करें गठिया का इलाज संभव हो सकेगा।
इस अध्ययन के निष्कर्षों को जर्नल नेचर में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं को टीम ने आर्थराइटिस के रोगियों के डीएनए की तुलना उन लोगों के डीएनए के साथ की जिनको यह बीमारी नहीं थी। इस प्रक्रिया के दौरान 42 ऐसे कमज़ोर क्षेत्रों की पहचान हुई, जिनका संबंध आर्थराइटिस या गठिया की बीमारी के साथ पाया गया।
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गठिया रोग का उपचार
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए दवाएं बनाई जा सकती है जिससे गठिया रोग का कारण बनने वाले दोषों को दूर किया जा सकता है।
इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता और हारवर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफ़ेसर राबर्ट प्लेंज ने पाया कि पहचाने गए क्षेत्रों में से एक कमज़ोरी पैदा करता है, जिसका उपचार वर्तमान में उपलब्ध एक दवा से संभव है। जिसका विकास आनुवांशिक कमी को दूर करने के बजाय भूल और सुधार की विधि से किया गया गया।
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वो कहते हैं, यह खोज नए दवाओं के विकास का रास्ता दिखाती है।
उन्होंने कहा, "इस आनुवांशिक खोज से भविष्य में गठिया जैसी जटिल रोगों के लिए नई दवाइयां खोजने और उपचार करने के अवसर पैदा होंगे। यहाँ तक कि उसे पूरी तरह ठीक भी किया जा सकेगा।"
लेकिन कुछ लोगों का तर्क है कि जटिल रोगों के लिए आनुंवांशिक रूप से कमज़ोर क्षेत्रों की पहचान करना सिंगल न्युक्लियोटाइड पॉलीमारफिज़्म (एसएनपी) वाले रोगों के लिए उपयोगी नहीं है। उनका मानना है कि इस संबंध में हमारे पास बहुत थोड़े या लगभग नहीं के बराबर साक्ष्य हैं कि दवाओं के माध्यम से एसएनपीज़ को सुसुप्त करके रोग के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है।
नई दवाओं की खोज
गठिया रोग के उपचार की तलाश के लिए लंबे समय से शोध हो रहे हैं।
लेकिन डॉक्टर प्लेंग का कहते हैं कि उन्होंने पहले से मौजूद एक ऐसी दवा खोजी है जो जो विशेष एसएनपी से उत्पन्न होने गठिया रोग का उपचार करती है। इससे आनुवांशिकी के माध्यम से रोगों का उपचार करने की वैधता को पुष्ट होती है।
उनके मुताबिक़ "यह भविष्य की असीम संभावनाओं का रास्ता खोलती है। इस पद्धति का उपयोग गठिया जैसे जटिल रोगों के अलावा डायबिटीज, अल्ज़ाइमर और दिल की बीमारियों के लिए दवाएं खोजने में हो सकता है।"
अध्ययन में देखा गया कि गठिया रोग के मरीजों के एसएनपी विभिन्न प्रकार के रक्त कैंसर में भी पाए जाते हैं।
मैनचेस्टर में सेंटर फ़ॉर जेनेटिक्स के निदेशक प्रोफ़ेसर जेने वार्थिंगटन के मुताबिक़ यह अध्ययन बताता है कि कैंसर के उपचार में कारगर दवाएं गठिया जैसे रोगों के उपचार में भी प्रभावी हो सकती हैं, इनके नैदानिक परीक्षण में भी तेज़ी लानी चाहिए।
उन्होंने बीबीसी को बताया, "कैंसर के क्षेत्र में इलाज के लिए थेरेपी पहले ही विकसित हो चुकी है जो दवाओं के इस्तेमाल के नए अवसर खोल सकती हैं।"