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Alert: प्रतीक यादव की मौत के बाद चर्चा में पल्मोनरी एम्बोलिज्म, ऑफिस में काम करते हैं तो आप भी न हो जाएं शिकार

Sat, 16 May 2026 08:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 16 May 2026 08:08 PM IST
सार

मुलायम सिंह यादव के दत्तक पुत्र प्रतीक यादव का निधन बुधवार को हो गया। उनकी मौत फेफड़ों में खून के थक्के जमने के कारण हुई। ये समस्या किसी को भी हो सकती है, विशेषकर ऐसे लोगों में जो घंटों ऑफिस में बैठकर काम करते रहते हैं उनमें इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कैसे?

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prateek yadav death reason Prolonged sitting increases risk of Deep Vein Thrombosis and Pulmonary Embolism
फेफड़ों में थक्के बनने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का बुधवार (13 मई) को निधन हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स बताई गई है, जो फेफड़ों में खून का थक्का जमने से  हुआ। फेफड़ों में खून के थक्के हो जाएं या फिर ये  फेफड़े की किसी धमनी में फंस जाए तो इसे खून का बहाव रुक जाता है। इस स्थिति को पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक यह स्थिति अचानक सांस रुकने, ऑक्सीजन की कमी और हृदय पर जानलेवा दबाव बढ़ने का कारण बन सकती है।

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डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको अचानक सांस फूलने, सीने में तेज दर्द, धड़कन तेज होने, चक्कर आने, खांसी में खून आना और बेचैनी जैसी दिक्कतें हो रही हैं तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। कई बार यह स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ती है कि मरीज को संभलने का मौका तक नहीं मिलता, यही वजह है कि इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
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क्या आप जानते हैं कि ऑफिस में काम करने वाले या फिर लंबी यात्रा पर रहने वाले लोगों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा ज्यादा होता है? अक्सर लोग ये भी नहीं जानते हैं कि फेफड़ों की इस समस्या का संबंध आपके पैरों से होता है। कैसे, आइए जानते हैं।

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फेफड़ों में थक्के बनने की समस्या - फोटो : Adobe Stock

पल्मोनरी एम्बोलिज्म  का बढ़ता खतरा

प्रतीक यादव की मौत के बाद से पल्मोनरी एम्बोलिज्म को लेकर काफी चर्चा है। विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो ये समस्या किसी को भी हो सकती है, हालांकि बैठे-बैठे काम करने वाली जीवनशैली ने इस खतरे को बढ़ा दिया है। कोविड महामारी के बाद वर्क फ्रॉम होम कल्चर और शारीरिक गतिविधि की कमी ने भी इस समस्या को बढ़ा दिया है।


अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ विक्रम कपूर कहते हैं, आजकर लोग घंटों पर बैठे रहते हैं। ऑफिस का काम हो या मीटिंग्स, लगातार बैठकर काम करने की आदत शरीर को धीरे-धीरे अंदर से नुकसान पहुंचा रही है।
 

  • लंबे समय तक बैठे रहने की आदत शरीर में खून के प्रवाह को धीमा कर सकती है। 
  • यह स्थिति पैरों की नसों में खून के थक्के यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) का कारण बनती है। 
  • जब यही थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है या फेफड़ों की नसों में फंसकर उसे ब्लॉक करने लगता है तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
  • यही कारण है कि ऑफिस में घंटों बैठकर काम करते रहने या फिर सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों को लगातार सावधान किया जाता रहा है।

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पैरों में थक्के बनने की समस्या - फोटो : Adobe

डीप वेन थ्रोम्बोसिस के बारे में जानिए

डीप वेन थ्रोम्बोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें खासकर पैरों की नसों में खून का थक्का बनने लगता है। लंबे समय तक बैठे रहने से पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता कम हो जाती है जिससे खून का संचार धीमा हो जाता है। 
 

  • ये स्थिति क्लॉटिंग का खतरा बढ़ा देती है। डीवीटी के शिकार लोगों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने का जोखिम काफी ज्यादा देखा जाता रहा है।
  • पैरों में सूजन, गर्माहट महसूस होना, दर्द बने रहना या त्वचा का लाल पड़ना डीप वेन थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकता है। 
  • कई मामलों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते और खतरा बढ़ता जाता है।
  • लंबे समय तक बैठे रहने के अलावा मोटापा, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल भी डीवीटी का खतरा बढ़ा सकता है।
  • यही वजह है कि ऑफिस में काम करने वाले सभी लोगों को हर 30-40 मिनट बाद कम से कम 2 मिनट चलने की सलाह दी जाती है जिससे खून का संचार बाधित न होने पाए।

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वॉक करने से कम होता है डीवीटी का खतरा - फोटो : Freepik.com

डीवीटी और पल्मोनरी एम्बोलिज्म के जोखिमों को कैसे कम करें?
 

डॉक्टर विक्रम बताते हैं,  इस खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी है शरीर को लगातार गतिशील रखना। नियमित रूप से वॉक करने या ऑफिस में थोड़ी-थोड़ी देर पर चल लेने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है और थक्कों का खतरा कम हो जाता है।
 

  • इसके लिए दिनभर में खूब पानी पीते रहना भी बेहद जरूरी है। पानी की कमी खून को गाढ़ा बना देती है, जिससे क्लॉटिंग का खतरा हो सकता है। 
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, तेज वॉक या साइकलिंग करें। इससे रक्त का संचार ठीक रहता है।
  • ऑफिस में पैरों को लंबे समय तक क्रॉस करके न बैठें इससे भी डीवीटी का खतरा बढ़ जाता है।
  • डीवीटी और पल्मोनरी एम्बोलिज्म से बचाव के लिए धूम्रपान छोड़ना, वजन को कंट्रोल रखना और पौष्टिक आहार का सेवन करते रहना भी जरूरी है।
  • नियमित रूप से बॉडी चेकअप कराते रहना चाहिए ताकि किसी भी गंभीर समस्या का समय रहते पता चल जाए और इलाज हो सके।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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