सूंघकर ही कैंसर का पता लगाता है यह कुत्ता
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अमरीकी शोधकर्ताओं के अनुसार एक कुत्ता थायरॉयड कैंसर सूंघने में सफल रहा।
फ्रैंकी नामक इस कुत्ते ने जिन लोगों में कैंसर की पहचान की, उनकी बीमारी के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
शोधकर्ताओं ने 34 मरीजों पर प्रयोग किया। फ्रैंकी को कैंसर का पता लगाने में 88 प्रतिशत सफलता मिली।
एंडोक्राइम सोसाइटी की एक सालाना बैठक में इस प्रयोग के परिणाम की घोषणा करते हुए शोधदल ने कहा कि इस कुत्ते में 'सूंघने की अद्भुत क्षमता' है।
कैंसर रिसर्च, यूके ने कहा कि कुत्ते का प्रयोग करना अव्यावहारिक होगा लेकिन कुत्ते द्वारा रसायनों को सूंघने की क्षमता के पता लगने से नए प्रयोगों की दिशा खुल सकती है।
थायरॉयड ग्रंथि मनुष्य के गले में पाई जाती है। इसका काम शरीर का उपापचय (मेटाबॉलिज्म) नियमित करना है।
सूंघने की अविश्वसनीय क्षमता
थायरॉयड कैंसर विलक्षण है। आमतौर पर इसकी पहचान मनुष्य के रक्त में हार्मोन के स्तर की जाँच और सुइयों के ज़रिए कोशिकाओं को निकालकर उनकी जाँच करके की जाती है।
कैंसर में कोशिकाएँ ख़राब और अनियंत्रित हो जाती हैं। इनमें विशिष्ट तरह के रसायन बनने लगते हैं और इनसे शरीर में 'अस्थिर कार्बनिक यौगिक' स्रावित होते हैं।
पेट और फेफड़े के कैंसर का पता लगने के मामले में पहले भी कुत्तों का सफल प्रयोग किया जा चुका है।
कुत्तों में सूंघने की क्षमता मनुष्यों से 10 गुना ज़्यादा होती है और कुत्ते कैंसर से आने वाली विशेष गंध को पहचान सकते हैं।
फ्रैंकी और परीक्षण
इससे पहले यूनिवर्सिटी ऑफ़ आर्कांसस फ़ॉर मेडिकल साइंसेज़(यूएएमएस) ने अपने एक प्रयोग में दिखाया था कि प्रशिक्षित कुत्ते थॉयरॉयड से पीड़ित लोगों और स्वस्थ लोगों के पेशाब की गंध के आधार पर फर्क कर सकते हैं।
इसके बाद बारी थी कुत्तों के सीधे उपचारात्मक परीक्षण में प्रयोग की।
फ्रैंकी को प्रशिक्षित किया गया था कि अगर मरीज़ के पेशाब के नमूनों में थायरॉयड कैंसर की गंध हो तो वो वहीं लेट जाए और अगर न हो तो वो वहाँ से हट जाए।
प्रयोग में शामिल होने वाले सभी 34 लोग परंपरागत जाँच के लिए अस्पताल में जाने वाले थे। जर्मन शेफर्ड नस्ल के फ्रैंकी ने 34 लोगों में से 30 मरीज़ों की सही पहचान कर ली।
दो लोगों की उसने ग़लत तरीके से कैंसर का मरीज के रूप में पहचान की और दो लोगों को उसने ग़लती से स्वस्थ व्यक्ति के रूप में पहचान की।