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20s में PMOS के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताया किन लक्षणों पर दें ध्यान
Mon, 14 Sep 2026 11:33 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:33 AM IST
सार
PMOS in 20s: डॉक्टर से जानें, 20 की उम्र में अनियमित पीरियड्स, मुंहासे और वजन बढ़ना PCOS के संकेत कैसे हो सकते हैं और समय पर पहचान क्यों जरूरी है।
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20 की उम्र में PMOS के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
- फोटो : AI
विस्तार
PMOS in 20s: PMOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को आमतौर पर पीरियड्स में गड़बड़ी और गर्भधारण से जुड़ी समस्या के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसका असर महिलाओं की सेहत पर इससे कहीं व्यापक हो सकता है। पैथोलॉजिस्ट डॉ. मायंका लोढ़ा सेठ के मुताबिक, 20 की उम्र में अनियमित पीरियड्स, लगातार मुंहासे, अचानक वजन बढ़ना और शरीर पर अत्यधिक बाल आना जैसे बदलावों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. के अनुसार, PMOS गर्भधारण की उम्र वाली करीब 10 से 13 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाओं में इसका सही समय पर निदान नहीं हो पाता। खासकर युवा महिलाएं कई बार लक्षणों को तनाव, लाइफस्टाइल या सामान्य हार्मोनल बदलाव से जोड़ देती हैं। इससे समस्या की पहचान में देरी हो सकती है।
हर महिला में एक जैसे नहीं दिखते लक्षण
PMOS की एक बड़ी चुनौती यह है कि इसके सभी लक्षण एक साथ दिखाई देना जरूरी नहीं है। किसी महिला को लगातार मुंहासे हो सकते हैं, लेकिन वह उन्हें अपने मासिक धर्म चक्र से जोड़कर नहीं देखती। वहीं, अनियमित पीरियड्स को भी कई बार सामान्य मान लिया जाता है। शरीर पर जरूरत से ज्यादा बाल आना या अचानक वजन बढ़ना भी हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकता है।
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डॉ. मायंका का कहना है कि महिलाओं को अलग-अलग लक्षणों के बजाय उनके पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स में बदलाव, मुंहासे और अत्यधिक बालों की समस्या अगर लगातार बनी हुई है, तो इसे डॉक्टर के साथ साझा करना जरूरी है।
सिर्फ अल्ट्रासाउंड से नहीं होता PMOS का निदान
PMOS को लेकर एक आम धारणा है कि अल्ट्रासाउंड में ओवरी पर सिस्ट दिखाई देने का मतलब PMOS होना है। हालांकि, इसका निदान केवल अल्ट्रासाउंड के आधार पर नहीं किया जाता। डॉक्टर महिला के मासिक धर्म के पैटर्न, हार्मोन से जुड़े संकेतों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच को भी ध्यान में रखते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य संभावित कारणों की जांच भी की जाती है।
PMOS सिर्फ प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्या नहीं
PMOS का असर केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। डॉ. मायंका लोढ़ा सेठ के मुताबिक, इस स्थिति से इंसुलिन रेजिस्टेंस, ब्लड शुगर के असामान्य स्तर, कोलेस्ट्रॉल में गड़बड़ी और पेट के आसपास चर्बी बढ़ने जैसे मेटाबॉलिक जोखिम जुड़े हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये जोखिम केवल अधिक वजन वाली महिलाओं में ही नहीं होते। सामान्य वजन वाली महिलाओं में भी PMOS से जुड़े मेटाबॉलिक जोखिम हो सकते हैं। इसलिए PMOS की पहचान होने पर महिला के संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन जरूरी हो जाता है।
निदान के समय मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी ध्यान
PMOS के कारण अक्सर महिलाएं पीरियड्स में अनियमितता या गर्भधारण में परेशानी के चलते डॉक्टर से संपर्क करती हैं। यही समय मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और अन्य स्वास्थ्य मानकों की जांच की जा सकती है।
