दुनियाभर में 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इसे महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। भारत में गांव-देहात ही नहीं बल्कि शहरों में भी मासिक धर्म को लेकर लड़कियों और महिलाओं में एक तरह की हिचक देखने को मिलती है जिसकी वजह से उन्हें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, भारतीय समाज में मासिक धर्म को शुद्धता और अशुद्धता के जोड़कर देखने की प्रवृत्ति भी महिलाओं और लड़कियों के लिए खासा परेशानी बनती है।
पिछले पांच सालों से विश्व पीरियड्स डे मनाया जा रहा है। इसे 28 तारीख को मनाने के पीछे वजह है कि महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स 28 दिनों के भीतर आते हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य कारण है कि लड़कियां और महिलाएं मासिक धर्म को लेकर जागरूक होने के साथ ही इस विषय पर खुलकर अपनी बात रखें। मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहें, जिससे उन्हें किसी भी तरह के घातक संक्रमण का शिकार न होना पड़े। दरअसल, कई बार इंफेक्शन की वजह से महिलाओं को इनफर्टिलिटी संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
इस बार विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की थीम ' इट्स टाइम फॉर एक्शन' रखी गई है। यानी की यह वक्त पीरियड्स को लेकर सोचने का नहीं बल्कि मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई को लेकर सतर्क रहने का है। अक्सर हमने देखा है कि घरों में जब लड़कियों को पीरियड्स आते हैं तो वह बेहद टेंशन में चली जाती हैं। उनपर घरों में कई तरह की रोक लग जाती है, जिसकी वजह से अंदर से लड़कियां चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं।
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- फोटो : सोशल मीडिया
पीरियड्स के वक्त लड़कियों और महिलाओं को अपने निजी अंगों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि किसी भी तरह का संक्रमण न हो। मासिक धर्म के दिनों में 4-5 घंटे के भीतर जरूर तौर पर पैड को बदलना चाहिए। अगर लड़कियां टैम्पॉन का इस्तेमाल कर रही हैं तो हर दो घंटे के भीतर इसे बदले। पीरियड्स के दौरान आने वाले गंध से बचने के लिए लड़कियों और महिलाओं को निजी अंगों की साफ-सफाई अच्छे तरह से करनी चाहिए। इन दिनों दर्द से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी से नहाए।