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Year Ender 2024: 'ब्रेन रोट' से लेकर सोशल मीडिया प्रतिबंधों तक, मेंटल हेल्थ को लेकर चर्चा में रहा ये साल

Tue, 17 Dec 2024 07:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 17 Dec 2024 07:34 PM IST
सार

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने साल 2024 के लिए 'ब्रेन रोट' शब्द को 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित किया है। वहीं सोशल मीडिया के कारण बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा फैसला किया। आइए विस्तार से जानते हैं।

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Year Ender 2024 Mental Illnesses this year  steps taken to improve mental productivity
मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Freepik.com

मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को संपूर्ण सेहत के लिए खतरनाक माना जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं, इसलिए इनमें से एक में भी होने वाली किसी दिक्कत का असर दूसरी सेहत पर पड़ सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामले दुनियाभर में बढ़ते जा रहे हैं, विशेषकर कोरोना महामारी के बाद से इसका जोखिम और भी बढ़ गया है। साल 2024 भी मेंटल हेल्थ को लेकर कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि इसमें सुधार को लेकर कुछ बड़े फैसले भी लिए गए।



हम कुछ ही दिनों में नए साल में प्रवेश करने जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों में लाइफस्टाइल और आहार की समस्याएं देखी जा रही हैं, आने वाले वर्षों में भी मेंटल हेल्थ की समस्याएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती हैं, इसलिए सभी लोगों को पहले से ही सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

नए साल में प्रवेश करने से पहले आइए साल 2024 में मेंटल हेल्थ की समस्याओं और इस साल लिए गए बड़े फैसलों पर एक नजर डालते हैं।

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स्ट्रेस, डिप्रेशन की समस्या - फोटो : Freepik.com

'ब्रेन रोट' 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने साल 2024 के लिए 'ब्रेन रोट' शब्द को 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित किया है। ब्रेन रोट शब्द सोशल मीडिया पर अत्यधिक मात्रा में मौजूद दोयम दर्जे वाले कंटेट के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चिंता को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों और वयस्कों के दिन का एक बड़ा समय मोबाइल फोन को स्क्रॉल करने और सोशल मीडिया पर बीतता है, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव - फोटो : freepik

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने लिया बड़ा फैसला

बच्चों और वयस्कों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के लिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण माना जाता रहा है।

सोशल मीडिया के बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य दुष्प्रभावों को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने देश में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए किसी भी तरह के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। पीएम ने कहा, सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है, ये उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसके लिए प्रस्तावित कानून अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाएंगे।

सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि यदि इन नियमों को तोड़ने की जानकारी मिलती है तो इसके लिए कंपनी जिम्मेदार होगी और उसपर कड़ी कार्यवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। एक बार कानून पारित होने के बाद कंपनियों को एक साल का समय दिया जाएगा जिसमें उन्हें तय करना होगा कि नियमों का पालन कैसे किया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी अच्छा और जरूरी मान रहे हैं।

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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : freepik.com

स्ट्रेस और एंग्जाइटी ने लोगों को किया परेशान

स्ट्रेस और एंग्जाइटी यानी तनाव-चिंता मानसिक स्वास्थ्य की सबसे आम समस्याओं में से एक हैं। 31 देशों में वयस्कों पर किए गए  एक सर्वेक्षण में, तनाव को तेजी से बढ़ती गंभीर समस्याओं में से एक पाया गया। प्रतिभागियों से पूछा गया कि  उनके देश में सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या क्या है? इसके जवाब में अधिकतर प्रतिभागियों ने कहा स्ट्रेस तीसरी सबसे आम समस्या है। अमेरिका में, 24% वयस्कों ने एक से 10 के पैमाने पर अपने औसत तनाव को आठ से 10 के बीच आंका।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रेस की समस्या समय के साथ गंभीर मनोरोगों का कारण बन सकती है।

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अवसाद की समस्या - फोटो : Freepik.com

डिप्रेशन के परेशान करने वाले आंकड़े

डिप्रेशन या अवसाद की समस्या मेंटल हेल्थ की गंभीर स्थितियों में से एक है। दुनियाभर से सामने आए डेटा में इस साल डिप्रेशन के मामलों ने भी काफी चिंता बढ़ाई। 

अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिशन ने मार्च 2024 की एक रिपोर्ट में बताया कि यूएस में अनुमानित 20 में से एक वयस्क  चिंता तथा अवसाद और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार है। इसका मतलब है कि लगभग 5% अमेरिकी लोग अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है।अवसाद की गंभीर स्थिति अत्महत्या के विचारों और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को बढ़ाने वाली हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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