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एक ऐसी डिश जिसने मिलाया दो दुश्मन देश को

Wed, 28 Nov 2018 12:17 PM IST
लाइफ स्टाइल डेस्क,अमर उजाला
लाइफ स्टाइल डेस्क,अमर उजाला Updated Wed, 28 Nov 2018 12:17 PM IST
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A dish that mixed two enemy country
dish - फोटो : bbc

इसी साल अप्रैल महीने में ब्रिटेन में मास्टर शेफ शो में मलेशिया के एक उम्मीदवार जालिहा कादिर ने चिकन रेनडांग नाम की डिश तैयार की शो के जज ने इस डिश को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि पकवान करारा नहीं बना।रेनडांग डिश गोश्त से बनती है और इसे धीमी आंच पर नारियल और दूसरे मसालों के साथ पकाया जाता है।गोश्त इस हद तक गलाया जाता है कि वो मुंह में जाते ही पिघल जाए। ऐसे में शो के जज का ये कहना कि ये करारा नहीं है, अजीब बात थी।शेफ के इस बयान के साथ ही सोशल मीडिया पर बाकायदा मुहिम छिड़ गई. #CrispyRendag और #Rendangate ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे।

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A dish that mixed two enemy country
dish - फोटो : bbc

मामला तब और गंभीर हो गया जब शो के दूसरे जज जॉन टोरोडे ने ये कहते हुए ट्वीट किया कि रेनडांग शायद इंडोनेशियन डिश है। इस ट्वीट के जवाब में जकार्ता के एक सोशल मीडिया यूज़र ग्रिफ़िन शॉनरी ने लिखा- क्या रेनडांग के नाम पर मलेशिया और इंडोनेशिया को लड़ाने की कोशिश की जा रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे,बल्कि हम एकजुट हो जाएंगे।मलेशिया और इंडोनेशिया पड़ोसी देश हैं,लेकिन ऐसा कम ही देखा गया है कि किसी मुद्दे पर इन दोनों में सहमति बनती हो, दोनों देशों के बीच तल्खी और तनाव का लंबा इतिहास रहा है, लेकिन रेनडांग के मुद्दे पर दोनों देश एक हो गए हैं।मूल रूप से ये डिश इंडोनेशिया की ही है लेकिन मलेशिया भी इस पर अपना दावा पेश करता है। कहा जाता है कि ये डिश इंडोनेशिया में पश्चिमी सुमात्रा के आदिवासियों मिनांगकाबुआ लोगों की है,वो इसे चिकन से नहीं बल्कि भैंस के गोश्त से बनाते हैं।

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A dish that mixed two enemy country
मिनांगकाबुआ - फोटो : bbc

भैंस मिनांगकाबुआ जनजाति की संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसे तैयार होने में करीब सात घंटे लगते हैं, कहा तो ये भी जाता है कि 'रेनडांग' शब्द भी 'मेरेनडांग' शब्द से आया है, जिसका मतलब है धीमी आंच पर पकाना।सुमात्रा यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफ़ेसेर गुस्ती अनन बताते हैं कि मिनांगकाबुआ लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने की वजह से ही ये डिश इंडोनेशिया के पड़ोसी देशों में पहुंची. रिसर्च साबित करती है कि मिनांगकाबुआ लोग शादी करने के इरादे से भी पलायन करते थे।पलायन, कारोबार के नए मौक़े और तजुर्बे की ग़र्ज़ से भी होता था।ये लोग सिंगापुर और मलेशिया पैदल या समंदर के रास्ते जाते थे।रेनडांग चूंकि लंबे समय तक रखा जा सकता था लिहाजा ये लोग अपने साथ केले के पत्तों में लपेट कर रेनडांग ही सफ़र में खाने के लिए साथ लेकर चलते थे।

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A dish that mixed two enemy country
मिनांगकाबुआ - फोटो : bbc

प्रोफेसर अनन कहते हैं कि ये पकवान तैयार करने की परंपरा कहां शुरू हुई सही तौर पर बता पाना मुश्किल है। लेकिन, एक बात दावे से कही जा सकती है कि मिनांगकाबुआ लोगों की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सियासी जीवन पर भारत का गहरा असर है,प्राचीन काल से ही पूर्वी एशिया और दक्षिणी भारत में सांस्कृतिक लेन-देन होता आया है।पंद्रहवीं सदी तक इंडोनेशिया मसालों का गढ़ बन चुका था।मसालों का व्यापार करने यहां बड़े पैमाने पर भारत, चीन, अरब, और यूरोप के लोग आते थे। इन सभी देशों की संस्कृति और खान-पान का यहां असर पड़ा। दूसरी शताब्दी में भारतीय व्यापारी सोना और टिन की तलाश में इंडोनेशियन द्वीपों पर आते थे। इसीलिए माना जाता है कि इंडोनेशिया के पकवान भारतीय खान-पान से प्रभावित हैं।

