Alzheimer's Disease: क्या 25 से कम आयु वालों को भी हो सकता है अल्जाइमर, सैयारा मूवी के बाद हो रही है खूब चर्चा
- अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव मस्तिष्क से संबंधित विकार है जो धीरे-धीरे याददाश्त, तर्क और सोचने की क्षमता को कमजोर कर देता है। इसके कारण रोजमर्रा के कामकाज और शारीरिक गतिविधियां तक प्रभावित हो सकती हैं।
- फिल्म सैयारा की अभिनेत्री (22 वर्षीय) को अल्जाइमर रोग का शिकार दिखाया गया है। क्या अल्जाइमर रोग युवावस्था में भी हो सकता है?
विस्तार
हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म 'सैय्यारा' इन दिनों काफी चर्चा बटोर रही है। फिल्म देखकर रोते हुए लोगों के वायरल वीडियो आपने भी सोशल मीडिया पर देखे होंगे, पर इससे इतर फिल्म का एक और पहलू भी है। इसमें फिल्म की अभिनेत्री (22 वर्षीय) किरदार वानी बत्रा को अल्जाइमर रोग का शिकार दिखाया गया है।
जहां कई लोगों को कृष कपूर (अहान) और 22 वर्षीय महत्वाकांक्षी पत्रकार वाणी बत्रा (अनीत) की प्रेम कहानी में भावनात्मक जुड़ाव महसूस हुआ है, वहीं जो बात दर्शकों को पसंद नहीं आई, और जिसने लोगों के मन में कई सारे सवाल खड़े कर दिए वह है कम उम्र में ही अभिनेत्री का अल्जाइमर रोग से जूझते हुए दिखाया जाना।
ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अल्जाइमर रोग को आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ (65 साल के बाद) होने वाली बीमारी माना जाता रहा है। तो क्या इसके लक्षण 25 से कम उम्र वालों में भी नजर आ सकते हैं? क्या अल्जाइमर रोग युवावस्था में भी हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से डॉक्टर से समझते हैं।
पहले ये समझ लीजिए कि अल्जाइमर रोग आखिर होता क्या है?
अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव मस्तिष्क से संबंधित विकार है जो धीरे-धीरे याददाश्त, तर्क और सोचने की क्षमता को कमजोर कर देता है। इसके कारण रोजमर्रा के कामकाज और शारीरिक गतिविधियां तक प्रभावित हो सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ अल्जाइमर रोग होना सामान्य है, पर युवाओं में इसका होना दुर्लभ माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अल्जाइमर रोग के सटीक कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। लेकिन मूल रूप से जब मस्तिष्क के प्रोटीन सामान्य रूप से काम नहीं करते तो इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) का काम बाधित हो जाता है। न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त होने के कारण ब्रेन के जाल एक-दूसरे से संपर्क खो देते हैं जिसके कारण मस्तिष्क से संबंधित ये दिक्कतें होने लगती हैं।
क्या कम उम्र के लोग भी हो सकते हैं शिकार?
अल्जाइमर न्यूरोडीजेनेरेटिव मस्तिष्क से संबंधित विकार है, न्यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि इसकी शुरुआत आम तौर पर 40 से पहले नहीं होती है और 20-30 की उम्र वालो में अल्जाइमर या मस्तिष्क से संबंधित ये दिक्कतें बहुत दुर्लभ हैं और शायद ही कभी होते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 30 से कम उम्र के लोगों में मस्तिष्क से संबंधित इस तरह की समस्या होने का खतरा एक लाख लोगों में 100 से भी कम हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ संतोष सिंह बताते हैं, कई रिपोर्ट्स में पहले भी इस बात की चर्चा होती रही है कि 30 से कम उम्र के लोग अल्जाइमर का शिकार हो सकते हैं, हालांकि ये काफी दुर्लभ है। जिन लोगों के परिवार में इस रोग को पैदा करने वाले जीन की मजबूत हिस्ट्री रही है, ऐसे लोगों में उम्र के साथ मस्तिष्क से संबंधित विकारों का खतरा अधिक हो सकता है, पर जैसा फिल्म में दिखाया गया है 25 से कम आयु वालों में अल्जाइमर होना बहुत कॉमन नहीं है।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा जाता रहा है कि जिन बच्चों में डाउन सिंड्रोम की समस्या होती है उनमें दूसरों की तुलना में अल्जाइमर रोग का विकास कुछ पहले हो सकता है।
फिल्म में अनीत का किरदार भूलने की बीमारी से ग्रस्त है। इसके अलावा उसके पूर्व मंगेतर के सामने आने से उसे एक झटका सा लगता है, जिससे वह पिछले छह महीने के समय को भूल जाती है। डॉक्टर कहते हैं फिल्म में बहुत कुछ नाटकीय ढंग से पेश किया गया है। आमतौर पर अल्जाइमर की स्थिति सदमे से शुरू नहीं होती है।
इससे बचाव को लेकर अध्ययन में बड़ा खुलासा
एक अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि अगर आप नियमित रूप से उपवास करते हैं तो इससे मस्तिष्क में कुछ ऐसे परिवर्तन आ सकते हैं जिसकी मदद से अल्जाइमर जैसी गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
जर्नल न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित एक समीक्षा में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करना आपके लिए अल्जाइमर से बचाव में फायदेमंद हो सकता है। इस फास्टिंग की मदद मस्तिष्क में टॉक्सिन प्रोटीन बर्डन कम होता है जिससे विभिन्न प्रकार के न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों का खतरा कम होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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