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बीमारी की भविष्यवाणी: अब संभव होगा वर्षों पहले यह बता देना कि कोई डायबिटीज से पीड़ित होगा या नहीं

Wed, 17 Nov 2021 07:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, स्टॉकहोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, स्टॉकहोम Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 17 Nov 2021 07:20 PM IST
सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया भर में मौत का कारण बनने वाली बीमारियों के बीच डायबिटीज का नौवां नंबर है। इससे दुनिया में लगभग 50 करोड़ लोग पीड़ित हैं। डायबिटीज के कुल जितने मामले में होते हैं, उनमें ज्यादातर टाइप-2 के होते हैं। टाइप-2 डायबिटीज के कारण अंधापन, किडनी फेल होने, हार्ट अटैक, पक्षाघात (स्ट्रोक) जैसी अधिक जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं...

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Swedish scientists claim they can predict whether a person will suffer with diabetes in the future
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

स्वीडन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे यह भविष्यवाणी कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति आगे चल कर डायबिटीज रोग से पीड़ित होगा या नहीं। इस दावे के मुताबिक टाइप-2 डायबिटीज के बारे में ऐसी भविष्यवाणी असल में रोग होने से 20 साल पहले भी की जा सकती है। जानकारों का कहना है कि स्वीडिश वैज्ञानिकों की इस सफलता से दुनिया भर में लाखों लोगों को लाभ होगा। जिन लोगों के आगे चल कर इस बीमारी से पीड़ित होने की आशंका होगी, वे पहले से इसे संभालने की तैयारी कर सकेंगे।

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मौत की वजह वालीं बीमारियों में नौवें स्थान पर डायबिटीज

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया भर में मौत का कारण बनने वाली बीमारियों के बीच डायबिटीज का नौवां नंबर है। इससे दुनिया में लगभग 50 करोड़ लोग पीड़ित हैं। डायबिटीज के कुल जितने मामले में होते हैं, उनमें ज्यादातर टाइप-2 के होते हैं। टाइप-2 डायबिटीज के कारण अंधापन, किडनी फेल होने, हार्ट अटैक, पक्षाघात (स्ट्रोक) जैसी अधिक जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी की वजह से कई बार जख्म ठीक नहीं होते, जिसकी वजह से इंसान के किसी अंग को काट कर निकालना पड़ता है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक 1980 से 2014 के बीच दुनिया में डायबिटीज मरीजों की संख्या चार गुना बढ़ गई।

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अब स्वीडन के ल्यूंड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि वे डायबिटीज की आशंका वाले मरीजों की पहचान कर सकते हैं। उनके मुताबिक ऐसे मरीजों के रक्त में फॉलिस्टेटिन नाम का प्रोटीन बढ़ा हुआ रहता है। जिन व्यक्ति के ब्लड में इस प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो, उसके बारे में यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि आगे चल कर वह डायबिटीज का मरीज बनेगा। ये भविष्यवाणी व्यक्ति की किसी भी उम्र में की जा सकती है। व्यक्ति का खानपान कैसा है, उसका वजन कितना है, और उसकी जीवन शैली कैसी है, उससे इस भविष्यवाणी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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चार से 19 साल के 5,300 लोगों की जांच

अनुसंधानकर्ताओं ने फॉलिस्टेटिन और डायबिटीज के बीच संबंध की पुष्टि के लिए स्वीडन, इटली और ब्रिटेन में 5,300 लोगों की जांच की। ये लोग चार से 19 वर्ष उम्र के थे। देखा गया कि फॉलिस्टेटिन के कारण शरीर में मौजूद वसा (फैट) में बिखराव होता है। इसकी वजह से लीवर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है। इस कारण लीवर का रोग और टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा

ल्यूंड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यांग डे मेरिनिस ने यूनिवर्सिटी के न्यूजलेटर में लिखा है- ‘हमारे अध्ययन से सामने आया है कि फॉलिस्टेटिन टाइप-2 डायबिटीज की भविष्यवाणी के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी बन सकता है। इस अध्ययन से हम इसे समझने के भी और ज्यादा करीब पहुंचे हैं कि आखिर डायबिटीज होता क्यों है।’ डॉ. मेरिनिस ने बताया है कि उनकी टीम का अगला कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जांच उपकरण बनाना होगा, जिससे मरीज के ब्लड सैंपल्स में फॉलिस्टेटिन की मात्रा जांची जा सके।



यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि फॉलिस्टेटिन बढ़ने का खानपान और शारीरिक सक्रियता के स्तर से सीधा संबंध देखा गया है। इसलिए डायबिटीज से बचाव के जो उपाय पहले सुझाए जाते रहे हैं, उनकी पुष्टि भी ताजा अध्ययन से हुई है। यानी संतुलित आहार और नियमित व्यायाम डायबिटीज से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

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