डॉ. मायंका के मुताबिक, PMOS को केवल तब गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है जब महिला गर्भधारण की योजना बनाए। इसकी शुरुआती पहचान से लक्षणों और संभावित मेटाबॉलिक जोखिमों को समझने तथा उन्हें बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं को किन संकेतों पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, मुंहासे बार-बार हो रहे हैं, शरीर पर अत्यधिक बाल बढ़ रहे हैं, वजन तेजी से बढ़ रहा है या वजन नियंत्रित करने में लगातार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। इन लक्षणों का मतलब हर बार PMOS होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने पर इनके कारण की जांच जरूरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का संदेश साफ है कि PMOS को केवल प्रजनन संबंधी समस्या मानने के बजाय महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य से जोड़कर देखना चाहिए। समय पर पहचान और चिकित्सकीय सलाह के साथ इसके लक्षणों और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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डॉ. के अनुसार, PMOS गर्भधारण की उम्र वाली करीब 10 से 13 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाओं में इसका सही समय पर निदान नहीं हो पाता। खासकर युवा महिलाएं कई बार लक्षणों को तनाव, लाइफस्टाइल या सामान्य हार्मोनल बदलाव से जोड़ देती हैं। इससे समस्या की पहचान में देरी हो सकती है।
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हर महिला में एक जैसे नहीं दिखते लक्षण
PMOS की एक बड़ी चुनौती यह है कि इसके सभी लक्षण एक साथ दिखाई देना जरूरी नहीं है। किसी महिला को लगातार मुंहासे हो सकते हैं, लेकिन वह उन्हें अपने मासिक धर्म चक्र से जोड़कर नहीं देखती। वहीं, अनियमित पीरियड्स को भी कई बार सामान्य मान लिया जाता है। शरीर पर जरूरत से ज्यादा बाल आना या अचानक वजन बढ़ना भी हार्मोनल असंतुलन की ओर इशारा कर सकता है।
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डॉ. मायंका का कहना है कि महिलाओं को अलग-अलग लक्षणों के बजाय उनके पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए। पीरियड्स में बदलाव, मुंहासे और अत्यधिक बालों की समस्या अगर लगातार बनी हुई है, तो इसे डॉक्टर के साथ साझा करना जरूरी है।
सिर्फ अल्ट्रासाउंड से नहीं होता PMOS का निदान
PMOS को लेकर एक आम धारणा है कि अल्ट्रासाउंड में ओवरी पर सिस्ट दिखाई देने का मतलब PMOS होना है। हालांकि, इसका निदान केवल अल्ट्रासाउंड के आधार पर नहीं किया जाता। डॉक्टर महिला के मासिक धर्म के पैटर्न, हार्मोन से जुड़े संकेतों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच को भी ध्यान में रखते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य संभावित कारणों की जांच भी की जाती है।
PMOS सिर्फ प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्या नहीं
PMOS का असर केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। डॉ. मायंका लोढ़ा सेठ के मुताबिक, इस स्थिति से इंसुलिन रेजिस्टेंस, ब्लड शुगर के असामान्य स्तर, कोलेस्ट्रॉल में गड़बड़ी और पेट के आसपास चर्बी बढ़ने जैसे मेटाबॉलिक जोखिम जुड़े हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये जोखिम केवल अधिक वजन वाली महिलाओं में ही नहीं होते। सामान्य वजन वाली महिलाओं में भी PMOS से जुड़े मेटाबॉलिक जोखिम हो सकते हैं। इसलिए PMOS की पहचान होने पर महिला के संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन जरूरी हो जाता है।
निदान के समय मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी ध्यान
PMOS के कारण अक्सर महिलाएं पीरियड्स में अनियमितता या गर्भधारण में परेशानी के चलते डॉक्टर से संपर्क करती हैं। यही समय मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और अन्य स्वास्थ्य मानकों की जांच की जा सकती है।
डॉ. मायंका के मुताबिक, PMOS को केवल तब गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है जब महिला गर्भधारण की योजना बनाए। इसकी शुरुआती पहचान से लक्षणों और संभावित मेटाबॉलिक जोखिमों को समझने तथा उन्हें बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं को किन संकेतों पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, मुंहासे बार-बार हो रहे हैं, शरीर पर अत्यधिक बाल बढ़ रहे हैं, वजन तेजी से बढ़ रहा है या वजन नियंत्रित करने में लगातार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। इन लक्षणों का मतलब हर बार PMOS होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने पर इनके कारण की जांच जरूरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का संदेश साफ है कि PMOS को केवल प्रजनन संबंधी समस्या मानने के बजाय महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य से जोड़कर देखना चाहिए। समय पर पहचान और चिकित्सकीय सलाह के साथ इसके लक्षणों और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।