A dish that mixed two enemy country
indonesia - फोटो : vice

प्रोफेसर अनन कहते हैं कि रेनडेंग पकाते हुए जब नारियल का दूध और मसाले गाढ़े होने लगते हैं तो उसे 'कालियो' कहते हैं लेकिन, मिलांगकाबुआ लोग इसे 'करी' कहते हैं, ये शब्द भारत के कढ़ी शब्द से आया है।मलेशिया में अध-पका रेनडांग खाने का चलन है. यहां इसे शाही खाना भी कहा जाता है।इसे आम से ख़ास बनाने के लिए मसालों में थोड़ा फेरबदल किया जाता है। जैसे इसमें ताड़ की चीनी, और कसे हुए नारियल का दूध और तेल मिलाया जाता है, जो कि आम लोगों की पहुंच से बाहर है। इसे अमीर ही खरीद कर खा सकते हैं। बहुत से जानकार इस डिश का संबंध मिनांगकाबुआ लोगों के सब्र, अक़लमंदी और मज़बूत इरादों वाले जीवन दर्शन से जोड़कर भी देखते हैं।

A dish that mixed two enemy country
fish - फोटो : file photo

रेनडांग रोजमर्रा का खाना नहीं है इसे शादी, त्यौहार या किसी नेता के राज तिलक जैसे मौक़े पर ही बनाया जाता है। ये पकवान लोगों के दिल के बहुत करीब है। सिंगापुर में मलेशियन रेस्टोरेंट चलाने वाले दो भाई हजमी और आरिफ जीन कहते हैं, कि सिंगापुर में लोग इसे पारंपरिक तरीक़े से चावल के साथा खाना पसंद करते हैं।जीन बंधुओं ने रेनडांग बनाने का तरीका अपनी दादी से सीखा था, जो 1940 में सिंगापुर पहुंची थीं। यहां उन्होंने सड़क किनारे अपने इलाके के पारंपरिक खाने बनाकर बेचने शुरू किए थे। बाद में उन्होंने यहां अपना रेस्टोरेंट खोल लिया जिसका नाम उन्होंने 'सब्र मिनानती' रखा। जिसका मतलब है 'सब्र से इंतज़ार कीजिए।

A dish that mixed two enemy country
fish - फोटो : File Photo

दरअसल इनकी दुकान पर खाने वालों की भीड़ जमा हो जाती थी और सब को एक वक्त संभालना मुश्किल होता था, इसीलिए उन्होंने अपने रेस्टोरेंट का नाम 'सब्र मिनानती' रखा।रेनडांग को एशिया के अलग-अलग देशों में कई दूसरे पकवानों के साथ मिलाकर भी खाया जाता है।हालांकि, जो लोग पारंपरिक तरीके से इसे तैयार करते हैं उनके मुताबिक ऐसा करने वाले इस पकवाने को विशुद्ध करते हैं।इसमें कोई शक नहीं है कि ये पकवान 'नुसनतारा' इलाकों से ही दूसरे देशों तक फैला है। नुसनतारा मलय-इंडोनेशियन शब्दावली है, जो द्वीपसमूह वाले देशों जैसे मलेशिया, सिंगापुर और ब्रुनेई के लिए इस्तेमाल होता है। अलग-अलग इलाकों में लोग मसालों में थोड़ा फेरबदल करके इसे अपने-अपने तरीके से बनाते हैं।मिसाल के लिए सिंगापुर की जूलिया अदनान पिछले 46 साल से भैंस के गोश्त वाला रेनडांग तैयार कर रही हैं।इसके लिए वो खास तरह की देगची का इस्तेमाल करती है।इनके मुताबिक़ किसी और बर्तन में पकाने से इसका जायका बदल जाएगा।जूलिया के रेनडांग बनाने का तरीका बहुत सादा है,वो इसे बनाने के लिए अपने गांव के पारंपरिक मसालों का ही इस्तेमाल करती हैं।जबकि जीन बंधुओं का रेनडांग बनाने का तरीका थोड़ा अलग है।वो हल्दी के ताज़े पत्ते, सूखी और ताजा दोनों तरह की मिर्च का इस्तेमाल करते हैं। यूनिवर्सिटी पुत्रा मलेशिया के प्रोफेसर डॉ. शाहरीम अब करीम का कहना है कि मलेशिया के लोगों ने इस डिश को अपना साबित करने के लिए इसमें कई तरह के बदलाव कर लिए हैं।मलेशिया में इसे राष्ट्रीय पकवान माना जाता है।खुशी के हरेक मौक़े और सरकारी कार्यक्रमों में रेनडांग ही परोसा जाता है। चिकन रेनडांग लोग रोज़मर्रा में खाते हैं लेकिन बीफ रेनडांग खास मौकों पर ही बनता है।विरासत के तौर पर इसे बनाने का तरीका एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा है।बहरहाल इस विवाद के बाद जिस तरह इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के लोग इकट्ठा हुए हैं, उससे साफ़ है कि कोई पकवान तमाम देशों को जोड़ने का काम भी कर सकता है।







 
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