Shefali Jariwala: क्या होता है कार्डियक अरेस्ट, जिसे माना जा रहा है शेफाली की मौत का कारण? इसे कैसे पहचानें
- एक्ट्रेस-मॉडल शेफाली जरीवाला (42 वर्ष) का शुक्रवार को मुंबई में निधन हो गया। कुछ रिपोर्ट्स में कथित तौर पर मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को कारण माना जा रहा है।
- शेफाली के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, मौत के कारणों की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है।
- अब आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर ये कार्डियक अरेस्ट होता क्या है? किन लोगों को इसका खतरा होता है?
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Shefali Jariwala: बिग-बॉस 13 फेम, एक्ट्रेस-मॉडल शेफाली जरीवाला (42 वर्ष) का शुक्रवार को मुंबई में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके पति पराग त्यागी और तीन अन्य लोग शेफाली को लेकर मुंबई के बेलेव्यू मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शेफाली के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, मौत के कारणों की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है।
कुछ रिपोर्ट्स में कथित तौर पर मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को कारण माना जा रहा है, हालांकि अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स में भी मौत के लिए कार्डियक अरेस्ट को कारण बताया जा रहा था। अब आपके मन में भी सवाल होगा कि आखिर ये कार्डियक अरेस्ट होता क्या है? किन लोगों को इसका खतरा होता है और ये हार्ट अटैक से कितना अलग है?
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक, दोनों अलग-अलग
सडेन कार्डियक अरेस्ट, अनियमित हृदय गति के कारण हृदय की सभी गतिविधियों के अचानक बंद हो जाने को कहा जाता है, इसमें अचानक सांस रुक जाती है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है। अगर समय रहते इसका उपचार न हो पाए तो इससे मौत का खतरा काफी बढ़ सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में आपातकालीन उपचार में अगर तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दे दिया जाए तो इससे जान बचने की संभावना रहती है, हालांकि हार्ट अटैक की तुलना में इसे ज्यादा गंभीर और घातक माना जाता है।
अक्सर हम सभी कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही समस्या मानने की भूल कर देते हैं जबकि दोनों में कई सारे अंतर हैं। आइए पहले इसे समझते हैं।
- हार्ट अटैक, कोरोनरी धमनियों के अवरुद्ध हो जाने के कारण होने वाली समस्या है। यदि इस स्थिति को अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो हृदय तक रक्त का प्रवाह रुक जाता और पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
- वहीं कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब व्यक्ति का हृदय रक्त को पंप करना ही बंद कर देता है। इस स्थिति में रोगी सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता है। यह दोनों ही स्थितियां जानलेवा मानी जाती हैं।
कार्डियक अरेस्ट का सामान्य कारण हृदय गति में आने वाली अनियमितता को माना जाता है। हृदय की विद्युत प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही होती है, तब यह समस्या हो सकती है। इस स्थिति में सीने में दर्द, दिल की धड़कन में अनियमितता, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।
कैसे जानें किसी को कार्डियक अरेस्ट हुआ है?
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण पहले दिखाई नहीं देते हैं। कार्डिएक अरेस्ट अचानक होता है और हार्ट अटैक की तुलना में इसमें रोगी की जान जाने का खतरा भी अधिक हो सकता है। कार्डियक अरेस्ट के लक्षण तत्काल और गंभीर होते हैं जिनपर समय रहते ध्यान देना बहुत आवश्यक है। अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो गया है, नब्ज नहीं चल रही है, सांस नहीं आ रही है तो ये कार्डियक अरेस्ट का संकेत हो सकता है।
- कभी-कभी सडेन कार्डियक अरेस्ट से पहले भी कुछ लोगों में कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं, जिनपर भी गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है।
- इसमें सीने में तकलीफ, सांस फूलने, कमजोरी महसूस होने,धड़कन तेज होने की समस्या हो सकती है जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
कार्डियक अरेस्ट में पल्स और ब्लड प्रेशर बाधित हो जाता है। ऐसे में दिमाग और शरीर के अन्य हिस्सों में खून नहीं पहुंच पाता है, यह सभी चीजें काफी तेजी से हो रही होती हैं। यही कारण है कि कार्डियक अरेस्ट को ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
अब सवाल है कि कार्डियक अरेस्ट होने का कारण क्या है?
डॉक्टर बताते हैं, हृदय की विद्युत गतिविधि में परिवर्तन के कारण ये दिक्कत होती है। इस परिवर्तन के कारण हृदय रक्त पंप करना बंद कर देता है और शरीर में रक्त का प्रवाह नहीं हो पाता। कार्डियक अरेस्ट को समझने के लिए, हृदय की सिग्नलिंग प्रणाली के बारे में समझना जरूरी है। इन सिग्नलिंग में होने वाली किसी समस्या के कारण हृदय की गति बहुत तेज या बहुत धीमी हो सकती है। जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट होता है।
- यहां जानना जरूरी है कि कार्डियक अरेस्ट उन लोगों में भी हो सकता है जिन्हें पहले से कोई हृदय रोग नहीं है। वहां जिन्हें पहले से कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या रही है, हार्ट अटैक हो चुका है उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक होता है।
- हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा-डायबिटीज की स्थिति इस जोखिम को और भी बढ़ाने वाली होती है जिसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
कार्डियक अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने वाली जीवनशैली और खानपान के तरीकों को अपनाकर कार्डियक अरेस्ट से बचा जा सकता है। इसके लिए निरंतर हृदय-स्वस्थ को बेहतर बनाने वाले आहार का सेवन, नियमित व्यायाम, वजन को कंट्रोल रखना और धूम्रपान से बचना जरूरी है।
उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसी स्थितियों का प्रबंधन करना भी कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों से बचाव के लिए महत्वपूर्ण है। कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों स्थितियों में सीपीआर को जीवनरक्षक तरीका माना जाता है इसे सभी लोगों को सीखना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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