मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को संपूर्ण सेहत के लिए खतरनाक माना जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक हैं, इसलिए इनमें से एक में भी होने वाली किसी दिक्कत का असर दूसरी सेहत पर पड़ सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि दुनियाभर में स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के मामले दुनियाभर में बढ़ते जा रहे हैं, विशेषकर कोरोना महामारी के बाद से इसका जोखिम और भी बढ़ गया है। साल 2024 भी मेंटल हेल्थ को लेकर कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि इसमें सुधार को लेकर कुछ बड़े फैसले भी लिए गए।
Year Ender 2024: 'ब्रेन रोट' से लेकर सोशल मीडिया प्रतिबंधों तक, मेंटल हेल्थ को लेकर चर्चा में रहा ये साल
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने साल 2024 के लिए 'ब्रेन रोट' शब्द को 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित किया है। वहीं सोशल मीडिया के कारण बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बड़ा फैसला किया। आइए विस्तार से जानते हैं।
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'ब्रेन रोट' 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने साल 2024 के लिए 'ब्रेन रोट' शब्द को 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित किया है। ब्रेन रोट शब्द सोशल मीडिया पर अत्यधिक मात्रा में मौजूद दोयम दर्जे वाले कंटेट के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चिंता को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों और वयस्कों के दिन का एक बड़ा समय मोबाइल फोन को स्क्रॉल करने और सोशल मीडिया पर बीतता है, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने लिया बड़ा फैसला
बच्चों और वयस्कों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के लिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण माना जाता रहा है।
सोशल मीडिया के बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य दुष्प्रभावों को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने देश में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए किसी भी तरह के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। पीएम ने कहा, सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है, ये उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसके लिए प्रस्तावित कानून अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाएंगे।
सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि यदि इन नियमों को तोड़ने की जानकारी मिलती है तो इसके लिए कंपनी जिम्मेदार होगी और उसपर कड़ी कार्यवाई और जुर्माना लगाया जाएगा। एक बार कानून पारित होने के बाद कंपनियों को एक साल का समय दिया जाएगा जिसमें उन्हें तय करना होगा कि नियमों का पालन कैसे किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के इस फैसले को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी अच्छा और जरूरी मान रहे हैं।
स्ट्रेस और एंग्जाइटी ने लोगों को किया परेशान
स्ट्रेस और एंग्जाइटी यानी तनाव-चिंता मानसिक स्वास्थ्य की सबसे आम समस्याओं में से एक हैं। 31 देशों में वयस्कों पर किए गए एक सर्वेक्षण में, तनाव को तेजी से बढ़ती गंभीर समस्याओं में से एक पाया गया। प्रतिभागियों से पूछा गया कि उनके देश में सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या क्या है? इसके जवाब में अधिकतर प्रतिभागियों ने कहा स्ट्रेस तीसरी सबसे आम समस्या है। अमेरिका में, 24% वयस्कों ने एक से 10 के पैमाने पर अपने औसत तनाव को आठ से 10 के बीच आंका।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रेस की समस्या समय के साथ गंभीर मनोरोगों का कारण बन सकती है।
डिप्रेशन के परेशान करने वाले आंकड़े
डिप्रेशन या अवसाद की समस्या मेंटल हेल्थ की गंभीर स्थितियों में से एक है। दुनियाभर से सामने आए डेटा में इस साल डिप्रेशन के मामलों ने भी काफी चिंता बढ़ाई।
अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिशन ने मार्च 2024 की एक रिपोर्ट में बताया कि यूएस में अनुमानित 20 में से एक वयस्क चिंता तथा अवसाद और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार है। इसका मतलब है कि लगभग 5% अमेरिकी लोग अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है।अवसाद की गंभीर स्थिति अत्महत्या के विचारों और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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